बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के सपोर्ट में अविमुक्तेश्वरानंद, बोले- कोई तो निकला हिंदू धर्म का 'अलंकार'

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि इस्तीफा खुशी से नहीं, बल्कि आहत मन से दिया गया. उन्होंने यूपी सरकार की नीतियों और ब्राह्मण विरोधी दृष्टिकोण की आलोचना की. शंकराचार्य ने UGC कानून को हिंदू समाज में मतभेद पैदा करने वाला बताया और इसकी तत्काल रद्द की मांग की. उन्होंने संगम स्नान और शंकराचार्यों के सम्मान की सुरक्षा पर जोर देते हुए चेताया कि धर्म और संस्कृति के प्रतीकों का अपमान राजनीतिक और सामाजिक संकट बढ़ा सकता है.

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अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का समर्थन किया है. (Photo: ITG) अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का समर्थन किया है. (Photo: ITG)

पंकज शर्मा

  • प्रयागराज,
  • 26 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:50 PM IST

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आजतक से विशेष बातचीत की. शंकराचार्य ने कहा कि अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से खुशी से नहीं, बल्कि आहत मन से इस्तीफा दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मन इस प्रकार आहत है, जैसा कि करोड़ों सनातन धर्मियों का मन इस समय आहत है. शंकराचार्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सत्ता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथ में है और बच्चों, महिलाओं, वृद्धों, ब्रह्मचारियों और संन्यासियों पर लगातार अत्याचार हो रहा है, वहीं शंकराचार्य और उनके शिष्य के साथ भी अमानवीय व्यवहार किया गया.

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'इस पद को पाने के लिए वर्षों मेहनत करते हैं'
शंकराचार्य ने इस घटना को किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को दुखी करने वाला मामला बताया और कहा कि इतने बड़े पद पर रहने वाले अधिकारी का इस्तीफा देना यह दर्शाता है कि उनके मन में सनातन धर्म और इसके प्रतीकों के प्रति कितना गहरा सम्मान और प्रेम है. उन्होंने कहा कि कई लोग इस पद को पाने के लिए वर्षों मेहनत करते हैं, लेकिन अलंकार अग्निहोत्री ने अपने सम्मान और धर्म की रक्षा के लिए पद छोड़ने का साहस दिखाया.

'UGC कानून हिंदू समाज के भीतर मतभेद पैदा करेगा'
शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि 2022 से लागू नीतियां और दृष्टिकोण पूरे प्रदेश में ब्राह्मण विरोधी और धर्म विरोधी हैं. उन्होंने विशेष रूप से UGC कानून की आलोचना की और कहा कि यह कानून हिंदू समाज के भीतर मतभेद पैदा करने वाला कानून है. शंकराचार्य ने कहा, “जैसे किसी एक कैंपस में दो छात्र अलग-अलग जातियों से हैं और दोनों हिंदू हैं, लेकिन कानून उन्हें आपस में लड़ाने का कारण बना देता है. इस तरह पूरे हिंदू समाज को आपस में लड़ाकर समाप्त करने की साजिश की गई है. हमें मांग है कि नया UGC कानून तुरंत रद्द किया जाए.”

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संगम स्नान पर क्या बोले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती?
शंकराचार्य ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा संगम स्नान के लिए आमंत्रण पर भी बात की. उन्होंने कहा कि केवल बुलावा देने से काम नहीं होता, व्यवस्था और वचन भी जरूरी होते हैं. शंकराचार्य ने कहा कि उपमुख्यमंत्री का मतलब होता है कि मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में वही मुख्यमंत्री के समान अधिकार रखते हैं. इसके बावजूद, उचित व्यवस्था न होने के कारण स्नान और सम्मान की व्यवस्था पूरी नहीं हो सकी. उन्होंने चेताया कि चारों शंकराचार्यों के सम्मान की हमेशा रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और सरकार को इसे गंभीरता से लेना होगा.

धर्म और संस्कृति के प्रतीकों का अपमान बताया
इस अवसर पर शंकराचार्य ने कहा कि इस समय प्रदेश में धर्म और संस्कृति के प्रतीकों का अपमान हो रहा है. उन्होंने बताया कि अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा इस बात का प्रतीक है कि हमारे समाज में धर्म और संस्कृति के प्रति सम्मान रखने वाले अधिकारी अब भी मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि उनके प्रति लोगों की भावनाएं मिश्रित हैं, एक तरफ यह दुखद है कि एक वरिष्ठ अधिकारी को पद छोड़ना पड़ा, लेकिन दूसरी तरफ यह गौरव की बात है कि किसी ने सनातन धर्म और ब्राह्मण समाज के सम्मान की रक्षा के लिए कदम उठाया.

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सरकार की आलोचना
शंकराचार्य ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की निरंकुश नीतियां समाज में असंतोष और धार्मिक कटुता बढ़ा रही हैं. उन्होंने चेताया कि अगर धर्म और संस्कृति के प्रतीकों का सम्मान नहीं किया गया तो यह राजनीतिक और सामाजिक संकट को जन्म देगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि सिर्फ बुलावा और औपचारिक व्यवस्था से काम नहीं चलेगा, बल्कि वास्तविक कार्रवाई और वचनबद्धता जरूरी है.

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