'मेरे पति देवता हैं, 50 करोड़ होते तो दिन-रात सेवा क्यों करते...'  टिन्नू यादव की पत्नी का छलका दर्द

राम मंदिर चढ़ावा चोरी में नाम आने के बाद टिन्नू यादव की पत्नी पूनम यादव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने कहा कि उनके पति 32 वर्षों से राम मंदिर आंदोलन और सेवा कार्यों से जुड़े हैं तथा उन्हें साजिश के तहत बदनाम किया जा रहा है. पूनम यादव ने कहा कि मेरे पति देवता है. उन्होंने कहा कि परिवार पिछले 15 दिनों से मानसिक तनाव झेल रहा है.

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अयोध्या में टिन्नू यादव की पत्नी पूनम यादव ने खुलकर अपनी बात रखी (Photo: ITG) अयोध्या में टिन्नू यादव की पत्नी पूनम यादव ने खुलकर अपनी बात रखी (Photo: ITG)

आशीष श्रीवास्तव

  • अयोध्या ,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:55 PM IST

'अगर मेरे पति बेईमान होते तो 32 साल तक रामलला की सेवा में टिके रहते? अगर 50 करोड़ की संपत्ति होती तो क्या सुबह से रात तक मंदिर में पसीना बहाते? मेरे पति देवता हैं... उन्हें फंसाया जा रहा है, उनकी छवि को गंदा किया जा रहा है.'

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नाम सामने आने के बाद टिन्नू यादव की पत्नी पूनम यादव पहली बार खुलकर सामने आई हैं. आरोपों, जांच और राजनीतिक बयानबाजी के बीच पूनम यादव की आवाज में दर्द ज्यादा दिखाई देता है. पिछले कुछ दिनों से लगातार सुर्खियों में बने इस मामले पर उन्होंने एक-एक आरोप का जवाब देने की कोशिश की और कहा कि उनके परिवार को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है.

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पूनम यादव का कहना है कि पिछले 15 दिनों से उनका परिवार ऐसे मानसिक तनाव से गुजर रहा है जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. उनके मुताबिक जिस व्यक्ति ने जीवन के तीन दशक से ज्यादा समय राम मंदिर आंदोलन और मंदिर सेवा में बिताए हों, उसे अचानक चोर और घोटालेबाज बताना सिर्फ एक आरोप नहीं बल्कि उसकी पूरी जिंदगी पर सवाल खड़ा करना है.  इतना हमको कष्ट है कि हम आपसे क्या बताएं. वो देवता है हैं पूरा देवता. उतने अच्छे तो हम नहीं है. जितने अच्छे वो हैं इसलिए उनकी छवि खराब करना चाह रह हैं लोग. 

कोई सबूत है तो सामने लाओ

पूनम यादव बार-बार एक ही सवाल दोहराती हैं कि अगर किसी के पास कोई ठोस सबूत है तो सामने क्यों नहीं लाता? उनका कहना है कि सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनलों तक तरह-तरह की बातें कही जा रही हैं. कोई करोड़ों की संपत्ति बता रहा है, कोई होटल, हॉस्टल और लग्जरी गाड़ियों की चर्चा कर रहा है. लेकिन आज तक किसी ने कोई ऐसा दस्तावेज या प्रमाण नहीं दिखाया जो इन दावों को साबित कर सके. वे कहती हैं, कहा जा रहा है सोना-चांदी ले गए, करोड़ों रुपये की संपत्ति बना ली. अगर ऐसा कुछ हुआ होता तो क्या मैं चुप बैठी रहती? क्या मैं नहीं कहती कि हमारे घर से यह सब मिला? ऐसा कुछ भी नहीं है.

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15 दिन से मानसिक यातना झेल रहे हैं

उनका कहना है कि परिवार के लोग लगातार तनाव में हैं. फोन लगातार बज रहे हैं. रिश्तेदार सवाल पूछ रहे हैं. बच्चे परेशान हैं. घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. जिस तरह की खबरें चलीं, जिस तरह तस्वीरें दिखाई गईं, उससे हमें बहुत कष्ट हुआ है. किसी भी परिवार पर आरोप लगाना आसान है, लेकिन उस परिवार पर क्या गुजरती है, यह कोई नहीं समझता.  पूनम कहती हैं कि जांच से उन्हें कोई डर नहीं है, लेकिन बिना जांच के किसी को अपराधी घोषित कर देना सबसे बड़ी समस्या है.

जिस हॉस्टल की बात हो रही है, वह 2008 का है

टिन्नू यादव की संपत्ति को लेकर उठ रहे सवालों पर भी पूनम यादव ने विस्तार से जवाब दिया. उन्होंने कहा कि जिस हॉस्टल की चर्चा हो रही है, वह कोई नई संपत्ति नहीं है. जमीन वर्ष 2008 में खरीदी गई थी और भवन का निर्माण 2015 के आसपास पूरा हो गया था. यानी राम मंदिर पर अंतिम फैसला आने से पहले ही यह सब मौजूद था. लोग ऐसे बता रहे हैं जैसे मंदिर बनने के बाद रातों-रात करोड़पति बन गए हों. जबकि सारी चीजें रिकॉर्ड में हैं. अगर किसी को शक है तो जांच करा लीजिए. उनका कहना है कि जिस घर की तस्वीरें दिखाकर संपत्ति का दावा किया जा रहा है, उनमें से कई संपत्तियां उनकी नहीं हैं. जिस घर में वे बैठकर बातचीत कर रही थीं, वह भी उनके पिता का घर है.

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50 करोड़ की संपत्ति वाला आदमी ऐसे रहता है क्या ?

पूनम यादव आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहती हैं कि अगर वास्तव में उनके परिवार के पास 50 करोड़ रुपये की संपत्ति होती तो उनकी जीवनशैली कुछ और होती. वह कहती हैं, जिस व्यक्ति को सुबह निकलकर रात 10-11 बजे तक सेवा करनी पड़ती हो, क्या वह अरबपति या करोड़पति की जिंदगी जी रहा होता है? अगर इतना पैसा होता तो क्या उसे इतनी मेहनत करनी पड़ती? उनके मुताबिक उनके परिवार की जिंदगी आज भी साधारण है. आय का जो भी स्रोत है, वह सबके सामने है और किसी से छिपा नहीं है.

कोरोना में घर तक नहीं आए

पूनम यादव बातचीत के दौरान कई बार भावुक भी हो जाती हैं. वह बताती हैं कि मंदिर निर्माण के दौरान टिन्नू यादव ने घर-परिवार से ज्यादा समय मंदिर परिसर में बिताया. उनके अनुसार कोरोना काल में जब पूरी दुनिया घरों में बंद थी, तब मंदिर निर्माण का काम तेजी से आगे बढ़ाने के लिए वह लगातार मौके पर मौजूद रहे. कई-कई दिन घर नहीं आते थे. मजदूरों की व्यवस्था देखना, भोजन बनवाना, सामग्री की निगरानी करना, दिन-रात वहीं लगे रहते थे. गर्मी, ठंड, बरसात कुछ नहीं देखा. उनका कहना है कि जिस व्यक्ति ने अपना जीवन सेवा में लगा दिया, आज उसी की नीयत पर सवाल उठाए जा रहे हैं. पूनम यादव का दावा है कि टिन्नू यादव का जुड़ाव कोई हालिया नहीं है. वह बताती हैं कि उनके पति 1990 के दशक से राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे हैं. आंदोलन के दौरान कई प्रमुख संतों और नेताओं के साथ काम किया. बाद में मंदिर से जुड़े विभिन्न कार्यों की जिम्मेदारी संभाली. उनके मुताबिक कभी उन्हें मुकदमे से जुड़े काम सौंपे गए तो कभी व्यवस्था से जुड़े दायित्व. जरूरत पड़ने पर उन्होंने सामान्य कार्यकर्ता की तरह सामान उठाने से लेकर व्यवस्थाएं संभालने तक हर काम किया.

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जांच करिए, लेकिन सबकी करिए

पूनम यादव का कहना है कि अगर सरकार ने जांच बैठाई है तो उसका स्वागत है. उनके अनुसार मुख्यमंत्री स्तर पर जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और परिवार हर प्रकार के सहयोग के लिए तैयार है. जहां बुलाएंगे जाएंगे. जो पूछेंगे बताएंगे. हमें जांच से कोई डर नहीं है. हालांकि वह यह भी कहती हैं कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए. अगर किसी की संपत्ति की जांच हो रही है तो सबकी होनी चाहिए. सिर्फ एक व्यक्ति को निशाना बनाकर जांच नहीं होनी चाहिए. 

आज भी मंदिर जा रहे हैं, भाग नहीं रहे

पूनम यादव इस बात पर विशेष जोर देती हैं कि उनके पति कहीं छिपे नहीं हैं. वह कहती हैं कि टिन्नू यादव रोज की तरह मंदिर जा रहे हैं. सार्वजनिक जीवन में मौजूद हैं. जांच एजेंसियों के सामने आने से नहीं बच रहे. उनके मुताबिक यदि किसी ने कोई गलत काम किया होता तो वह खुद को बचाने की कोशिश करता, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है.

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