उधार मांगने के लिए पाकिस्तान का नया दांव, अब दुबई-सऊदी से ऐसे मंगा रहा पैसे!

यूएई और सऊदी में रहने वाले पाकिस्तानी नागरिकों की जेब से उनकी सरकार विदेशी करंसी निकालकर अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की नई चाल चली है. ऐसे में जानते हैं विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने का पाकिस्तान का क्या है नया प्लान?

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पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए बनाया ये प्लान (Photo - Pexels) पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए बनाया ये प्लान (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:11 PM IST

विदेशी मुद्रा की कमी और कमजोर अर्थव्यवस्था से जूझ रहा पाकिस्तान अब अपने ही नागरिकों के जरिए डॉलर, दिरहम और रियाल जुटाने की कोशिश कर रहा है. इसके लिए पाकिस्तान सरकार ने एक नया दांव चला है. अब दुबई और सऊदी अरब में काम कर रहे लाखों पाकिस्तानी अपने कमाए हुए पैसे सीधे पाकिस्तान सरकार के पास निवेश कर सकेंगे. बदले में उन्हें आकर्षक मुनाफा देने का वादा किया जा रहा है.

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खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने अपने 'नया पाकिस्तान सर्टिफिकेट' (NPC) स्कीम का दायरा बढ़ा दिया है. अब इसमें संयुक्त अरब अमीरात की करंसी दिरहम और सऊदी अरब की करंसी रियाल में भी निवेश किया जा सकेगा. यह व्यवस्था 1 जून से लागू हो गई है.

आखिर क्या है पाकिस्तान का नया प्लान?
अब तक खाड़ी देशों में रहने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को इस स्कीम में निवेश करने के लिए पहले अपनी रकम डॉलर या पाकिस्तानी रुपये में बदलनी पड़ती थी. इससे उन्हें एक्सचेंज रेट का जोखिम उठाना पड़ता था.

लेकिन, अब UAE में रहने वाले पाकिस्तानी सीधे दिरहम में और सऊदी अरब में रहने वाले लोग सीधे रियाल में निवेश कर सकेंगे. यानी जिस करंसी में वे कमाते हैं, उसी में पैसा लगाकर तय मुनाफा हासिल कर सकते हैं.

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सरकार को उम्मीद है कि इससे विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानी बड़ी मात्रा में अपनी बचत देश में निवेश करेंगे और पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिलेगा.

कितना मिलेगा मुनाफा?
दिरहम में निवेश करने वालों को 3 महीने की अवधि पर 6.5 फीसदी से शुरुआत होने वाला रिटर्न मिलेगा. वहीं 5 साल के निवेश पर यह मुनाफा बढ़कर 7.5 फीसदी तक पहुंच जाएगा.

दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार ने पाकिस्तानी रुपये में जारी नए पाकिस्तान सर्टिफिकेट्स पर भी ब्याज दरें बढ़ा दी हैं. नई दरों के मुताबिक, 3 महीने के लिए 11.75%, 6 महीने के लिए 12%, 1 साल के लिए 12.25%, 3 साल के लिए 12.5% और 5 साल के लिए 12.75% मुनाफा दिया जाएगा.

UAE के 20 लाख से ज्यादा पाकिस्तानियों पर नजर
इस कदम के पीछे सबसे बड़ा कारण UAE में रहने वाले पाकिस्तानी हैं. अनुमान है कि दुबई समेत पूरे UAE में 20 लाख से ज्यादा पाकिस्तानी रहते और काम करते हैं. पाकिस्तान सरकार की नजर इन लोगों की बचत पर है. सरकार चाहती है कि ये लोग अपनी कमाई स्थानीय बैंकों या दूसरे निवेश विकल्पों में लगाने के बजाय पाकिस्तान में निवेश करें.

दिरहम में निवेश की सुविधा देकर सरकार ने सीधे इसी समुदाय को निशाना बनाया है. इससे निवेशकों को मुद्रा बदलने की झंझट नहीं होगी और पाकिस्तान को विदेशी करंसी मिलने लगेगी.

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विदेशी मुद्रा बढ़ाने के लिए पहले बनाया था ऐसा प्लान
विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानियों से पैसा जुटाने की कोशिश नई नहीं है. साल 2019 में पाकिस्तान ने 'पाकिस्तान बनाओ सर्टिफिकेट' नाम की योजना शुरू की थी. उस समय भी खाड़ी देशों में रहने वाले पाकिस्तानियों को लक्ष्य बनाकर डॉलर में निवेश कराने की कोशिश की गई थी.

सरकार का तर्क रहा है कि अगर प्रवासी पाकिस्तानी औपचारिक बैंकिंग चैनलों के जरिए पैसा भेजेंगे और निवेश करेंगे तो इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ेगा.

किन करंसी में कर सकते हैं निवेश?
नया पाकिस्तान सर्टिफिकेट (NPC)सिर्फ दिरहम और रियाल तक सीमित नहीं है. यह योजना पहले से अमेरिकी डॉलर, ब्रिटिश पाउंड और यूरो में भी उपलब्ध है. इसके तहत डॉलर पर 6.75% से 7.75% तक रिटर्न, पाउंड पर 6.75% से 8% तक रिटर्न
और यूरो पर 4.75% से 6.25% तक रिटर्न दिया जा रहा है.वहीं विदेशी करंसी वाले सभी सर्टिफिकेट्स में न्यूनतम निवेश 1000 यूनिट तय किया गया है.

विदेशी मुद्रा जुटाने की नई कोशिश
असल में पाकिस्तान इस समय भारी आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है. ऐसे में सरकार के लिए विदेशी मुद्रा का हर स्रोत महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि अब वह विदेशों में बसे अपने नागरिकों की बचत को देश में लाने की कोशिश कर रही है.

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दिरहम और रियाल में निवेश की नई सुविधा को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. आसान शब्दों में कहें तो पाकिस्तान अब दुबई और सऊदी अरब में काम कर रहे अपने नागरिकों की जेब से पैसा निकालकर देश की अर्थव्यवस्था में लगाने का रास्ता बना रहा है, ताकि विदेशी करंसी का प्रवाह बढ़े और वित्तीय दबाव कुछ कम हो सके.

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