उत्तर प्रदेश में एसआआईआर के बाद फाइनल वोटर लिस्ट आ गई है. चुनाव आयोग की ओर से जारी की गई वोटर लिस्ट यूपी में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है. यूपी एसआईआर में मुस्लिम बहुल इलाकों में कम नाम कटे, जबकि बीजेपी का गढ़ माने जाने वाले इलाकों में ज्यादा मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटे हैं. सियासत के लिहाज से एसआईआर के यह नतीजे बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं.
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुरू में ही यह इशारा किया था कि SIR में बीजेपी के समर्थकों के वोट ज्यादा कटेंगे. एसआईआर की फाइनल सूची उसी ओर इशारा कर रही है. लखनऊ, गाजियाबाद, प्रयागराज और कानपुर जैसे बीजेपी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में 18 से 23 फीसदी वोट कटे. वहीं, बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर जैसे जिलों में 10 से 12 फीसदी के आसपास वोट कटे हैं. फाइनल आंकड़ों ने बीजेपी की पेशानी पर बल जरूर ला दिया होगा.
गौरतलब है कि यूपी की वोटर लिस्ट से एसआईआर के बाद दो करोड़ चार लाख लोगों के नाम कटे हैं. कटे वोट के लिहाज से देखें तो यूपी, गुजरात के बाद सबसे ज्यादा प्रतिशत वोट कटने वाला राज्य बन गया है. यूपी में कुल 13.24% वोटर अब कम हो गए हैं. गुजरात में सबसे ज्यादा 13.4 प्रतिशत वोट SIR के बाद कटे हैं. कोई अगर ये सोचता है कि एसआईआर में मुसलमानों के वोट ज्यादा कटे होंगे. यूपी में एसआईआर के आंकड़े सामने आने के बाद ये अनुमान गलत साबित हो गए हैं.
एसआईआर में सबसे ज्यादा वोट बीजेपी के गढ़ में ही कम हुए हैं. इसके उलट, मुस्लिम बहुल जिलों में सबसे कम वोट कटे हैं. सबसे ज्यादा वोट लखनऊ में कटे हैं. दूसरे नंबर पर प्रयागराज , तीसरे नंबर पर कानपुर, चौथे नंबर पर आगरा और पांचवे नंबर पर गाजियाबाद जैसे जिले हैं. इन जिलों में सबसे ज्यादा वोट एसआईआर के बाद कम हुए हैं. बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर और मुज़फ्फरनगर जैसे मुस्लिम आबादी वाले जिलों में प्रदेश के औसत से काफी कम नाम कटे हैं.
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वोट परसेंटेज के लिहाज से देखें तो लखनऊ में लगभग 23 फीसदी वोट कम हो गया है. गाजियाबाद में 20 फीसदी से ज्यादा और कानपुर, नोएडा, मेरठ में भी लगभग 18 से 19 फीसदी वोट कम हुए हैं. यह वो इलाके हैं, जहां बीजेपी ने वर्षों से अपना प्रभाव बनाए रखा है, लोकसभा और विधानसभा के चुनाव लगातार जीतती आ रही है. आंकड़े बता रहे हैं कि बीजेपी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में 20 फीसदी से ज्यादा वोट कटे हैं.
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इसके उलट, मुस्लिम बहुल जिलों में यह आंकड़ा औसतन 10 से 12 फीसदी के आसपास है. हालांकि, बीजेपी ने एसआईआर की प्रक्रिया का सबसे ज्यादा समर्थन किया था. अब नई वोटर लिस्ट और वोटर लिस्ट से नाम कटने के आंकड़े आने के बाद पार्टी नए सिरे से रणनीति बनाने पर विवश होगी.
कुमार अभिषेक