डिप्लोमेसी, इंटेलिजेंस और मिलिट्री पावर... लारिजानी की मौत का ईरान के लिए क्या मतलब है?

ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी कूटनीति, खुफिया और सैन्य शक्ति को जोड़ने वाले शीर्ष नेताओं में थे. उनकी कमी से ईरान की जोखिम आंकने की क्षमता कमजोर होगी और सुरक्षा नेटवर्क में तालमेल की समस्या बढ़ सकती है.

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लारिजानी की मौत इजरायली हमलों में हुई. (Photo: Reuters) लारिजानी की मौत इजरायली हमलों में हुई. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:22 AM IST

इजरायली हमले में ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी की मौत हो गई. लारीजानी की मौत ने इस्लामिक रिपब्लिक के सिक्योरिटी सिस्टम को हिलाकर रख दिया है. वो ईरानी शासन के केंद्रीय सुरक्षा के टॉप लीडर्स में से एक थे.

अली लारीजानी की मौत 2020 में कासिम सुलेमानी की हत्या की याद दिलाता है. लारीजानी भी सुलेमानी की तरह कूटनीति, खुफिया जानकारी और सैन्य शक्ति को जोड़ने वाली एक अहम कड़ी थे.

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विशेषज्ञों का मानना है कि लारीजानी की कमी से ईरान की जोखिम आंकने की क्षमता कमजोर होगी. कासिम सुलेमानी की मौत के बाद भी ईरान के नेटवर्क में तालमेल की कमी देखी गई थी.  

सुलेमानी के जाने के बाद जो खालीपन आया, उसे कोई पूरी तरह नहीं भर सका. अब लारीजानी के जाने से ये बिखराव और बढ़ सकता है. क्रिश्चियन अमनपौर की रिपोर्ट के मुताबिक, जब ईरान में हालात बिगड़ रहे थे, तब पश्चिमी देशों को लगा कि अली लारीजानी वो शख्स हो सकते हैं जो पुराने सिस्टम और भविष्य के नए सिस्टम के बीच एक 'पुल' का काम करेंगे.

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लारीजानी का सफर: जनरल से रणनीतिकार तक

लारीजानी ने अपने करियर की शुरुआत ईरान-इराक युद्ध के दौरान की थी, जहां वो रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) में ब्रिगेडियर जनरल के पद तक पहुंचे. उन्होंने 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग' (IRIB) के प्रमुख (1994–2004) के तौर पर भी काम किया. उनके नेतृत्व में मीडिया ने खुफिया सेवाओं के साथ मिलकर शासन के लिए वफादारी मजबूत करने और असहमति को दबाने का काम किया.

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2025 में सुरक्षा प्रमुख बनने के बाद, परमाणु नीति और संकट प्रबंधन में उनकी भूमिका और मजबूत हो गई थी.

28 फरवरी को एक हमले में सुप्रीम नेता अली खामेनेई की मौत के बाद, लारीजानी का नाम बार-बार सामने आ रहा था. लारीजानी उन गिने-चुने लोगों में से थे जो इन बिखरे हुए हिस्सों को केंद्रीय कमान से जोड़ने की काबिलियत रखते थे. उनके जाने से सिस्टम की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

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लारीजानी की मौत से ईरान के कमांड सिस्टम में जवाबी कार्रवाई का दबाव बढ़ सकता है. उनकी मौत से इस्लामिक रिपब्लिक कहीं न कहीं बिखर गया है और बिखरी हुए सिस्टम में ही काम कर रहा है. सत्ता अब मौलवियों, IRGC कमांडरों और बासिज संरचनाओं के जरिए लोकल लेवल पर चल रही है.

कुल मिलाकर लारीजानी की मौत के बाद ईरान का सिक्योरिटी सिस्टम थर्राकर रह गया है. इजरायली हमले में लारीजानी के साथ-साथ उनके बेटे और बॉडीगार्ड की भी मौत हो गई. अब सवाल ये है कि लारीजाी के बाद ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव पद की कमान कौन संभालेगा.

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