बाइडेन-ट्रंप वाला नहीं हुआ हाल... 76 दिन में 2 डिबेट और कमला हैरिस ने ऐसे बदल दिया गेम!

अमेरिका के फिलाडेल्फिया में 10 सितंबर को हुई डिबेट डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए संजीवनी बूटी साबित हुई. प्रेसिडेंशियल डिबेट के दौरान कमला हैरिस ने बाइडेन की तुलना में बेहतर तरीके से मोर्चा संभाला. उन्होंने ट्रंप को हर मोर्चे पर घेरने की कोशिश की. 

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डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 1:56 PM IST

27 जून और 10 सितंबर... ये वो दो तारीखें हैं, जब राष्ट्रपति चुनाव की दो प्रेसिडेंशियल डिबेट हुईं. इन दोनों डिबेट में उम्मीदवार अलग-अलग थे, शहर अलग थे, चैनल अलग थे और डिबेट का नतीजा भी अलग ही था. पहली डिबेट ट्रंप और बाइडेन के बीच हुई, जिसमें बाइडेन की काफी किरकिरी हुई. रिपब्लिकन ट्रंप डेमोक्रेट बाइडेन पर पूरी तरह हावी नजर आए. लेकिन दूसरी डिबेट में स्थितियां बिल्कुल अलग रहीं. बाइडेन की रेस से नाम वापसी के बाद राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर डिबेट में शामिल हुईं हैरिस ने पूरा गेम ही बदल दिया. लेकिन कैसे?

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अमेरिका के फिलाडेल्फिया में 10 सितंबर को हुई डिबेट डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए संजीवनी बूटी साबित हुई. प्रेसिडेंशियल डिबेट के दौरान कमला हैरिस ने बाइडेन की तुलना में बेहतर तरीके से मोर्चा संभाला. उन्होंने ट्रंप को हर मोर्चे पर घेरने की कोशिश की. 

ना मैं बाइडेन हूं और ना ट्रंप हूं

डिबेट के दौरान जब ट्रंप ने कमला हैरिस पर हावी होने की कोशिश की. तो कमला हैरिस ने उनकी आंखों में आंखें डालकर दो टूक कह दिया कि वह ना तो बाइडेन हैं और ना ही ट्रंप हैं. वह कमला हैरिस हैं, जिनके पास प्लान हैं. एक ऐसा प्लान जो नए अमेरिका का रास्ता खोलेगा. हैरिस का यह आत्मविश्वास और बेबाकपन दर्शकों को खूब भाया. 

बुजुर्ग और थके हुए बाइडेन की तुलना में आत्मविश्वास से लबरेज हैरिस

27 जून की डिबेट में 78 साल के ट्रंप का मुकाबला 81 साल के जो बाइडेन से था. बाइडेन के खराब स्वास्थ्य और उम्र संबंधी बीमारियों से हर कोई वाकिफ है. इस पूरी डिबेट में बाइडेन थके हुए और लॉस्ट नजर आए. लेकिन इस बार ट्रंप का मुकाबला 59 साल की कमला हैरिस से था. कमला हैरिस डिबेट की शुरुआत से ही आत्मविश्वास से भरी हुई थीं. उनके बेबाकीपन और हाजिरजवाबी का उन्हें फायदा भी मिला. 

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हावी होने का नहीं दिया मौका

बाइडेन और ट्रंप की डिबेट में जिस तुनकमिजाजी की कमी थी. उसे इस डिबेट में कमला हैरिस ने पूरा किया. हैरिस ने डिबेट में कई बार कहा कि ट्रंप के पास कोई प्लान नहीं है. वह सिर्फ अपनी और अमीरियत की बातें करते हैं. हैरिस ने ट्रंप को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया. माइक ऑफ होने के दौरान भी हैरिस लगातार अपने हाव-भाव से ट्रंप को जवाब दे रही थीं. उनकी बातों में क्लैरिटी थी. ट्रंप के झूठे दावों का वह चुप रहकर भी खंडन कर रही थीं. 

डिबेट की रिहर्सल में नहीं छोड़ी कोई कसर

कमला हैरिस ने फिलाडेल्फिया के होटल में पांच दिनों तक डिबेट की रिहर्सल की थीं जबकि ट्रंप का कहना था कि वह अब इस तरह की डिबेट में एक्सपर्ट हो चुके हैं तो उन्हें इसकी खास जरूरत नहीं है. लेकिन हैरिस ने मेथड एक्टर की मदद से खुद को डिबेट के लिए तैयार किया.

CNN के सर्वे में ट्रंप पर भारी पड़ी कमला हैरिस

10 सितंबर की डिबेट खत्म होने के बाद CNN/SSRS ने डिबेट देखने वाले लोगों के बीच एक सर्वे कराया था. इस सर्वे में शामिल लोगों में से 63 फीसदी लोगों ने कहा कि कमला हैरिस ने ट्रंप से बेहतर परफॉर्म किया है जबकि 37 फीसदी लोग ही ट्रंप की परफॉर्मेंस से खुश थे.

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इस सर्वे से पहले इन्हीं लोगों से जब पूछा गया था कि उन्हें क्या लगता है कि कौन सा उम्मीदवार बेहतर परफॉर्म करेगा? इस पर 50 फीसदी लोगों ने कहा कि कमला हैरिस से उन्हें उम्मीदें हैं जबकि 50 फीसदी लोगों ने ट्रंप से उम्मीदें जताई थीं. इस तरह देखा जा सकता है कि डिबेट के बाद कमला हैरिस से प्रभावित और खुश लोगों की संख्या में 13 फीसदी का इजाफा हुआ.

न्यूयॉर्क टाइम्स/सिएना सर्वे क्या कहता है?

न्यूयॉर्क टाइम्स/सिएना के सर्वे में ट्रंप को हैरिस से 48 से 47 फीसदी की मामूली बढ़त बताई गई है. एक अन्य सर्वे के अनुसार चुनाव का फैसला करने वाले सात राज्यों यानी स्विंग स्टेट्स में कमला हैरिस या तो ट्रंप के साथ बराबरी की स्थिति में हैं या उनसे थोड़ा आगे हैं.

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