'दीदी के साथ हूं, दिल्ली गई ही नहीं...', बागी गुट को लेकर बोलीं TMC सांसद प्रतिमा मंडल

टीएमसी सांसद प्रतिमा मंडल ने बागी विधायकों और बीजेपी नेताओं से बैठक की ख़बरों पर सफाई दी है. प्रतिमा मंडल ने कहा कि वो कोलकाता में ही हैं और दिल्ली नहीं गई. हालांकि उनके पास लगातार दूसरी तरफ़ से दिल्ली आने को कहा जा रहा है.

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तृणमूल कांग्रेस की सांसद प्रतिमा मंडल ने अफवाहों को नकारा (Photo-ITG) तृणमूल कांग्रेस की सांसद प्रतिमा मंडल ने अफवाहों को नकारा (Photo-ITG)

अनुपम मिश्रा

  • कोलकाता,
  • 11 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:09 PM IST

तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पार्टी सांसद प्रतिमा मंडल का एक बड़ा बयान सामने आया है. एक विशेष बातचीत में प्रतिमा मंडल ने उन सभी अटकलों और मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह गलत और बेबुनियाद बताया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि वे बागी सांसदों के गुट में शामिल हैं और बीजेपी नेताओं के संपर्क में हैं.

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प्रतिमा मंडल ने अपनी वफादारी स्पष्ट करते हुए कहा कि वे तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (दीदी) के साथ मजबूती से खड़ी हैं. उन्होंने कहा, "मैं 4 जून के बाद से दिल्ली नहीं गई हूं और इस समय कोलकाता में ही अपने घर पर हूं. मेरे बारे में फैलाई जा रही अफवाहें पूरी तरह निराधार हैं."

आजतक से खास बात करते हुए प्रतिमा मंडल ने कहा, 'जो हमारा प्रतीक है, वही प्रतीक से मैं तीन बार जीती हूं. जनता ने आशीष दिया और इस बार भी मुझे बहुत मैंडेट दिया. इस बार भी 4 लाख 70 हजार वोट से मुझे मिला और मैं जीतकर आई. जनता ने मुझे आशीष दिया पांच साल के लिए,  तो मैं 2029 तक एमपी हूं और उनके लिए काम करूंगी. मैं जनता को अपमानित नहीं करना चाहती हूं. 2029 तक ही मैं उनके साथ हूं.'

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 हालांकि, उन्होंने एक बड़ा खुलासा करते हुए यह भी माना कि दूसरी तरफ (बागी गुट या विपक्षी दल) से उनके पास लगातार दिल्ली आने के लिए फोन आ रहे हैं और उन पर संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है. आपको बता दें कि इससे पहले कहा जा रहा था कि प्रतिमा मंडल भी बागी गुट में शामिल हो सकती हैं.

पश्चिम बंगाल विधानसभा से शुरू हुई यह अंदरूनी कलह अब तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व और राजनीतिक वजूद की लड़ाई का रूप ले चुकी है. एक ओर ममता बनर्जी का खेमा दिल्ली में नए राजनीतिक समीकरण साधने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर बागी गुट संगठन, विधायकों और सांसदों के समर्थन के आधार पर खुद को असली टीएमसी साबित करने की कोशिश कर रहा है. ऐसे हालात में 28 वर्ष पुरानी तृणमूल कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे गंभीर राजनीतिक संकट से गुजरती नजर आ रही है.

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