UP में रियल एस्टेट एजेंटों पर कड़ा एक्शन, अब हर 3 महीने में देनी होगी ये रिपोर्ट, नहीं तो लगेगा भारी जुर्माना

UP RERA ने रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. अब एजेंटों को हर तिमाही अपने बिजनेस और लेन-देन का पूरा ब्योरा देना होगा. तय समय में ऐसा न करने पर 10,000 रुपये का भारी जुर्माना भुगतना पड़ेगा.

Advertisement
अगर कोई रियल एस्टेट एजेंट तय समय सीमा के भीतर अपनी तिमाही लेन-देन रिपोर्ट जमा नहीं करता है, तो उसे 10,000 रुपये का विलंब शुल्क देना होगा. (Photo-ITG) अगर कोई रियल एस्टेट एजेंट तय समय सीमा के भीतर अपनी तिमाही लेन-देन रिपोर्ट जमा नहीं करता है, तो उसे 10,000 रुपये का विलंब शुल्क देना होगा. (Photo-ITG)

आदित्य के. राणा

  • लखनऊ,
  • 19 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:06 PM IST

उत्तर प्रदेश में घर खरीदारों और निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए उत्तर प्रदेश भू सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (UP RERA) ने एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है. यूपी रेरा ने रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के मकसद से रियल एस्टेट एजेंटों के लिए नए अनुपालन नियम लागू कर दिए हैं. इसके तहत अब सभी पंजीकृत एजेंटों को हर 3 महीने (तिमाही) में अपने लेन-देन की रिपोर्ट देना अनिवार्य कर दिया गया है.

Advertisement

यूपी रेरा ने साफ किया है कि अगर कोई रियल एस्टेट एजेंट तय समय सीमा के भीतर अपनी तिमाही लेन-देन रिपोर्ट जमा नहीं करता है, तो उसे संबंधित तिमाही के लिए 10,000 रुपये का विलंब शुल्क देना होगा. दरअसल, रेरा कानून में प्रमोटरों (बिल्डरों) के लिए तो तिमाही प्रगति रिपोर्ट देना पहले से ही जरूरी था, लेकिन एजेंटों के लिए ऐसा कोई नियम नहीं था. अब प्राधिकरण ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए एजेंटों को भी इस दायरे में ला दिया है.

संशोधित हुए पुराने नियम, बदलना होगा काम का तरीका

इस बड़े बदलाव को लागू करने के लिए यूपी रेरा ने 'उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (जनरल) रेगुलेशन, 2019' के 11वें संशोधन को अधिसूचित किया है. इसके तहत व्यापक अनुपालन व्यवस्था को लागू करते हुए 'रेगुलेशन 54' का नाम बदलकर अब 'द रियल एस्टेट एजेंट एनरोलमेंट, ट्रेनिंग, सर्टिफिकेशन एंड स्टैच्यूटरी कंप्लायंसेज' कर दिया गया है.

Advertisement

नए नियमों के मुताबिक, अब रियल एस्टेट एजेंटों को यूपी रेरा की तरफ से तय किए गए खास प्रारूप (Format) में अपनी कैश बुक, जर्नल, लेजर और ग्राहक रजिस्टर का पूरा मेंटेनेंस करना होगा. जेक्ट पूरा होने या पंजीकृत बिक्री व लीज डीड होने की तारीख से कम से कम 5 साल तक इन सभी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा.

किसी भी तरह की जांच या कानूनी कार्यवाही के दौरान एजेंटों को ये सारे दस्तावेज नियामक प्राधिकरण या अधिकृत अधिकारी के सामने पेश करने होंगे. माही खत्म होने के 15 दिनों के भीतर अपलोड करनी होगी डिटेल. अब हर पंजीकृत एजेंट को हर तिमाही के दौरान कराए गए सभी लेन-देन और अपनी एजेंसी से जुड़े कर्मचारियों की जानकारी, तिमाही समाप्त होने के 15 दिनों के भीतर यूपी रेरा की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी.

पहली बार देना होगा पुराना सारा ब्योरा

संशोधन में ये भी प्रावधान किया गया है कि जब एजेंट पहली बार इस पोर्टल पर अपनी रिपोर्ट जमा करेंगे, तो उन्हें यूपी रेरा में रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद से लेकर अब तक कराए गए अपने सभी लेन-देन की पूरी जानकारी देनी होगी. इसके बाद से हर तिमाही का ब्योरा अलग से देना होगा.

यूपी रेरा के चेयरमैन ने क्या कहा?

Advertisement

इन सख्त और नए बदलावों पर यूपी रेरा के चेयरमैन श्री संजय आर. भूसरेड्डी ने कहा, 'ये नए प्रावधान रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यावसायिकता (Professionalism) को और मजबूत करने के लिए लागू किए गए हैं.' उन्होंने आगे कहा कि रियल एस्टेट एजेंट घर खरीदारों और बिल्डरों के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं. इसलिए उनके द्वारा सही रिकॉर्ड रखना और समय पर लेन-देन की जानकारी देना बाजार में भरोसा कायम करने के लिए बेहद जरूरी है.

प्राधिकरण को उम्मीद है कि इस कदम से उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट मार्केट में फ्रॉड पर लगाम लगेगी और घर खरीदारों के साथ-साथ निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »