स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण के आरोप, कोर्ट के आदेश पर प्रयागराज में दर्ज हुआ केस, FIR में क्या-क्या

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य पर शिष्यों के यौन शोषण के आरोप में पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ है. कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज एफआईआर में कुंभ और माघ मेले के दौरान भी शोषण के आरोप लगाए गए हैं. वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को साजिश बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.

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अविमुक्तेश्वरानंद पर प्रयागराज में केस दर्ज. (File Photo: ITG) अविमुक्तेश्वरानंद पर प्रयागराज में केस दर्ज. (File Photo: ITG)

संतोष शर्मा / रोशन जायसवाल

  • प्रयागराज/वाराणसी,
  • 22 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:58 AM IST

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके एक शिष्य के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई है. यह मामला कोर्ट के आदेश के बाद झूंसी थाने में दर्ज हुआ है और इसमें पॉक्सो एक्ट समेत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं.

एफआईआर के मुताबिक, यह मामला 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच का बताया गया है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य ने दो शिष्यों के साथ यौन शोषण किया. इनमें एक नाबालिग बताया गया है.

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शिकायतकर्ता के रूप में आशुतोष ब्रह्मचारी का नाम सामने आया है, जिनके पास पीड़ित शिष्य पहुंचे थे. उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों पीड़ित लंबे समय से शोषण का शिकार हो रहे थे, लेकिन डर और दबाव के चलते सामने नहीं आ पा रहे थे.

एफआईआर में यह भी दावा किया गया है कि 2025 के कुंभ मेला और 2026 के माघ मेला के दौरान लगे शिविरों में भी इन घटनाओं को अंजाम दिया गया. आरोप है कि शिविर के भीतर ही नहीं, बल्कि स्वामी के कैंप के बाहर खड़ी गाड़ी में भी शोषण की घटनाएं हुईं.

किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) के अलावा POCSO एक्ट की कई गंभीर धाराओं- 51, 6, 3, 4(2), 16 और 17 के तहत केस दर्ज किया है. साथ ही, दो-तीन अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. यह एफआईआर कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज की गई. फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

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शंकराचार्य का पक्ष- 'यह साजिश है'

वहीं वेदपाठी बटुकों से शोषण मामले में इलाहाबाद कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज करने के आदेश पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में कहा कि आरोप लगाना अलग बात है और उसे साबित करना अलग बात. अगर हम वैसे होते तो चिंता करते, लेकिन जब हम निर्दोष हैं तो हमें किसी बात का भय नहीं.

मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस जांच पर भरोसा नहीं है. इसलिए उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए. लेकिन उन्होंने जांच में पूरा सहयोग करने की भी बात कही.

यह भी पढ़ें: 'मैं योगी नहीं हूं जो केस हटवा लूं...', यौन शोषण मामले में FIR के आदेश के बाद बोले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

उन्होंने कहा कि पुलिस यूपी सरकार की है तो वह क्या रिपोर्ट देगी, लेकिन हम फिर भी न्यायालय पर भरोसा करते हैं और न्यायालय में जब बात आएगी तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. इसके अलावा उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. जांच में पूरा सहयोग भी करेंगे.

शिकायतकर्ता पर भी उठाए सवाल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी पर भी गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि आशुतोष ने कोर्ट में दो अलग-अलग शपथ पत्र दिए हैं, जिनमें अलग-अलग कहानियां हैं. उन्होंने दावा किया कि जब एक ही व्यक्ति एक ही मामले में दो अलग-अलग बयान देता है, तो साफ है कि उनमें से एक झूठा है. ऐसे में जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी.

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इतना ही नहीं, उन्होंने आशुतोष को 'हिस्ट्रीशीटर' तक बताया और कहा कि उनके खिलाफ पहले से आपराधिक रिकॉर्ड मौजूद है.

साजिश का लगाया आरोप

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पूरे मामले को बड़ी साजिश करार देते हुए कहा कि यह उन्हें बदनाम करने और उनकी आवाज दबाने की कोशिश है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग उनकी आगामी यात्रा और गौ रक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रियता से परेशान हैं. उन्होंने कहा कि हमें रोकने के लिए इस तरह के झूठे केस बनाए जा रहे हैं, लेकिन सच्चाई सामने आकर रहेगी.

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