गाजियाबाद में करंट लगने से मौत की दूसरी घटना सामने आई है. टीला मोड़ थाना क्षेत्र की इकबाल कॉलोनी में शुक्रवार को बिजली के करंट की चपेट में आने से 8 वर्षीय अयान की दर्दनाक मौत हो गई. गाजियाबाद में पिछले 24 घंटे के भीतर इस तरह का यह दूसरा मामला है. इससे पहले इंदिरापुरम के न्यायखंड इलाके में पार्क में जलभराव के दौरान करंट की चपेट में आने से 28 वर्षीय नरेंद्र उर्फ बबलू की मौत हो गई थी. लगातार दो दिनों में हुई इन दो घटनाओं ने शहर में बिजली व्यवस्था की सुरक्षा और विभागीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की. मृतक अयान के पिता सुबेदीन ने टीला मोड़ थाने में दी शिकायत में बताया कि शुक्रवार शाम करीब चार बजे उनका बेटा घर के बाहर गली में खेल रहा था. इसी दौरान वह गली में लगे बिजली के खंभे और ट्रांसफॉर्मर के आसपास फैले करंट की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. लोगों ने पूरे इलाके के बिजली के खंभों, ट्रांसफॉर्मरों और विद्युत लाइनों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
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परिजनों का आरोप है कि कॉलोनी के लोगों ने पहले भी कई बार बिजली विभाग को लिखित और मौखिक रूप से शिकायत दी थी कि ट्रांसफॉर्मर और बिजली के खंभे के आसपास करंट उतरता है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. इसके बावजूद विभाग ने न तो स्थायी समाधान किया और न ही सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए. शिकायत में बिजली विभाग के एसडीओ विजय सैनी, जूनियर इंजीनियर (जेई) विनोद कुमार तथा कर्मचारी ताहिर और साजिद समेत अन्य जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया गया है. परिजनों ने इन सभी के खिलाफ उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की है.
उनका कहना है कि यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि विभागीय उदासीनता का नतीजा है. घटना के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और बिजली विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए नाराजगी जताई. स्थानीय निवासी अकबर चौधरी ने आरोप लगाया कि जिस खंभे के पास यह हादसा हुआ, वहां लंबे समय से करंट उतरने की समस्या बनी हुई थी. कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि इससे पहले भी उसी स्थान पर करंट लगने से कई पशुओं की मौत हो चुकी है, लेकिन तब भी समस्या का समाधान नहीं किया गया.
मयंक गौड़