स्टारलिंक विवाद: 'मैं अश्वेत नहीं हूं, इसलिए रोका', एलन मस्क ने दक्षिण अफ्रीका को बताया 'नस्लवादी'

स्टारलिंक को लेकर एलन मस्क और साउथ अफ्रीका के बीच टकराव तेज हो गया है. मस्क ने नस्लीय भेदभाव का आरोप लगाते हुए वहां के कानूनों को खुला नस्लवाद बताया है. वहीं साउथ अफ्रीका ने साफ कर दिया है कि नियमों से कोई समझौता नहीं होगा.

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साउथ अफ्रीका में इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशंस एक्ट के तहत किसी भी कंपनी को लाइसेंस दिया जाता है. (File Photo: ITG) साउथ अफ्रीका में इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशंस एक्ट के तहत किसी भी कंपनी को लाइसेंस दिया जाता है. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:03 PM IST

दुनिया के चर्चित उद्योगपति एलन मस्क और साउथ अफ्रीका सरकार के बीच स्टारलिंक को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. मस्क ने वहां की सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को सिर्फ इसलिए रोका जा रहा है क्योंकि वो अश्वेत नहीं हैं. इसके साथ ही उन्होंने देश के कानूनों को खुले तौर पर नस्लवादी करार दिया है.

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मंगलवार को X (पूर्व में ट्विटर) पर एलन मस्क ने दावा किया कि साउथ अफ्रीका के नस्ल-आधारित कानूनों के कारण स्टारलिंक को ऑपरेटिंग लाइसेंस नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उन्हें नियमों से बचने के लिए दिखावटी अश्वेत अधिकारी नियुक्त करने का सुझाव दिया, जिसे उन्होंने रिश्वत जैसा प्रस्ताव मानते हुए ठुकरा दिया.

एलन मस्क ने लिखा कि साउथ अफ्रीका स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं देगा, भले ही उनका जन्म वहीं हुआ हो, सिर्फ इसलिए क्योंकि वो अश्वेत नहीं हैं. उन्होंने ऐसे कानूनों को बुरा बताते हुए कहा कि नस्लवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. यह पूरा विवाद साउथ अफ्रीका की ब्रॉड-बेस्ड ब्लैक इकोनॉमिक एम्पावरमेंट यानी B-BBEE नीति से जुड़ा है. 

यह नीति 1994 में रंगभेद की समाप्ति के बाद लागू की गई थी, जिसका उद्देश्य ऐतिहासिक आर्थिक असमानताओं को दूर करना है. इसके तहत कंपनियों को अश्वेत नागरिकों, महिलाओं और दिव्यांगों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होती है. दूरसंचार क्षेत्र में यह नियम और सख्त है. इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशंस एक्ट के तहत किसी भी कंपनी को लाइसेंस दिया जाता है.

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इसके लिए यह सुनिश्चित करना होता है कि कम से कम 30 प्रतिशत स्वामित्व वंचित समूहों के पास हो. यही नियम विदेशी कंपनियों जैसे स्टारलिंक पर भी लागू होता है. यही वजह है कि मस्क की कंपनी को साउथ अफ्रीका में अभी तक ऑपरेटिंग लाइसेंस नहीं मिल सका है. सरकार का कहना है कि यह नियम सभी के लिए समान है. हर किसी को पालन करना होता है.

साउथ अफ्रीका में कई विदेशी कंपनियां इन्हीं कानूनों का पालन करते हुए सफलतापूर्वक काम कर रही हैं. मस्क की आलोचना के जवाब में साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति के प्रवक्ता विंसेंट मगवेन्या ने कहा कि यदि वो स्थानीय नियमों का पालन नहीं कर सकते, तो उन्हें दूसरे बाजारों की ओर रुख करना चाहिए. उन्होंने कहा कि दुनिया में 193 देश हैं. दूसरे बाजारों में भी अवसर हैं.

एक अन्य अधिकारी क्लेसन मोनेला ने भी एलन मस्क के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इसका उनकी त्वचा के रंग से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि स्टारलिंक का स्वागत है, लेकिन उसे नियमों का पालन करना होगा. इस विवाद के बीच मस्क ने अपने पुराने बयानों को भी दोहराया, जिसमें उन्होंने साउथ अफ्रीका में श्वेत लोगों के खिलाफ भेदभाव के आरोप लगाए थे. 

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