फतेहपुर जिले की बिंदकी तहसील के कृपालपुर बिंदा गांव में वर्षों का इंतजार आखिरकार खत्म होता दिखाई दे रहा है. रिंद नदी पर 27 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले पक्के पुल का निर्माण कार्य शुरू हो गया है. इस पुल के निर्माण से करीब 12 गांवों की 70 हजार से अधिक आबादी को सीधा लाभ मिलेगा और दशकों पुरानी समस्या का समाधान होगा.
यह वही इलाका है जहां पुल न होने के कारण ग्रामीणों को हर दिन जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती थी. हालात इतने खराब थे कि स्थानीय महिलाओं ने खुद आगे आकर लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार कर लिया था. ग्रामीणों की इस मजबूरी और संघर्ष को 'आज तक' ने प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद प्रशासन और सरकार हरकत में आई.
शिक्षा-स्वास्थ्य पर पड़ रहा था गंभीर असर
पुल के अभाव में 600 से 700 छात्रों को नाव के सहारे स्कूल पहुंचना पड़ता था. बरसात के दिनों में यह सफर और भी खतरनाक हो जाता था. वहीं स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचना भी बड़ी चुनौती थी. कई मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाए और गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था.
ग्रामीणों ने 'आज तक' को कहा धन्यवाद
पुल निर्माण शुरू होने के बाद पूरे इलाके में खुशी का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर 'आज तक' उनकी आवाज को सरकार और प्रशासन तक नहीं पहुंचाता, तो शायद यह सपना अभी भी अधूरा रहता. अभियान की प्रमुख चेहरा रहीं कलावती ने कहा कि गांव की महिलाओं ने मजबूरी में लकड़ी का पुल बनाया था, लेकिन अब पक्के पुल का निर्माण शुरू होना उनके संघर्ष की सबसे बड़ी जीत है. ग्रामीण राधा देवी, दीपक निषाद, चंद्रभानु पटेल, राम प्रताप निषाद और देवेंद्र समेत कई लोगों ने कहा कि पुल बनने से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और गांव मुख्यधारा से बेहतर तरीके से जुड़ सकेंगे.
संघर्ष से तय किया सफलता तक का सफर
लकड़ी का पुल बनने के बाद प्रशासन की ओर से उसे हटाने का दबाव भी बनाया गया था, लेकिन ग्रामीणों ने हार नहीं मानी. लगातार मांग और जनदबाव के बाद अब सेतु निगम की ओर से पक्के पुल का निर्माण शुरू कर दिया गया है. रिंद नदी पर बन रहा यह पुल सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि हजारों ग्रामीणों के वर्षों पुराने संघर्ष, उम्मीद और जीत की कहानी है.
समर्थ श्रीवास्तव