सहारनपुर में आंधी-तूफान ने तोड़ी आम उत्पादकों की कमर, 60 फीसदी फसल हुई बरबाद

सहारनपुर में लगातार आंधी-तूफान और बारिश से आम की फसल को भारी नुकसान हुआ है. किसानों के अनुसार करीब 60 प्रतिशत आम पेड़ों से गिर चुके हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ है. मोहम्मदपुर गुर्जर गांव के किसान भूपेंद्र चौहान ने बताया कि उनके बागों में केवल 40 प्रतिशत फसल बची है.

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आंधी-तूफान के चलते पेड़ से गिरे आम. (Photo: Screengrabs) आंधी-तूफान के चलते पेड़ से गिरे आम. (Photo: Screengrabs)

राहुल कुमार

  • सहारनपुर,
  • 02 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:30 PM IST

सहारनपुर जिसे आम की बेल्ट के रूप में जाना जाता है. इस बार लगातार आ रहे आंधी-तूफान और बारिश के कारण आम उत्पादकों और बाग ठेकेदारों के लिए चिंता का कारण बन गया है. जिले में बीते कुछ दिनों के दौरान तीन से चार बार आए तेज तूफानों ने आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है. बागों में तैयार हो रहे आम बड़ी संख्या में पेड़ों से टूटकर जमीन पर गिर गए हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है.

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किसानों का कहना है कि इस बार मौसम की मार ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है. मोहम्मदपुर गुर्जर गांव के किसान भूपेंद्र चौहान के अनुसार लगातार आंधी आने से करीब 60 फीसदी आम पेड़ों से गिर चुका है और केवल 40 फीसदी फसल ही बागों में बची है. उन्होंने बताया कि उनके बागों में लंगड़ा, चौसा, दशहरी, नकली और रामकला जैसी किस्मों के आम हैं.

पिछले साल की तुलना में इस बार नुकसान कहीं ज्यादा है और आगे भी मौसम खराब रहने की आशंका बनी हुई है. वहीं आम के बागों का ठेका लेने वाले ठेकेदार भी भारी नुकसान झेल रहे हैं. ठेकेदार सुहेल (सोहन) पवार ने बताया कि इस सीजन में अब तक 60 से 65 फीसदी तक नुकसान हो चुका है. उनके पास करीब ढाई सौ बीघा बाग ठेके पर हैं और बार-बार आ रही आंधी ने अधिकांश फलों को पेड़ों से गिरा दिया है. 

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ऐसे ही आता रहा आंधी-तूफान तो होगा बड़ा नुकसान
उनका कहना है कि सीजन की शुरुआत में ही इतना बड़ा नुकसान होने से कारोबार प्रभावित हुआ है. आम कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम सामान्य रहा और बाजार में आम के दाम अच्छे मिले तो कुछ हद तक नुकसान की भरपाई हो सकती है. 

लेकिन यदि आंधी-तूफान का सिलसिला जारी रहा और बाजार भाव भी कमजोर रहे तो किसानों के साथ-साथ बाग ठेकेदारों को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. मौसम की अनिश्चितता ने पूरे आम उद्योग की चिंता बढ़ा दी है.

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