बाघ देखने का प्लान है? अमानगढ़ टाइगर रिजर्व ने बढ़ा दी सफारी की तारीख, अब 30 जून तक घूम सकेंगे पर्यटक

अगर आप गर्मियों की छुट्टियों में जंगल सफारी और बाघों की झलक देखने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. उत्तर प्रदेश के बिजनौर स्थित अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में इको-टूरिज्म सीजन को 15 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है. अब पर्यटक 30 जून तक यहां जंगल सफारी का आनंद ले सकेंगे और प्राकृतिक आवास में बाघों को देखने का मौका पा सकेंगे.

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यूपी के बिजनौर जिले में है अमानगढ़ टाइगर रिजर्व. (File Photo: ITG) यूपी के बिजनौर जिले में है अमानगढ़ टाइगर रिजर्व. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • बिजनौर,
  • 13 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:48 AM IST

अगर आपने सोचा था कि 15 जून के बाद अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगलों में घूमने का मौका खत्म हो जाएगा, तो रुकिए. वन विभाग ने वाइल्डलाइफ लवर्स को एक छोटा-सा बोनस दे दिया है. उत्तर प्रदेश के बिजनौर स्थित अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में इको-टूरिज्म सीजन को 15 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है. यानी अब 30 जून तक पर्यटक जंगल सफारी का मजा ले सकेंगे और किस्मत अच्छी रही तो बाघ भी दिख सकता है.

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अमानगढ़ टाइगर रिजर्व का नाम पिछले कुछ सालों में तेजी से चर्चा में आया है. वजह है इसकी लोकेशन. यह रिजर्व उत्तराखंड के मशहूर जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से सटा हुआ है. ऐसे में यहां बाघों की आवाजाही और मौजूदगी वन्यजीव प्रेमियों के लिए बड़ा अट्रैक्शन बन गई है.

पहले इस साल का इको-टूरिज्म सीजन 15 जून को खत्म होने वाला था, लेकिन मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी ने इसे 30 जून तक बढ़ाने का फैसला लिया है. बिजनौर के डीएफओ जय सिंह कुशवाहा के मुताबिक, मानसून शुरू होने से पहले तक पर्यटक यहां सफारी कर सकेंगे. इसके बाद रिजर्व को बारिश के मौसम के लिए बंद कर दिया जाएगा.

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दरअसल, बरसात आते ही जंगल के रास्तों पर जलभराव और कीचड़ की समस्या बढ़ जाती है. कई इलाकों में वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो जाती है. यही वजह है कि हर साल मानसून के दौरान रिजर्व पर्यटकों के लिए बंद कर दिया जाता है.

अमानगढ़ की लोकप्रियता का अंदाजा यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या से लगाया जा सकता है. साल 2022-23 में शुरू हुए पहले इको-टूरिज्म सीजन में 3 हजार से ज्यादा पर्यटक पहुंचे थे. अगले ही सीजन में यह संख्या बढ़कर 6,500 तक पहुंच गई. तीसरे सीजन में भी 3,104 पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया.

सिर्फ पर्यटक ही नहीं बढ़े, बल्कि राजस्व भी बढ़ा. वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, तीन पर्यटन सत्रों में अमानगढ़ ने 17 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई की है. यही वजह है कि इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उभरते हुए वन्यजीव पर्यटन केंद्र के तौर पर देखा जा रहा है.

तो अगर आप भी शहर के शोर से दूर जंगल की खामोशी सुनना चाहते हैं, हिरणों को दौड़ते देखना चाहते हैं या फिर कैमरे में बाघ की एक तस्वीर कैद करने का सपना रखते हैं, तो आपके पास अभी कुछ दिन और हैं. अमानगढ़ के जंगल 30 जून तक आपका इंतजार कर रहे हैं.

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