बगीचे, पेड़-पौधे, प्रदूषण से रोकथाम... अयोध्या के राम मंदिर के लिए बन रहा ये प्लान, होगा 'पंचवटी' का निर्माण

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि मंदिर परिसर का 60 प्रतिशत हिस्सा हरित क्षेत्र होगा और अयोध्या शहर में किसी भी तरह के प्रदूषण को रोकने के लिए पूरे क्षेत्र में जीरो-डिस्चार्ज पॉलिसी का पालन किया जाएगा. 

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अयोध्या राम मंदिर (फाइल फोटो) अयोध्या राम मंदिर (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • अयोध्या ,
  • 05 मई 2025,
  • अपडेटेड 12:29 PM IST

अयोध्या के राम मंदिर परिसर के आधे से अधिक हिस्से को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी. मंदिर के ट्रस्ट ने सोमवार को इसकी घोषणा की. ट्रस्ट ने इस बाबत डिटेल जानकारी दी है. 

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि परिसर का 60 प्रतिशत हिस्सा हरित क्षेत्र होगा और अयोध्या शहर में किसी भी तरह के प्रदूषण को रोकने के लिए पूरे क्षेत्र में जीरो-डिस्चार्ज पॉलिसी का पालन किया जाएगा. 

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न्यूज एजेंसी के मुताबिक, हरित पहल के पैमाने पर प्रकाश डालते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि भूमि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बगीचों और फलदार और छायादार पौधों के लिए आवंटित किया जा रहा है, जिन्हें "पंचवटी" नाम दिया जा सकता है. उन्होंने खुलासा किया कि इन बगीचों और परिसर के अन्य पर्यावरणीय पहलुओं को विकसित करने और बनाए रखने की जिम्मेदारी जीएमआर समूह को सौंपी गई है, जिसके पास पांच साल का अनुबंध होगा. 

इससे पहले ट्रस्ट द्वारा जानकारी दी गई कि जिस अस्थायी तंबू में रामलला 30 साल तक विराजमान रहे और जिस सिंहासन पर 1949 से विराजमान हैं, उसे तीर्थयात्रियों के लिए स्मारक के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा. इसका मकसद अयोध्या में 'राम मंदिर के लिए दशकों लंबे संघर्ष की कहानी बताना' है.  

इसके साथ ही राम मंदिर कॉम्प्लेक्स में सभी कार्यों को पूरा करने की समय सीमा 30 जून तय की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने अयोध्या में मीडिया से कहा, "इससे पहले भगवान जूट से बने अस्थायी तंबू में रहते थे. इसे और उस सिंहासन को, जिस पर वे 1949 से विराजमान थे, स्मारक के रूप में रखा जाएगा. इसे तीर्थयात्रियों और आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाएगा, जिससे वे इस तरह के कदम उठा सकें कि ऐसी स्थिति फिर से न आए."

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