तृणमूल कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे बड़े संकट से जूझ रही है. पार्टी के विधायकों का एक धड़ा शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष मानने से इनकार कर रहा है. शोभनदेब चट्टोपाध्याय को ममता बनर्जी ने नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए चुना है. 60 बागी विधायकों का गुट ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाना चाहते हैं. लेकिन ममता ने ऋतब्रत बनर्जी को कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए TMC से निलंबित कर दिया है. हालांकि ये 60 बागी विधायक पूर्व सीएम ममता बनर्जी को ही पार्टी नेता के तौर पर देखना चाहते हैं.
इन बागी विधायकों ने स्पीकर को जो पत्र सौंपा है उसमें 58 विधायकों के हस्ताक्षर हैं, दो और विधायकों द्वारा इस पत्र पर हस्ताक्षर करने की बात कही जा रही है. ये पत्र सौंपकर ही विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग की है.
विधानसभा चुनाव में TMC के 80 विधायक जीते हैं, अलग गुट बनाने के लिए इन्हें नियमों के अनुसार कम से कम दो तिहाई यानी कि 53 विधायक चाहिए. इस गुट ने अपने समर्थन में 60 विधायकों के होने का दावा किया है.
TMC की स्थिति इस हालत तक कैसे पहुंची?
TMC के अंदर के ये घटनाक्रम रातो रात सामने नहीं आए. मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल की जड़ें उन घटनाओं की एक कड़ी में हैं, जो पिछले कुछ दिनों में घटीं.
इसकी पहली वजह तब सामने आई, जब ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा को पार्टी से निकाल दिया गया. हालांकि उन्हें निकाले जाने से पहले, कथित तौर पर दोनों नेताओं ने विधानसभा में स्पीकर के चैंबर के अंदर BJP नेता शुभेंदु अधिकारी के साथ 15-20 मिनट की बैठक की थी. इस बैठक ने तुरंत ही संभावित राजनीतिक फेरबदल को लेकर अटकलों को हवा दे दी.
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इसके तुरंत बाद, गेटवे होटल में एक गुप्त बैठक की खबरें सामने आईं; यह दावा सबसे पहले कुणाल घोष ने सार्वजनिक रूप से किया था. इस खुलासे से उन अफवाहों को और बल मिला कि TMC विधायकों का एक बड़ा तबका अपने विकल्पों पर विचार कर रहा है.
ये अटकलें इस संभावना पर केंद्रित थीं कि TMC के 50-60 विधायकों का एक गुट एकजुट हो सकता है और पार्टी से औपचारिक रूप से अलग होने के बजाय खुद को "असली TMC" होने का दावा कर सकता है. एक ऐसा परिदृश्य जिसकी तुलना राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने महाराष्ट्र में हुई फूट से की.
इसी पृष्ठभूमि में विधानसभा में अचानक हलचल तेज़ हो गई. एक के बाद एक TMC विधायक विधानसभा परिसर में पहुंचने लगे. हालांकि किसी भी विधायक ने सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा लेकिन उनके आगमन ने कथित बगावत और पर्दे के पीछे जुटाई जा रही संख्या को लेकर बने रहस्य को और गहरा कर दिया.
सस्पेंस के बीच विधानसभा पहुंचे विधायक
हालांकि अभी भी इस बात पर कोई आधिकारिक स्पष्टता नहीं है कि कितने विधायक कथित बागी गुट का समर्थन कर रहे हैं.
सूत्रों का संकेत है कि समर्थन का एक पत्र मौजूद हो सकता है. किसी भी औपचारिक विभाजन के लिए बागी गुट को कम से कम 53 विधायकों की आवश्यकता होगी. यही कारण है कि अब सभी की निगाहें आंकड़ों पर टिकी हैं.
आगे क्या होगा?
अगर बागी गुट ज़रूरी संख्या बल दिखाने में कामयाब हो जाता है तो यह मामला स्पीकर के सामने औपचारिक दावा पेश करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है.
फिलहाल विधायकों की अचानक हलचल और तेज़ राजनीतिक सरगर्मी से यही संकेत मिलता है कि TMC के भीतर बंद दरवाज़ों के पीछे कुछ अहम घटनाक्रम चल रहे हैं. अब अहम सवाल यह है कि क्या ये अटकलें पार्टी नेतृत्व के लिए एक संगठित चुनौती का रूप ले पाएंगी.
अनुपम मिश्रा