'पापा... मुझे बचा लो...' ये वो आखिरी शब्द थे जो लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वाले शाहजान ने अपने पिता से कहे थे. सबसे पहले फोन पर बेटे की आवाज सुनकर पिता महज दस मिनट में कोचिंग सेंटर पहुंच गए, लेकिन तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी. पिता ने अंदर जाने की कोशिश की, लोगों से मदद मांगी, मिन्नतें कीं, लेकिन आग की लपटों के सामने वह बेबस हो गए. उनका आरोप है कि लोग मोबाइल से वीडियो बनाते रहे और फायर ब्रिगेड भी देर से पहुंची. इस दर्दनाक हादसे में शाहजान और अम्मार समेत 15 लोगों की जान चली गई. बाराबंकी के दोनों परिवारों में मातम पसरा है. इकलौते बेटे शाहजान को खोने के बाद मां सदमे में है और पिता का रो-रोकर बुरा हाल है.
मां-बाप का इकलौता बेटा था शाहजान
मां-बाप का इकलौता बेटा शाहजान अब इस दुनिया में नहीं रहा. लखनऊ के कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने एक परिवार की सारी उम्मीदें और सपने छीन लिए. बाराबंकी के फतेहपुर कस्बे के रहने वाले मोहम्मद शाहजान लखनऊ में पढ़ाई कर रहे थे. हादसे के दौरान वह क्लासरूम में फंस गए. धुएं और आग के बीच उनका दम घुट गया और उनकी मौत हो गई. बेटे की मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट चुका है.
'बेटा चिल्लाता रहा- पापा बचा लो'
शाहजान के पिता मोहम्मद इमरान ने बताया- 'हमारे बेटे ने फोन किया. हम भागकर पहुंचे. बहुत कोशिश की कोचिंग के अंदर जाने की, लेकिन आग की लपटें इतनी भयानक थीं कि हम अंदर नहीं जा पाए. बेटा चिल्लाता रहा- पापा बचा लो. हम बेबस बने रहे. लोग मोबाइल से वीडियो बना रहे थे. हमने उनसे भी मिन्नतें कीं. फायर ब्रिगेड बाद में आई. तब तक आग बहुत भड़क चुकी थी. कोचिंग में आग से बचने के कोई इंतजाम नहीं थे. जिस कमरे में मेरा बेटा था उसका दरवाजा ऑटोमैटिक लॉक हो गया था. धुआं भरने से उसकी मौत हो गई. वह हमारा इकलौता बेटा था.'
घर पहुंचा शहजान का शव, मची चीख पुकार
आग लगने के बाद शाहजान ने सबसे पहले अपनी मां नसरीन फातिमा को फोन कर बताया था कि इमारत में आग लग गई है और वह अंदर फंस गए हैं. सूचना मिलते ही परिवार के लोग घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. देर रात जब शाहजान का पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा तो पूरे मोहल्ले में चीख-पुकार मच गई. रिश्तेदारों, समाजसेवियों और आसपास के लोगों की भारी भीड़ उनके घर पहुंची और परिवार को ढांढस बंधाया.
बाराबंकी के ही अम्मार की मौत
वहीं इस हादसे में बाराबंकी के गदिया निवासी 24 वर्षीय मोहम्मद अम्मार की भी मौत हो गई. अम्मार लखनऊ में उसी इमारत में ग्राफिक्स डिजाइनर के रूप में कार्यरत थे, जहां कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा था. आग लगने के समय वह बिल्डिंग के अंदर मौजूद थे और गंभीर रूप से झुलस गए. अम्मार अपने परिवार में सबसे बड़े थे. उनके पिता मंसूर आलम वेल्डिंग का काम करते हैं. बेटे की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है.
सैयद रेहान मुस्तफ़ा