लखनऊ के इश्कबाज प्रोफेसर पर हुई तगड़ी कार्रवाई, छात्रा को बोला था- 'डार्लिंग तुम्हारे लिए पेपर आउट करा दिया हूं'

लखनऊ यूनिवर्सिटी में बीएससी थर्ड ईयर की छात्रा और जूलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह के बीच बातचीत का एक ऑडियो वायरल हुआ था. जिसके बाद से ही इस मामले ने तूल पकड़ लिया है. वहीं अब प्रोफेसर को निलंबित कर दिया गया है. यह फैसला विवि कार्यपरिषद की आपात बैठक में लिया गया.

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प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह, जिसे ऑडियो लीक के बाद किया गया निलंबित. (Photo:ITG) प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह, जिसे ऑडियो लीक के बाद किया गया निलंबित. (Photo:ITG)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 20 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:49 AM IST

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के नियमों के उल्लंघन और छात्रा के गंभीर आरोपों के बीच लखनऊ यूनिवर्सिटी ने जूलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह को निलंबित कर दिया है. यह फैसला विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की आपात बैठक में लिया गया. प्रोफेसर और बीएससी थर्ड ईयर की एक छात्रा के बीच कथित बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद यह मामला तेजी से तूल पकड़ने लगा था.

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ऑडियो वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों का भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कैंपस में प्रदर्शन किया. हालात बिगड़ते देख विश्वविद्यालय प्रशासन को पुलिस बुलानी पड़ी. मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की तहरीर पर हसनगंज थाने में पेपर लीक और अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई.

वायरल वीडियो के अगले दिन ही भेज दिया गया था जेल
सूत्रों के अनुसार वायरल ऑडियो में कथित तौर पर परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा करने और छात्रा पर अनुचित दबाव बनाने जैसी बातें सामने आई थीं. मामले के सार्वजनिक होने के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक को कैंपस से हिरासत में लिया था. वहीं पूछताछ के बाद अगले दिन उसे जेल भेज दिया गया था.

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इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंतरिक शिकायत समिति (ICC) को जिम्मेदारी सौंपी. ICC ने छात्रा के आरोपों की जांच कर अपनी रिपोर्ट कार्य समिति को सौंप दी. इसके बाद विश्वविद्यालय ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय अनुशासनात्मक जांच समिति गठित की. समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में आरोपी शिक्षक को प्रथम दृष्टया चार गंभीर आरोपों में दोषी माना है.

जांच समिति के अनुसार आरोपी शिक्षक पर छात्रा को पेपर लीक का लालच देकर यौन शोषण का प्रयास करने, शिक्षक आचरण नियमावली का उल्लंघन करने और मानसिक उत्पीड़न करने के आरोप हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने ICC के समक्ष गोपनीय परीक्षा संबंधी जानकारी साझा करने की बात स्वीकार की.

मामले में विवि प्रशासन ने क्या कहा?
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि आरोपी शिक्षक के आचरण से विश्वविद्यालय की साख, सामाजिक प्रतिष्ठा और अकादमिक ईमानदारी को गंभीर नुकसान पहुंचा है. रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के 2015 विनियमों के उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है. प्रशासन ने साफ किया है कि मामले में निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

फिलहाल विश्वविद्यालय ने आरोपी शिक्षक को औपचारिक आरोप-पत्र जारी कर 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है. वहीं छात्र संगठनों ने आरोपी शिक्षक की बर्खास्तगी और परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग उठाई है. मामले को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में अब भी चर्चा और नाराजगी का माहौल बना हुआ है.

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