पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों चल रही उठा पटक के बीच एक नाम फिर से सुर्खियों में है. यह नाम है तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता जहांगीर खान का. कुछ महीने पहले तक जहांगीर खान जहांë राजनीतिक सभाओं में हजारों समर्थकों के बीच भाषण दे रहे थे और विरोधियों पर तीखे हमले बोल रहे थे. लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. पश्चिम बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने उन्हें नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार कर ऐसी परेड कराई की लोग उसकी ही चचार् करने लगे हैं.
दिलचस्प बात यह है कि जहांगीर खान की गिरफ्तारी के साथ ही लोगों को पश्चिम बंगाल उपचुनाव के दौरान दिया गया उनका एक चर्चित बयान याद आने लगा है. वह बयान, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को चुनौती देते हुए कहा था, अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं.
आखिर कौन हैं अजय पाल शर्मा, जिनके नाम पर फिर शुरू हुई चर्चा ?
जहांगीर खान की गिरफ्तारी के बाद सबसे ज्यादा जिस नाम की चर्चा हो रही है, वह है उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा. पुलिस सेवा में अजय पाल शर्मा का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. उत्तर प्रदेश के कई संवेदनशील जिलों में तैनाती के दौरान उन्होंने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. उनकी कार्यशैली और अपराध नियंत्रण के कई चर्चित अभियानों के कारण उन्हें अक्सर सिंघम ऑफ यूपी और सुपरकॉप जैसे नामों से भी जाना जाता है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने उन्हें दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर क्षेत्र में पुलिस पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी थी. चुनाव आयोग का उद्देश्य संवेदनशील इलाकों में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना था. डायमंड हार्बर क्षेत्र और उसके आसपास के कई इलाकों को चुनाव के दौरान संवेदनशील माना जा रहा था. ऐसे में अजय पाल शर्मा की तैनाती को चुनाव आयोग की एक महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में देखा गया था.
चुनाव के दौरान क्यों चर्चा में आया था जहांगीर खान का नाम
फलता विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल उपचुनाव के दौरान सबसे चर्चित सीटों में शामिल हो गई थी. यहां से टीएमसी ने जहांगीर खान को उम्मीदवार बनाया था. चुनाव प्रचार के दौरान लगातार आरोप लग रहे थे कि कुछ इलाकों में मतदाताओं पर दबाव बनाने और उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. स्थानीय स्तर पर मिली शिकायतों के बाद चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारी और सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुईं. इसी क्रम में अजय पाल शर्मा की टीम भी क्षेत्र में लगातार निगरानी कर रही थी. चुनावी माहौल उस समय और गर्म हो गया जब अजय पाल शर्मा अपनी टीम के साथ जहांगीर खान के करिबियों केã घर पहुंचे. वहां उन्होंने परिवार के सदस्यों को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि मतदान के दौरान किसी मतदाता को डराने-धमकाने या मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा था कि यदि ऐसी कोई शिकायत सामने आती है तो कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो गया. कुछ लोगों ने इसे चुनाव आयोग की सख्ती बताया तो कुछ राजनीतिक दलों ने इसे लेकर सवाल भी उठाए.
फिर आया 'सिंघम बनाम पुष्पा' वाला बयान
अजय पाल शर्मा की चेतावनी के बाद जहांगीर खान ने एक चुनावी सभा में ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया था. उन्होंने कहा, अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं. फिल्मी अंदाज में दिया गया यह बयान देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
चुनाव आयोग की सख्ती और बढ़ा विवाद
चुनाव के दौरान अजय पाल शर्मा की टीम लगातार संवेदनशील इलाकों में सक्रिय थी. चुनाव आयोग का स्पष्ट निर्देश था कि किसी भी मतदाता को मतदान से रोकने, डराने या प्रभावित करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. इसी दौरान टीएमसी की ओर से आरोप लगाए गए कि कुछ अधिकारी रात में लोगों के घरों तक पहुंच रहे हैं और अनावश्यक दबाव बना रहे हैं. दूसरी ओर चुनाव आयोग और सुरक्षा एजेंसियों का कहना था कि वे केवल स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अजय पाल शर्मा लगातार चर्चा में बने रहे. हालांकि उन्होंने सार्वजनिक मंचों से किसी भी राजनीतिक टिप्पणी से दूरी बनाए रखी और अपनी भूमिका को चुनाव आयोग के निर्देशों तक सीमित रखा.
फिर क्यों बढ़ीं जहांगीर खान की मुश्किलें ?
चुनाव के दौरान हुए विवादों के बाद जहांगीर खान की कानूनी परेशानियां बढ़ती चली गईं. उनके खिलाफ फलता पुलिस स्टेशन में करीब सात एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई. इन मामलों में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोप भी शामिल बताए गए. जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ मामला अदालत तक पहुंचा. जहांगीर खान को कुछ समय के लिए गिरफ्तारी से राहत मिली थी. कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें 18 मई को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी. इस राहत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वे 21 मई को हुए फलता विधानसभा क्षेत्र के री-पोल में हिस्सा ले सकें. फलता सीट पर दोबारा मतदान कराया गया था और इसके परिणाम 24 मई को घोषित किए गए थे. उस समय तक जहांगीर खान को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्राप्त थी. लेकिन बाद में स्थिति बदल गई.
हाई कोर्ट से राहत खत्म, फिर शुरू हुई तलाश
री-पोल प्रक्रिया पूरी होने के बाद मामला दोबारा अदालत पहुंचा. इस दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट ने जहांगीर खान को मिली अंतरिम सुरक्षा को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया. अदालत के इस फैसले के बाद गिरफ्तारी से मिली सुरक्षा समाप्त हो गई. इसके साथ ही जांच एजेंसियों को कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया. एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने जहांगीर खान की तलाश तेज कर दी. जांच एजेंसियों के अनुसार वे कई सप्ताह तक पुलिस की पहुंच से बाहर रहे. यही कारण था कि उनकी तलाश को लेकर लगातार चर्चा होती रही.
नेपाल सीमा के पास से हुई गिरफ्तारी
कई सप्ताह की तलाश के बाद पश्चिम बंगाल एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली. अधिकारियों ने जहांगीर खान को नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी की खबर सामने आते ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई. हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा गिरफ्तारी के बाद सामने आए वीडियो को लेकर हुई.
हाफ पैंट वाली तस्वीरें क्यों हुईं वायरल?
गिरफ्तारी के बाद जहांगीर खान के कुछ वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं. इनमें वे पुलिसकर्मियों के साथ नजर आ रहे थे. इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर बहस का नया दौर शुरू कर दिया. बड़ी संख्या में यूजर्स ने जहांगीर खान के पुराने बयानों को इन तस्वीरों के साथ जोड़कर पोस्ट करना शुरू कर दिया. यहीं से अजय पाल शर्मा का नाम भी दोबारा चर्चा में आ गया. लोगों ने चुनावी दौर के उस वीडियो को फिर शेयर करना शुरू कर दिया, जिसमें अजय पाल शर्मा मतदाताओं को डराने-धमकाने की शिकायतों पर सख्त चेतावनी देते दिखाई दे रहे थे. इसके साथ ही जहांगीर खान का अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं वाला बयान भी फिर वायरल होने लगा.
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