'हमने इतिहास को तोड़-मरोड़कर नहीं दिखाया,' NCERT ने किताबों में संशोधन पर दी सफाई

किताबों में हुए बदलाव को लेकर NCERT पर पक्षपात और एजेंडा चलाने के आरोप लग रहे हैं. इस पर एनसीईआरटी ने सफाई दी है और कहा है कि उन्होंने न तो इतिहास को तोड़-मरोड़कर दिखाया है और न तो किसी के दबाव में कुछ बदलाव किया है. किताब में इतिहास को यथावत दिखाने की कोशिश की गई है.

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 NCERT की किताबों बदलाव पर टेक्स्टबुक कमेटी के प्रमुख ने सफाई दी है  (Photo: Pixabay) NCERT की किताबों बदलाव पर टेक्स्टबुक कमेटी के प्रमुख ने सफाई दी है (Photo: Pixabay)

मिलन शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 28 अगस्त 2025,
  • अपडेटेड 4:42 PM IST

एनसीईआरटी की किताबों में संशोधन के बाद देश के इतिहास को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं. नई किताबों में इतिहास को तोड़-मरोड़ कर या सेलेक्टिव तरीके से इतिहास बताने को लेकर चर्चा हो रही है. इस बहस के बीच NCERT पाठ्यपुस्तक समिति के प्रमुख प्रोफेसर मिशेल डैनिनो ने इंडिया टुडे से बातचीत में अपनी बात रखी.

डैनिनो ने बताया कि हमनें इतिहास को यथासंभव ईमानदारी से दिखाने की कोशिश की है.इतिहास को हमेशा साफ-सुथरा रखा गया है. हम इतिहास को वैसा ही दिखा रहे हैं जैसा वह घटित हुआ था. इसमें महिमामंडन जैसी कोई बात नहीं कर रहे हैं.

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मुगलकालीन इतिहास से कोई छेड़छाड़ नहीं
डैनिनो ने कहा कि मुगल काल और इस्लामी शासकों के इतिहास में कोई बदलाव नहीं हुआ है. इसे कतई तोड़-मरोड़ कर पेश नहीं किया गया है, बल्कि इस इतिहास को नए तरीके से पुनर्गठित किया गया है.

उन्होंने कहा कि हमने मुग़लों को एक थीम के हिस्से के रूप में दिखाया है, ताकि कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को भी इसमें शामिल किया जा सके. क्योंकि कई लोगों का मानना ​​था कि अंग्रेजों ने भारत पर राज करने के लिए मुगलों को हराया था, लेकिन ऐसा नहीं था. अंग्रेजों के आने से पहले कई भारतीय शासकों ने मुग़लों का विरोध किया था.

एजेंडा चलाने के आरोप को किया खारिज
विपक्षी दलों और कई शिक्षाविदों ने एनसीईआरटी पर राजनीतिक या वैचारिक एजेंडा चलाने का आरोप लगाया है. इसे डैनिनो ने सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि यह तर्क कि एनसीईआरटी आरएसएस या हिंदुत्व का एजेंडा चला रहा है, बेहद मूर्खतापूर्ण है.

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पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए कोई मजबूर नहीं कर सकता: डैनिनो
डैनिनो ने कहा कि भारत सरकार, भाजपा या कोई भी राजनीतिक दल एनसीईआरटी को उसके पाठ्यक्रम संशोधन के लिए मजबूर नहीं कर सकता है. उन्होंने बताया कि हमें विभिन्न माध्यमों से विधायकों, सांसदों और मंत्रियों से अपने क्षेत्रीय नायकों को एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में शामिल करने के लिए अनुरोध मिलता है. हमें साफतौर पर मना कर देते हैं और कहते हैं कि यह संभव नहीं है.

हमने इतिहास के काले अध्यायों पर एक नोट लिखा है ताकि यह दर्शाया जा सके कि जब विदेशी शासक भारत में आए तो क्रूरता बढ़ी.यहां तक कि यूनानी विद्वान भी यही कहते हैं.

अक्टूबर में आ सकती हैं पार्ट-2 किताबें
डैनिनो ने बताया कि अक्टूबर में नई पार्ट-2 किताबों का प्रकाशन होगा. कक्षा 7 भाग 2, पार्ट - 1 से जुड़ने के लिए 1200 ई. में समाप्त होगा. वहीं  कक्षा 8 भाग- 2 भारत की स्वतंत्रता पर समाप्त होगा. 

विभाजन पर दी जाएगी जानकारी
किताब में सावरकर जैसे शख्सियत को शामिल करने को लेकर डैनिनो ने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा. उन्होंने कहा कि हम विभाजन के बारे में विभिन्न विचार प्रस्तुत करेंगे कि विभाजन कैसे हुआ, क्यों हुआ, इसके क्या कारण थे? क्या विभाजन टाला जा सकता था? विभाजन को लेकर  सुभाष चंद्र बोस, गांधी और सभी ने विभाजन के बारे में अलग-अलग विचार रखे थे.

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