कानपुर में इलाज में कथित लापरवाही के कारण ITBP जवान की मां का हाथ काटे जाने के मामले में नया मोड़ आ गया है. ITBP अधिकारियों की नाराजगी के बाद महज 36 घंटे के भीतर मेडिकल रिपोर्ट में बदलाव किया गया और अब पुलिस मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रही है. वहीं, पुलिस कमिश्नर कार्यालय में ITBP कमांडेंट और जवानों के पहुंचने की घटना को लेकर पुलिस आयुक्त ने ITBP के महानिदेशक (डीजी) को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की जानकारी दी है.
फिलहाल, मामले में उपचार के दौरान हुई कथित लापरवाही की दोबारा जांच शुरू की गई है. जांच टीम ने इलाज करने वाले डॉक्टरों से विस्तृत पूछताछ की, जिसमें कई गंभीर तथ्य सामने आए.
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार एसीएमओ सहित चार डॉक्टरों के पैनल ने माना कि मरीज की नसों में खून के थक्के बनने लगे थे, जिससे दबाव बढ़ा और हाथ में सूजन के साथ संक्रमण फैल गया. अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते वैस्कुलर सर्जन से परामर्श लेकर जरूरी प्रक्रिया की जाती, तो हाथ काटने की नौबत टाली जा सकती थी.
आईटीबीपी के डीजी को पत्र
उधर, केस में 'इंसाफ' के लिए शनिवार को ITBP के एक कमांडेंट लगभग 50 सशस्त्र जवानों के साथ पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे थे. इस घटनाक्रम के बाद पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने ITBP डीजी को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया और आवश्यक जांच व कार्रवाई की मांग की.
ये था पूरा मामला
महराजपुर स्थित ITBP की 32वीं बटालियन में तैनात विकास सिंह ने 13 मई को सांस लेने में तकलीफ होने पर अपनी मां निर्मला देवी को कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया था. परिवार का आरोप है कि इलाज के दौरान लगाए गए इंजेक्शन के बाद उनके हाथ में सूजन आ गई और धीरे-धीरे संक्रमण बढ़ता चला गया. बाद में उन्हें पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 17 मई को डॉक्टरों ने उनका हाथ काट दिया.
घटना के बाद विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ आइस बॉक्स में रखकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे थे. इसके बाद सीएमओ हरिदत्त नेमी ने मामले की जांच बैठाई. शुक्रवार को आई पहली रिपोर्ट में संक्रमण की वजह स्पष्ट नहीं बताई गई थी. रिपोर्ट से असंतुष्ट ITBP अधिकारियों के पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचने के बाद दोबारा जांच कराने का निर्णय लिया गया.
रविवार को हुई पूछताछ में डॉक्टरों ने बताया कि मरीज हृदय रोग से भी पीड़ित थीं. इलाज के दौरान नसों में बने खून के थक्के हाथ तक पहुंच गए, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित हुआ और संक्रमण बढ़ता गया. जांच अधिकारियों का मानना है कि समय रहते सर्जिकल हस्तक्षेप किया जाता तो हाथ बचाया जा सकता था, लेकिन डॉक्टरों ने समय पर विशेषज्ञ सर्जन की सलाह नहीं ली.
सिमर चावला