इबोला पर कांगो में बवाल... गलत जांच, डेड बॉडीज न मिलने पर फूट रहा लोगों का गुस्सा

अफ्रीका के देशों में इबोला वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, WHO ने इसे इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है. कांगो में 900 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं, इस वायरस का कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है.

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इबोला एक खतरनाक वायरस से होने वाली बीमारी है.(File Photo: ITG) इबोला एक खतरनाक वायरस से होने वाली बीमारी है.(File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:43 AM IST

दुनिया एक बार फिर महामारी के खतरे का सामना कर रही है. अफ्रीका के कुछ देशों में इबोला वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने इबोला वायरस को इंटरनेशनल पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी  घोषित किया है. WHO प्रमुख ने रविवार को बताया कि कांगो में इबोला के 900 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से 101 मामलों की पुष्टि की गई है. 

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कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के इतुरी प्रांत में रवामपारा और मोंगबवालु इलाकों में उपचार केंद्रों को जलाए जाने की घटना भी सामने आई है. जहां सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं. कुछ समुदायों में बढ़ता विरोध महामारी से निपटने की कोशिशों को और जटिल बना रहा है.

लोगों के गुस्से की बड़ी वजह इबोला से संदिग्ध मौतों के अंतिम संस्कार को लेकर बनाए गए सख्त नियम माने जा रहे हैं. क्योंकि बीमारी के और फैलाव को रोकने के लिए प्रशासन जहां संभव हो, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया खुद संभाल रहा है. 

लोग स्थानीय सरकार की विफलता और अंतरराष्ट्रीय सहायता में कटौती जैसी समस्याओं से भी जूझ रहे हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, इबोला को लेकर जांच प्रक्रिया में खामियों का मामला भी सामने आया है. कई चुनौतियों और गलतियों की वजह से संक्रमण की पहचान में देरी हुई है.

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यह भी पढ़ें: कांगो में इबोला वायरस से 80 मौतें, WHO ने घोषित की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी

बता दें, इबोला एक खतरनाक वायरस से होने वाली बीमारी है, जो कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकती है. यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे खून, उल्टी, पसीना और वीर्य के संपर्क में आने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने जानकारी दी है कि यह महामारी बंडिबुग्यो वायरस के कारण हुई है. इसके लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. इबोला के सभी स्ट्रेन के लक्षण लगभग एक जैसे माने जाते हैं, हालांकि ये धीरे-धीरे गंभीर होते जाते हैं. शुरुआत में इसके लक्षण फ्लू जैसे दिखाई देते हैं, जैसे अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, थकान और कमजोरी. इसके कुछ दिनों बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गले में खराश जैसी समस्याएं भी सामने आने लगती हैं.

बीमारी बढ़ने पर आंखों, मसूड़ों या शरीर के अन्य हिस्सों से बिना वजह खून बहना, शरीर पर चोट जैसे निशान पड़ना, सांस लेने में दिक्कत और कई मामलों में अंगों का फेल होना जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं. संक्रमण के 2 से 21 दिनों के भीतर इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं.

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हालांकि, वैक्सीन उपलब्ध न होने की स्थिति में भी वायरस के फैलाव को रोकने और लोगों की जान बचाने के लिए कई कदम उठाए जा सकते हैं, इनमें सही जानकारी देना और सामूहिक भागीदारी बढ़ाना जैसे उपाय शामिल हैं.

कांगो, युगांडा की यात्रा न करने की सलाह

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत ने अफ्रीका CDC (सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन) को आवश्यक मेडिकल सप्लाई और प्रोटेक्टिव किट्स की पहली खेप भेजी है. उभरते इबोला पब्लिक हेल्थ इमरजेसी के लिए हम अफ्रीका के समर्थन के लिए प्रतिबद्ध हैं.

इबोला के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने देशवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है. सरकार ने एडवाइजरी जारी कर नागरिकों से अपील की है कि वे डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की यात्रा से फिलहाल बचें. मंत्रालय ने कहा है कि जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक इन देशों की गैर-जरूरी यात्राओं को टालना ही बेहतर और समझदारी भरा कदम होगा.

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