लखनऊ के दर्दनाक अग्निकांड के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में अवैध बेसमेंट और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाली बिल्डिंगों के खिलाफ अभियान चल रहा है. कानपुर में भी इसी अभियान के तहत विकास प्राधिकरण की टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं. लेकिन जाजमऊ क्षेत्र में हुई एक कार्रवाई अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है.
कारण यह है कि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के भाई बिट्टू महाना की जिस बिल्डिंग के बेसमेंट को एक दिन पहले अधिकारियों की मौजूदगी में सील किया गया था, अगले ही दिन वहां का दृश्य बदला हुआ नजर आया. सीलिंग के निशान गायब थे, दीवार पर लिखा गया संदेश मिट चुका था और प्रशासन की ओर से नया बयान सामने आ गया था. यहीं से शुरू हुई उस घटनाक्रम की चर्चा, जिसने कानपुर की प्रशासनिक कार्रवाई पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
पहले सीलिंग की कार्रवाई, फिर बदला बयान
कानपुर विकास प्राधिकरण ने हाल ही में जाजमऊ क्षेत्र में कई भवनों की जांच की थी. इसी दौरान एक ऐसी इमारत पर भी कार्रवाई हुई, जिसके बेसमेंट में कोचिंग सेंटर और रेस्टोरेंट संचालित होने की बात सामने आई. मौके पर मौजूद अधिकारियों ने भवन में सुरक्षा मानकों की कमी का हवाला दिया. बताया गया कि बेसमेंट में संचालित गतिविधियों के बीच आपातकालीन निकास जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था नहीं थी. कोचिंग में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बाहर निकलने का रास्ता भी सीमित था. इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए कार्रवाई की गई और भवन को सील किए जाने की जानकारी सामने आई. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई.
रात बीती और तस्वीर बदल गई
कार्रवाई की खबर शहर में चर्चा का विषय बनी हुई थी. इसी बीच देर रात यह जानकारी सामने आई कि भवन से सीलिंग के निशान हटा दिए गए हैं. स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई. लोगों के बीच सवाल उठने लगे कि आखिर जिस भवन को नियमों के उल्लंघन के आरोप में सील किया गया था, वह इतनी जल्दी कैसे खुल गया? जब इस संबंध में अधिकारियों से सवाल पूछे गए तो शुरुआती स्तर पर स्पष्ट जवाब नहीं मिला. कई अधिकारी सीधे प्रतिक्रिया देने से बचते नजर आए. इसके कुछ समय बाद प्रशासन की ओर से एक आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आया.
प्रशासन का दावा: सील नहीं, नोटिस दिया गया था
प्राधिकरण की ओर से कहा गया कि भवन को सील नहीं किया गया था, बल्कि नोटिस देने की कार्रवाई की गई थी. यही बयान पूरे विवाद का केंद्र बन गया. क्योंकि कार्रवाई के दौरान मौजूद मीडिया कर्मियों और स्थानीय लोगों का दावा था कि मौके पर सीलिंग की कार्रवाई की गई थी. कुछ वीडियो और तस्वीरों में भी भवन पर कार्रवाई के निशान दिखाई देने की बात कही जा रही है. जब अधिकारियों से इन दावों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें प्रवर्तन अधिकारियों की ओर से नोटिस संबंधी जानकारी दी गई थी.
मौके पर क्या मिला?
अगले दिन जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची तो वहां का दृश्य अलग था. जिस स्थान पर कार्रवाई के निशान दिखाई दे रहे थे, वे हट चुके थे. भवन के बाहर लिखी गई सीलिंग संबंधी जानकारी भी साफ कर दी गई थी. बेसमेंट में पहले की तरह गतिविधियां दिखाई दे रही थीं. आसपास मौजूद लोगों के बीच भी इसी विषय पर चर्चा हो रही थी कि आखिर एक दिन पहले हुई कार्रवाई का परिणाम अगले दिन क्यों बदल गया. यही वजह है कि अब यह मामला केवल भवन मानकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है.
सिमर चावला