ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े ने बाहर निकाला, अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर दिया था विवादित बयान

किन्नर अखाड़े में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बाद पूर्व अभिनेत्री और महा-मंडलेश्वर ममता कुलकर्णी को अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया है. डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि किसी भी संवेदनशील विषय पर बिना अनुमति टिप्पणी करना संगठनात्मक मर्यादा का उल्लंघन है. ममता ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि उनका इस्तीफा 27 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा और यह पूरी स्वेच्छा से लिया गया निर्णय है. उन्होंने अपने गुरु की शिक्षाओं का पालन करते हुए 25 साल तपस्या में जीवन बिताने और अपने आध्यात्मिक ज्ञान को स्वतंत्र रूप से साझा करने का भरोसा जताया.

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ममता कुलकर्णी को अविमुक्तेश्वरानंद पर बयान देने के बाद निकाल दिया गया. (Photo: ITG) ममता कुलकर्णी को अविमुक्तेश्वरानंद पर बयान देने के बाद निकाल दिया गया. (Photo: ITG)

आनंद राज

  • प्रयागराज,
  • 27 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:31 PM IST

किन्नर अखाड़े में चल रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर विवाद के बाद पूर्व अभिनेत्री और महा-मंडलेश्वर ममता कुलकर्णी को अखाड़े से बाहर कर दिया गया है. अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने वीडियो संदेश जारी कर बताया कि पदाधिकारियों की विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया. अब ममता कुलकर्णी का अखाड़े से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है, वह न तो पदाधिकारी हैं और न ही सदस्य.

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क्या बोलीं लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी?
डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि ज्योतिष पीठ और संबंधित विवादों के कई ऐतिहासिक पहलू हैं, जिन पर अखाड़ा कोई टिप्पणी नहीं करता. मौनी अमावस्या स्नान के दौरान बटुकों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना पर अखाड़ा दुःख व्यक्त करता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी संवेदनशील विषय पर अखाड़े की अनुमति के बिना टिप्पणी करना संगठनात्मक मर्यादा का उल्लंघन है.

25 जनवरी को ममता कुलकर्णी ने अविमुक्तेश्वरानंद पर दिया था बयान
25 जनवरी को ममता कुलकर्णी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की भूमिका और आचरण पर सवाल उठाए थे. इसके अलावा उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया और बड़ी भीड़ के साथ पालकी में स्नान करने की आवश्यकता पर सवाल उठाए.

ममता कुलकर्णी ने इंस्टाग्राम पोस्ट में क्या लिखा?
पूर्व अभिनेत्री ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा 27 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा और यह निर्णय उन्होंने पूरी स्वेच्छा और सही मानसिक स्थिति में लिया है. उन्होंने यह भी कहा कि उनका कोई मतभेद डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी या अखाड़े के किसी सदस्य से नहीं है और सभी के प्रति उनका सम्मान और आभार है.

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ममता कुलकर्णी ने आगे लिखा कि उनका आध्यात्मिक ज्ञान स्वतंत्र रूप से प्रवाहित होगा, जैसे जे. कृष्ण मूर्ति का ज्ञान. सत्य को किसी पद या वस्त्र की आवश्यकता नहीं होती. उन्होंने अपने गुरु श्री चैतन्य गंगागिरी नाथ का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने औपचारिक पद कभी स्वीकार नहीं किए. ममता ने यह भी बताया कि उन्होंने 25 वर्षों तक तपस्या और साधना में जीवन व्यतीत किया और आगे भी किसी पार्टी या समूह के प्रभाव के बिना अपने ज्ञान को साझा करती रहेंगी.

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