'रूस-ईरान का बैन तेल सस्ते में खरीद रहा चीन', अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप से की शिकायत

अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप से चीन के प्रतिबंधित तेल आयात पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने 2025 में रूस, ईरान और वेनेजुएला से प्रतिबंधित तेल का काफी आयात किया और वो वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर रहा है.

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चीन भारी मात्रा में प्रतिबंधित तेल खरीद रहा है जिससे अमेरिका नाराज है (Photo: AFP) चीन भारी मात्रा में प्रतिबंधित तेल खरीद रहा है जिससे अमेरिका नाराज है (Photo: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:21 PM IST

दुनिया में प्रतिबंधित तेल का सबसे बड़ा खरीददार चीन है जो सस्ते दामों पर भारी मात्रा में तेल की खरीद करता है. अमेरिका को चीन की यह खरीद हमेशा से अखरती रही है और अब कुछ अमेरिकी सांसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मांग कर रहे हैं कि चीन के प्रतिबंधित तेल आयात पर कार्रवाई की जाए. सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से मांग की है कि ऐसे आयात में शामिल बंदरगाह ऑपरेटर्स को ब्लैकलिस्ट किया जाए और पेमेंट नेटवर्क को भी रोक दिया जाए.

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ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध के कारण तेल और गैस की कीमतें अचानक से काफी बढ़ गई हैं. कीमतों पर दबाव कम करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस और ईरान के तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी रूप से छूट जारी की है. बावजूद इसके, अमेरिकी सांसदों को चीन का रूस और ईरान से ब्लैक मार्केट के जरिए तेल खरीदना अखर रहा है.

'हाउस सेलेक्ट कमिटी ऑन स्ट्रैटेजिक कंपटीशन बिट्विन द यूनाइटेड स्टेट्स एंड द चाइनीज कम्यूनिस्ट पार्टी' ने 41 पन्नों की एक रिपोर्ट जारी की है. इसमें सिफारिश की गई है कि चीन को प्रतिबंधित कच्चा तेल खरीदने से रोका जाए.  

अमेरिका की यह कमिटी चीन से जुड़ी चुनौतियों की जांच और नीतियां बनाने के लिए गठित एक द्विदलीय पैनल है. रिपोर्ट में पैनल ने चेतावनी दी कि मौजूदा खामियों को दूर करना जरूरी है.

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चीन ने इससे पहले इस तरह के आरोपों पर कहा था कि वो अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार के बिना लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों का पुरजोर विरोध करता है.

अमेरिकी रिपोर्ट में चीन के प्रतिबंधित तेल खरीद पर क्या कहा गया?

अमेरिकी पैनल की रिपोर्ट में डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि 2025 में रूस, ईरान और वेनेजुएला से चीन का प्रतिबंधित तेल आयात बढ़कर 26 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया. यह उसके कुल समुद्री तेल आयात का लगभग एक-चौथाई है.

रिपोर्ट के लेखकों का कहना है कि पश्चिमी देशों ने रूस, ईरान और वेनेजुएला के तेल पर प्रतिबंध लगाया था ताकि उनकी कमाई रुके लेकिन ये तो नहीं हो पाया, उल्टे रियायती तेल चीन के पास बड़ी मात्रा में पहुंचने लगा.

पैनल ने यह जांच करने की मांग की है कि रूसी तेल खरीदने वाली विदेशी रिफाइनरियां बाजार में हेरफेर तो नहीं कर रही हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी चिंता ये है कि ओवर-द-काउंटर लेनदेन की वजह से वैश्विक बेंचमार्क तेल कीमतें कम हो रही हैं. इससे नियमों का पालन करने वाली अमेरिकी रिफाइनरियों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान हो रहा है.

समिति ने यह भी सुझाव दिया कि जब होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति सामान्य हो जाए तो तेल उत्पादक देशों के समूह (OPEC- Organization of the Petroleum Exporting Countries) और उसके सहयोगी समूह OPEC+ के देशों, जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इराक के साथ मिलकर उत्पादन बढ़ाने की योजना तैयार की जाए.

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युद्ध की शुरुआत से ही अमेरिका और इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है. यह समुद्री रास्ता तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद अहम है जहां से कुल तेल व्यापार का 20% हिस्सा गुजरता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कीमतें लंबे समय तक कम रहती हैं तो रूस और ईरान को चीन से होनेवाली आय कम हो सकती है और चीन के लिए प्रतिबंधित आय का आकर्षण भी कम हो सकता है.

प्रतिबंधित तेल आयात के पेमेंट सिस्टम पर कार्रवाई की मांग

पैनल ने अमेरिकी सरकार से यह भी कहा है कि वो पेमेंट की प्रक्रिया में शामिल मध्यस्थ संस्थाओं, जैसे करेंसी एक्सचेंज केंद्र और प्रॉक्सी खातों की जांच करे और इसकी जानकारी देने वाले व्हिसलब्लोअर्स को इनाम दिया जाए.

समिति ने अमेरिकी कोस्ट गार्ड की साइबर टीम का विस्तार करने की भी सिफारिश की है, ताकि शैडो फ्लीट की पहचान और उन पर कार्रवाई बेहतर तरीके से की जा सके. शैडो फ्लीट उन जहाजों को कहा जाता है जो अक्सर ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) डेटा में हेरफेर कर अपनी वास्तविक स्थिति छिपाते हैं.

2025 में जब अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात में सहयोग के आरोप में चीन से जुड़ी कुछ कंपनियों और लोगों पर प्रतिबंध लगाए थे तब चीन ने इसे गैरकानूनी बताते हुए इसका विरोध किया था. चीन ने कहा था कि अमेरिका को चीन और ईरान के बीच व्यापार में हस्तक्षेप बंद करना चाहिए.

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