काबुल गुरुद्वारा कमेटी संग तालिबान की मीटिंग, कहा- हिंदुओं-सिखों को परेशान नहीं किया जाएगा

तालिबान ने जोर देकर कहा है कि अफगानिस्तान में हिंदू और सिख एकदम सुरक्षित हैं. ये बयान तालिबान ने काबुल गुरुद्वारा कमेटी से मिलने के बाद दिया है.

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तालिबान की काबुल गुरुद्वारा कमेटी संग बैठक तालिबान की काबुल गुरुद्वारा कमेटी संग बैठक

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 8:55 AM IST
  • 'अफगानिस्तान में हिंदू और सिख एकदम सुरक्षित'
  • अल्पसंख्यकों को नहीं तालिबान पर भरोसा

अफगानिस्तान में जब से तालिबान की वापसी हुई है, अल्पसंख्यकों को अपनी सुरक्षा को लेकर काफी चिंता है. क्या हिंदू क्या सिख, सभी इस समय खौफजदा हैं और तालिबान राज से दूर भागने की कोशिश कर रहे हैं. भारत ने भी अफगान में रह रहे हिंदू और सिख समुदाय के लोगों को शरण देने की बात कह दी है. लेकिन अब इस बीच तालिबान का बड़ा बयान सामने आया है.

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'अफगानिस्तान में हिंदू और सिख एकदम सुरक्षित'

तालिबान ने जोर देकर कहा है कि अफगानिस्तान में हिंदू और सिख एकदम सुरक्षित हैं. ये बयान तालिबान ने काबुल गुरुद्वारा कमेटी से मिलने के बाद दिया है. आश्वासन दिया गया है कि अफगानिस्तान में हिंदुओं और सिख को परेशान नहीं किया जाएगा और उन्हें पूरी सुरक्षा भी मिलेगी. तालिबान संग काबुल गरुद्वारा कमेटी की हुई इस मीटिंग की एक तस्वीर भी सामने आई है जहां पर कई सारे तालिबानी नेता बैठे दिख रहे हैं.

जानकारी के लिए बता दें कि कुछ समय पहले खबर आई थी कि काबुल के एक गुरुद्वारे में तालिबान के डर के कारण 200 लोगों ने शरण ले रखी थी. इसमें ज्यादातर हिंदू और सिख समुदाय के लोग थे. कई तो ऐसे भी थे जो अब सीधे अमेरिका या कनाडा जाने का मन बना रहे थे. उन्हें तालिबान पर कोई भरोसा नहीं था.

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अल्पसंख्यकों को नहीं तालिबान पर भरोसा

लेकिन अब उसी भरोसे को जीतने के लिए तालिबान ने काबुल गुरुद्वारा कमेटी संग ये मीटिंग की है. मीटिंग में स्पष्ट कहा गया है कि किसी को डरने की जरूरत नहीं है और सभी को सुरक्षा दी जाएगी. लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए कोई भी तालिबान के आश्वासनों पर विश्नास नहीं कर रहा है. अभी तालिबान की करनी और कथनी में काफी अंतर है. वैसे भी अफगानिस्तान में शरिया कानून लागू करने की बात कह चुका तालिबान अब अल्पसंख्यकों को कितनी आजादी देगा, ये अपने आप में एक बड़ा सवाल है.

इसी संशय की वजह से अफगानिस्तान में मौजूद अल्पसंख्यक डर रहे हैं. उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है. तालिबान जरूर अपनी छवि को बदलने के प्रयास में है, लेकिन उसकी हरकतें भी जगजाहिर हैं और उसकी विचारधारा भी स्पष्ट संदेश दे रही है.

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