‘भारत माता को मां नहीं मानने वालों को देश में रहने का हक नहीं’, मदनी के बयान पर भड़कीं अग्निमित्रा पाल

वंदे मातरम् को लेकर जारी बहस के बीच पश्चिम बंगाल की भाजपा नेता ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रभक्ति और संवैधानिक नियमों के पालन को लेकर सख्त टिप्पणी की. बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और धार्मिक ध्रुवीकरण को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं.

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 अरशद मदनी के बयान पर भड़कीं अग्निमित्रा पाल (Photo-ITG) अरशद मदनी के बयान पर भड़कीं अग्निमित्रा पाल (Photo-ITG)

अनुपम मिश्रा

  • आसनसोल,
  • 18 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:02 AM IST

पश्चिम बंगाल की कैबिनेट मंत्री और बीजेपी नेता अग्निमित्रा पाल ने ‘वंदे मातरम्’ विवाद और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदानी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. दरअसल, जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से ‘वंदे मातरम्’ को “विवादित गीत” बताते हुए इसे अनिवार्य किए जाने के खिलाफ अदालत जाने की बात कही गई थी. 

इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि भारत देश सभी नागरिकों के लिए “मां” के समान है और जो लोग भारत माता को मां मानने में झिझकते हैं, उन्हें इस देश में रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए.

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अग्निमित्रा पॉल ने कहा, “आज भारत को हम लोग मां मानते हैं. जिस मिट्टी ने हमें पाला-पोसा, उसे भी हम मां मानते हैं. जो लोग भारत को मां कहने में झिझकते हैं और अदालत जाते हैं, उनको इस देश में रहने का कोई हक नहीं है. अगर भारत में रहना है तो भारत माता का सम्मान करना होगा.”

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उन्होंने आगे कहा कि भारत सभी धर्मों के लोगों का देश है और यहां रहने वाले हर नागरिक को भारतीय कानून का पालन करना होगा. मुसलमानों को निशाना बनाए जाने और धार्मिक ध्रुवीकरण के आरोपों पर भाजपा नेता ने कहा कि किसी विशेष धर्म को टारगेट नहीं किया जा रहा है.

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उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता में जो नियम लिखे हैं, वो सभी के लिए समान हैं. चाहे हिंदू हों, मुसलमान हों, सिख हों, बंगाली हों या बिहारी. अगर भारत में रहना है, बंगाल में रहना है, तो भारतीय कानून मानकर चलना होगा. अगर नियम नहीं मानना है तो भारत के बाहर जाना होगा.

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गौरतलब है कि हाल ही में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की कार्यसमिति की बैठक में अरशद मदनी ने भाजपा शासित राज्यों पर धार्मिक ध्रुवीकरण  और मुसलमानों को निशाना बनाने की राजनीति का आरोप लगाया था. उन्होंने समान नागरिक संहिता और ‘वंदे मातरम्’ को लेकर भी आपत्ति जताई थी.

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