16 अटेम्प्ट के बाद बने IAS, अब इस्तीफा देकर वापस से बनना चाहते हैं PCS... अपने 'तकनीकी त्यागपत्र' पर बोले रिंकू सिंह राही

IAS Rinku Singh Rahi Resigns: भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में 7 गोलियां खाने वाले आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने व्यवस्था से नाराज होकर अपना 'तकनीकी त्यागपत्र' दे दिया है. बिना काम के वेतन न लेने के सिद्धांत पर अड़े राही अब आईएएस छोड़कर अपनी पुरानी सेवा (PCS) में वापस जाना चाहते हैं. उनका यह फैसला प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है.

Advertisement
रिंकू सिंह राही लंबे समय से साइडलाइन थे. Photo ITG रिंकू सिंह राही लंबे समय से साइडलाइन थे. Photo ITG

संतोष शर्मा

  • लखनऊ ,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:02 PM IST

उत्तर कैडर के आईएएस रिंकू सिंह राही ने इस्तीफा दे दिया है लेकिन यह इस्तीफा अपने आप में अनोखा है. अनोखा इसलिए कि क्योंकि नौकरी छोड़ने की जो वजह बताई गई वो बेहद दिलचस्प है. उसमें कहा गया कि जब बतौर आईएएस काम करने का मौका नहीं मिल रहा और विभाग में उनकी कोई उपयोगिता नहीं है तो वह इस नौकरी में नहीं रहना चाहते. हालांकि, यह इस्तीफा उनका तकनीकी है. 'तकनीकी त्यागपत्र' का मतलब कि वह पूर्ववर्ती सेवा में जाना चाहते हैं यानी वह पीसीएस अधिकारी बनना चाहते हैं. रिंकू सिंह कैसे पूर्ववर्ती सेवा में जा सकेंगे? क्यों आईएएस की नौकरी छोड़ना चाहते हैं? इन तमाम सवालों के जवाब खुद रिंकू सिंह ने अपने 7 पेज के 'तकनीकी त्यागपत्र' में  दिए है. आइये जानते हैं पूरी कहानी... 

Advertisement

2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने काम न मिलने और उपेक्षा से आहत होकर अपना तकनीकी इस्तीफा सरकार को भेज दिया है. जुलाई 2025 में शाहजहांपुर के पुवाया में एसडीएम रहते हुए वकीलों के सामने उठक-बैठक लगाने का वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें राजस्व परिषद से संबद्ध किया गया था. परिषद में दो महीने तक कोई जिम्मेदारी न मिलने पर उन्होंने 'नो वर्क नो पे' के आधार पर वेतन लेने से इनकार कर दिया. रिंकू राही ने अपनी पुरानी सेवा में लौटने की इच्छा जताते हुए स्पष्ट किया है कि वे जनता के पैसे की बर्बादी नहीं चाहते.

भ्रष्टाचार के खिलाफ मिली 7 गोलियां

रिंकू राही के संघर्ष की कहानी साल 2009 से शुरू होती है, जब वे मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी थे. उन्होंने विभाग में हो रहे 100 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया था. इस ईमानदारी की कीमत उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर चुकानी पड़ी. 26 मार्च 2009 को उन पर बैडमिंटन खेलते समय जानलेवा हमला हुआ और बदमाशों ने उन्हें 7 गोलियां मारीं. इस हमले में उनकी एक आंख पूरी तरह खराब हो गई और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.

Advertisement

धमकी और सिस्टम की बेरुखी

इस्तीफे में राही ने खुलासा किया कि घोटाले के दौरान तत्कालीन प्रमुख सचिव ने उन्हें फोन पर धमकी दी थी कि ईमानदारी नहीं छोड़ी तो गन्ने के खेत में कंकाल मिलेगा. विडंबना यह रही कि जिस घोटाले की वजह से उन पर हमला हुआ, उसकी फाइल दबा दी गई और मुख्य आरोपी भी छूट गया. आईएएस बनने का सपना उन्होंने इसलिए देखा था ताकि वे जनता की बेहतर सेवा कर सकें, लेकिन वर्तमान तैनाती में उन्हें एक प्रोग्रामर तक उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे वे जनहित के काम कर सकें.

यह भी पढ़ें: 'न बैंक बैलेंस, न घर में पेंट, बस ईमानदारी की पूंजी', पिता ने दिखाई IAS रिंकू सिंह राही की सादगी

16 प्रयासों के बाद मिली थी सफलता

रिंकू सिंह राही ने हार न मानने का जज्बा दिखाते हुए 16 प्रयासों के बाद 2023 में आईएएस की कुर्सी हासिल की थी. इसके लिए उन्होंने दिव्यांगता आरक्षण का लाभ भी अंतिम समय में लिया. उनका तर्क है कि जनता के पैसे से मिलने वाली तनख्वाह पर बिना काम के उनका कोई हक नहीं है. फिलहाल उनका राजनीति में जाने का कोई इरादा नहीं है; वे केवल काम करने की आजादी चाहते हैं. अब गेंद सरकार के पाले में है कि उनके इस तकनीकी इस्तीफे पर क्या निर्णय लिया जाता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement