'₹370 वसूल करूंगा' विवाद में नई बहस, गलती की सजा कहां तक सही?

कॉमेडियन प्रनीत मोरे के शो से शुरू हुआ विवाद अब उस शख्स की नौकरी जाने की खबर के बाद और बढ़ गया है. इस घटनाक्रम ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है कि महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए जवाबदेही तय करने की सीमा क्या होनी चाहिए. कार्यस्थल पर दी जाने वाली सजा कितनी दूर तक जाना उचित है.

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हिमांशु जांगड़ा की गुरुग्राम स्थित कंपनी में नौकरी चली गई, जहां वह कार्यरत थे. (Photo: X) हिमांशु जांगड़ा की गुरुग्राम स्थित कंपनी में नौकरी चली गई, जहां वह कार्यरत थे. (Photo: X)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:55 PM IST

370 रुपये की बिरयानी को लेकर वायरल हुए हिमांशु जांगड़ा का मामला अब सिर्फ एक विवादित टिप्पणी तक सीमित नहीं रह गया है. उनकी नौकरी जाने के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है. सवाल उठ रहे हैं कि किसी गलत बयान की सजा की सीमा क्या होनी चाहिए. क्या सार्वजनिक आलोचना के बाद नौकरी छिन जाना उचित माना जा सकता है?

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पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कॉमेडियन प्रनीत मोरे के एक क्राउडवर्क शो में हिमांशु जांगड़ा ने अपनी डेट से जुड़ा किस्सा शेयर किया. वायरल क्लिप में उन्होंने कहा कि उन्होंने एक महिला के लिए 370 रुपये की बिरयानी खरीदी थी और इसलिए वह 'पैसा वसूल' करना चाहते थे. उनकी एक कमेंट को सोशल मीडिया पर कई लोगों ने महिलाओं के प्रति अपमानजनक और अधिकार जताने वाली सोच का उदाहरण बताया.

वीडियो वायरल होते ही इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. कई यूजर्स ने कहा कि ऐसी सोच रिश्तों और सहमति की बुनियादी समझ पर सवाल खड़े करती है. विवाद और बढ़ गया जब कुछ लोगों ने हिमांशु के कथित पुराने सोशल मीडिया पोस्ट भी शेयर किए. एक यूजर ने लिखा-जो लोग उसके लिए सहानुभूति जता रहे हैं, उन्हें उसकी सोच भी देखनी चाहिए.

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यह भी पढ़ें: नौकरी गई, फजीहत हुई अलग से... '₹370 वसूल करूंगा' कंट्रोवर्सी में अब तक क्या-क्या हुआ?

किसी की जॉब छीन लेना बहुत बड़ी सजा है

हालांकि, मामले ने जल्द ही एक अलग मोड़ ले लिया. बड़ी संख्या में लोग यह कहने लगे कि टिप्पणी चाहे कितनी भी गलत क्यों न हो, नौकरी खोना बहुत बड़ी सजा है. एक वायरल पोस्ट में लिखा गया-उसने जो कहा वह गलत था, उसकी सोच भी गलत है, लेकिन किसी की नौकरी चले जाना बेहद गंभीर बात है.

 

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी व्यक्ति के निजी विचारों या सार्वजनिक मंच पर कही गई बातों का असर उसके पेशेवर जीवन पर पड़ना चाहिए. कई यूजर्स का मानना है कि आलोचना, सार्वजनिक शर्मिंदगी और माफी पर्याप्त सजा हो सकती थी, जबकि अन्य लोगों का कहना है कि सार्वजनिक व्यवहार के लिए जवाबदेही तय होना भी जरूरी है.

इस विवाद की आंच कॉमेडियन प्रनीत मोरे तक भी पहुंची. कुछ लोगों ने शो के दौरान की गई उनकी टिप्पणियों पर सवाल उठाए, जबकि कई यूजर्स ने लाइव कॉमेडी शो में होने वाली बातचीत की सीमाओं और जिम्मेदारियों पर चर्चा शुरू कर दी.

लेकिन इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू नौकरी या 'कैंसल कल्चर' की बहस नहीं है. इसने एक बार फिर सहमति (Consent), महिलाओं के प्रति सम्मान और रिश्तों में अधिकार जताने वाली मानसिकता को लेकर गंभीर चर्चा छेड़ दी है. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया 370 रुपये की बिरयानी पर नहीं, बल्कि उस सोच पर देखने को मिली जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने चिंताजनक बताया.

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