'अमीरों के लिए भारत से बेहतर कोई जगह नहीं', कारोबारी के बयान पर छिड़ी बहस

क्या पैसा होने पर भारत में रहना विदेशों से बेहतर है? एक कारोबारी के इसी दावे ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. कुछ लोगों का कहना है कि अमीरों के लिए भारत में सुविधाएं बेहतर हैं, जबकि कई यूजर्स का मानना है कि खराब इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रैफिक और प्रदूषण जैसी समस्याएं अमीर-गरीब में फर्क नहीं करतीं.

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यह तस्वीर बेंगलुरु की है (Photo:Reuters) यह तस्वीर बेंगलुरु की है (Photo:Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:51 AM IST

क्या पैसे वाले लोगों के लिए भारत में रहना विदेशों में बसने से बेहतर है? इस सवाल को लेकर सोशल मीडिया पर जोरदार बहस छिड़ गई है. इसकी शुरुआत उद्यमी और लेखक संदीप मॉल की एक पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) यानी बेहद संपन्न लोग भारत छोड़कर विदेश क्यों बसना चाहते हैं.

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क्या कहा संदीप मॉल ने?

दिल्ली-NCR के रहने वाले संदीप मॉल ने X पर लिखा-जो लोग नौकरी या काम के लिए विदेश जाते हैं, उनकी बात समझ में आती है. लेकिन जिन लोगों के पास पैसा है, उनके लिए भारत में जीवन कहीं बेहतर है. मुझे अब भी समझ नहीं आता कि HNI विदेश क्यों जाते हैं.

उनकी इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर भारत और विदेश में रहने के फायदे और नुकसान को लेकर चर्चा शुरू हो गई. कई लोगों ने उनकी बात से सहमति जताई, जबकि कई यूजर्स ने इसका विरोध किया.

आलोचकों ने गिनाईं भारत की चुनौतियां

बेंगलुरु के एक टेक प्रोफेशनल शांतनु गोयल ने कहा कि भारत में अमीर और गरीब दोनों को कई बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. उन्होंने लिखा कि चाहे आप कितने भी अमीर क्यों न हों, सड़क पर निकलेंगे तो वही गड्ढे मिलेंगे. ट्रैफिक में फंसना पड़ेगा और पैदल चलने के लिए अच्छी जगह भी नहीं मिलेगी.

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एक अन्य यूजर नितिन सिन्हा ने लिखा कि जब तक आप अपनी आलीशान सोसाइटी के अंदर हैं, सब कुछ ठीक लगता है. लेकिन बाहर निकलते ही खराब सड़कें, प्रदूषण, कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर और गंदगी जैसी समस्याएं सामने आ जाती हैं.

कई लोगों ने साफ हवा, बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं, बच्चों की सुरक्षा और मजबूत कानून व्यवस्था को विदेश में बसने के प्रमुख कारणों में गिनाया.

संदीप मॉल ने दिया जवाब

हालांकि संदीप मॉल इन तर्कों से पूरी तरह सहमत नहीं दिखे. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास पर्याप्त पैसा है, वे हवा, पानी और खाने की गुणवत्ता जैसी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं.

उन्होंने लिखा कि अगर मैं HNI होता तो विदेश जाने की सबसे बड़ी वजह सिर्फ यह होती कि हमारा समाज भरोसे के मामले में कमजोर है और नैतिक रूप से अधिक भ्रष्ट होता जा रहा है.

'भारत का अपनापन अलग है'

बहस के बीच कुछ यूजर्स ने संदीप मॉल की बात का समर्थन भी किया. एक यूजर ने लिखा कि अगर आपके पास हर साल 20-25 लाख रुपये की डिस्पोजेबल इनकम है, तो भारत दुनिया में रहने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक है. यहां मिलने वाली सुविधाओं की बराबरी करना आसान नहीं है.

लेखक हरनीत सिंह खरबंदा ने भी अपनी राय शेयर करते हुए कहा कि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, दुबई, सिंगापुर और बैंकॉक में समय बिताया है. उनके मुताबिक, इन देशों का इंफ्रास्ट्रक्चर भारत से बेहतर हो सकता है, लेकिन हर देश की अपनी एक आत्मा होती है और भारत का अपनापन अलग है.

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उन्होंने लिखा कि विदेश में रहने वाले कई भारतीय भी आखिरकार एक दिन भारत लौटना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें यहां जैसा घर जैसा एहसास कहीं और नहीं मिलता.

सोशल मीडिया पर जारी है बहस

संदीप मॉल की पोस्ट ने एक बार फिर उस पुराने सवाल को चर्चा में ला दिया है कि बेहतर जीवन का मतलब आखिर क्या है. क्या बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक सुविधाएं ज्यादा मायने रखती हैं, या फिर परिवार, संस्कृति और अपनेपन का एहसास? सोशल मीडिया पर इस सवाल का कोई एक जवाब नहीं दिख रहा, लेकिन बहस लगातार जारी है.

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