फिर खोले गए गोरखपुर और कानपुर के चिड़ियाघर, बर्ड फ्लू के प्रकोप के कारण 56 दिन से थे बंद

बर्ड फ्लू के चलते 56 दिनों तक बंद रहने के बाद गोरखपुर और कानपुर के चिड़ियाघर आज फिर से खुल गए. बर्ड फ्लू ने गोरखपुर में दो बाघों, एक तेंदुआ और एक सेवल सहित चार बड़ी बिल्लियों और कानपुर में एक मोर और एक एशियाई शेर की जान ले ली थी.

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कानपुर जू फिर से खोला गया कानपुर जू फिर से खोला गया

aajtak.in

  • कानपुर/गोरखपुर ,
  • 08 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 4:53 PM IST

बर्ड फ्लू के प्रकोप के कारण 56 दिनों तक बंद रहने के बाद गोरखपुर और कानपुर के चिड़ियाघर मंगलवार को फिर से खुल गए. इस प्रकोप ने गोरखपुर में दो बाघों, एक तेंदुआ और एक सेवल सहित चार बड़ी बिल्लियों और कानपुर में एक मोर और एक एशियाई शेर की जान ले ली थी.

न्यूज एजेंसी के मुताबिक,शक्ति नामक बाघिन के एवियन इन्फ्लूएंजा के H5N1 स्ट्रेन के लिए पॉजिटिव होने और फिर उसकी मृत्यु होने के बाद 13 मई को दोनों चिड़ियाघरों ने अपने दरवाजे बंद कर दिए थे. केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की एक टीम ने गोरखपुर में शहीद अशफाकउल्ला खान प्राणी उद्यान का दौरा किया और बत्तखों को वायरस के संभावित स्रोत के रूप में पहचाना था. 

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गोरखपुर चिड़ियाघर से एक एशियाई शेर को चिकित्सा उपचार के लिए लाए जाने के बाद कानपुर चिड़ियाघर में इन्फ्लूएंजा फैल गया. गोरखपुर चिड़ियाघर के निदेशक विकास यादव ने कहा- प्रोटोकॉल के अनुसार, दो बैक-टू-बैक निगेटिव रिपोर्ट के बाद ही फिर से खोलने की अनुमति दी गई. जनता और जानवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक सावधानियां और जैव-सुरक्षा उपाय किए गए हैं. 

उन्होंने बताया कि भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (NIHSAD) में चरणबद्ध तरीके से भेजे गए 72 नमूनों की जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई है. 4 जुलाई को लगातार दूसरी बार रिपोर्ट निगेटिव आई और 7 जुलाई को सरकार ने चिड़ियाघर को फिर से खोलने की मंजूरी दे दी. 

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इसी तरह, NIHSAD, भोपाल में कई दौर की जांच के बाद सभी जानवरों के संक्रमण मुक्त होने और चिड़ियाघर के आगंतुकों के लिए सुरक्षित होने की पुष्टि होने और 26 मई और 17 जून को लगातार दो रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद कानपुर चिड़ियाघर को फिर से खोलने के लिए मुख्य वन्यजीव वार्डन से लिखित मंजूरी जारी की गई. ये जानकारी कानपुर चिड़ियाघर रेंज के वन अधिकारी नवेद इकराम ने दी. 

उन्होंने बताया कि जानवरों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक सावधानियां और जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं. मैलानी नामक बाघिन निगरानी में है. हालांकि, दो महीने पहले उसका बर्ड फ्लू टेस्ट निगेटिव आया था, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है. 

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गोरखपुर चिड़ियाघर के उप निदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया, "चल रहे उपचार के बावजूद वह स्थिर है और उसके अंगों को नुकसान पहुंचा है." इस बीच, चिड़ियाघर खुलने के बाद सुबह 9 से 11 बजे के बीच कई बच्चों समेत करीब 400 आगंतुक गोरखपुर चिड़ियाघर में पहुंचे. सिंह ने कहा, "सब कुछ सामान्य है और लोग अपनी यात्रा का आनंद ले रहे हैं."

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