कोलकाता एयरपोर्ट के रनवे के पास बनी 136 साल पुरानी मस्जिद को हटाने की चर्चा ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बातचीत तेज हुई है, लेकिन मस्जिद समिति और कई अल्पसंख्यक संगठन इसका विरोध कर रहे हैं. इस मुद्दे को लेकर उत्तर 24 परगना के जिलाधिकारी कार्यालय में एक अहम बैठक भी की गई थी.
बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा एयरपोर्ट अथॉरिटी, सीआईएसएफ (CISF) के प्रतिनिधि, स्थानीय बीजेपी विधायक सौरव सिकदर समेत अल्पसंख्यक समुदाय की तरफ से पूर्व राज्य मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी शामिल हुए. इस दौरान अधिकारियों ने रनवे के पास बनी मस्जिद को लेकर सुरक्षा तथा उड़ानों के संचालन से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा की. हालांकि, इस बातचीत के बाद कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया. सिद्दीकुल्ला चौधरी ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि इस ऐतिहासिक ढांचे को जबरन नहीं हटाया जा सकता. उनका कहना था कि अगर मस्जिद हटाने की कार्रवाई हुई, तो जनता इसके लिए बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी को जिम्मेदार मानेगी
136 साल पुरानी मस्जिद पर क्यों छिड़ा विवाद?
सिद्दीकुल्ला चौधरी के मुताबिक, साल 1890 में बनी यह मस्जिद करीब 136 साल पुरानी है. हवाई अड्डा प्राधिकरण ने 1962 में आसपास की जमीन का अधिग्रहण जरूर किया था, लेकिन जिस हिस्से पर मस्जिद बनी है, वह आज भी रिकॉर्ड में उसी के नाम दर्ज है. उन्होंने दावा किया कि आरएसओ (RSO) तथा सीएस (CS) दस्तावेजों में मस्जिद का नाम साफ तौर पर दर्ज है, जिसके चलते यहां नियमित रूप से नमाज भी होती है. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सुरक्षा से जुड़े सभी जरूरी नियमों का परिसर में पूरी सख्ती से पालन किया जाता है.
सिद्दीकुल्ला ने सुझाव दिया कि इस मसले का हल बातचीत से निकाला जाए. उन्होंने कहा कि दारुल उलूम देवबंद, जमीयत उलेमा और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठनों से औपचारिक बातचीत होनी चाहिए. उनका कहना है कि स्थानीय लोग मस्जिद को हटाने की बात तभी मानेंगे, जब बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकलेगा.
दूसरी तरफ, उत्तर दम दम के बीजेपी विधायक सौरव सिकदर का दावा है कि रनवे के पास मस्जिद होने की वजह से उड़ानों के संचालन पर असर पड़ रहा है. उनका कहना है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को भी दिक्कत होती है. उन्होंने यह भी कहा कि एयरपोर्ट विस्तार के लिए पास के एक मंदिर को भी दूसरी जगह शिफ्ट करने की बात चल रही है और मंदिर समिति ने इस पर सहमति दिखाई है. विधायक के मुताबिक, विकास और सुरक्षा से जुड़े मामलों में बातचीत के जरिए समाधान निकालना जरूरी है.
अनुपम मिश्रा / राही हलदर