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ये हैं देश के वो 10 मंदिर जहां महिलाओं की एंट्री पर है बैन

aajtak.in
  • 18 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 9:30 AM IST
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हिंदू धर्म में कहा जाता है 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः' यानी जहां नारी की पूजा होती है, वहीं देवताओं का वास होता है. लेकिन कई जगह हालात ऐसे हैं जहां महिलाओं को भगवान के घर मंदिरों में पूजा करने का भी अधिकार नहीं है. सिर्फ सबरीमाला मंदिर ही नहीं देश में ऐसे 10 मंदिर हैं जहां महिलाओं की एंट्री पर पाबंदियां हैं...

शनि शिंगणापुर मंदिर, अहमदनगर, महाराष्ट्र

यहां भी मंदिर के गर्भगृह में महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. कहा जाता है कि महिलाओं के निकट जाने से शनिदेव खतरनाक तरंग छोड़ने लगते हैं. इस मंदिर में करीब 500 सालों से महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. (फोटोः शनि शिंगणापुर ट्रस्ट)

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कार्तिकेय मंदिर, पिहोवा, हरियाणा

कहा जाता है कि यहां स्थापित भगवान कार्तिकेय ब्रह्मचारी हैं. यहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. इसलिए श्राप का भय दिखाकर महिलाओं का प्रवेश कड़ाई से प्रतिबंधित रखा गया है. (फोटोः हरियाणा टूरिज्म)

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घटई देवी मंदिर, सतारा, महाराष्ट्र

यहां भी महिलाओं के प्रवेश पर बैन है. हालांकि, पहले से लगे महिलाओं का प्रवेश वर्जित वाला बोर्ड हटा दिया गया है, लेकिन महिलाओं को मंदिर में जाने से रोका जाता है. (फोटोः सतारा प्रशासन)

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कीर्तन घर, बरपेटा सत्र, बरपेटा, असम

असम के बरपेटा में स्थित इस मंदिर में महिलाओं को नहीं जाने दिया जाता है. कहा जाता है कि यह एक वैष्णव मठ है. इस मंदिर में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं मिली थी.

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मंगल चांडी मंदिर, बोकारो, झारखंड

मंदिर के गर्भगृह से 100 फीट दूर तक ही महिलाएं प्रवेश कर सकती हैं. इस 100 फीट के घेरे के अंदर महिलाएं प्रवेश करती हैं तो उनपर घोर आपदा आने की चेतावनी दी जाती है.
(फोटोः झारखंड टूरिज्म)

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मावली माता मंदिर, धमतरी, छत्तीसगढ़

यहां पर कहा जाता है कि एक रात पुजारी को सपना आया कि देवता को महिलाएं पसंद नहीं हैं. इसलिए इसके बाद से मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित कर दिया गया.

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बिमला माता मंदिर, पुरी, ओडिशा

यहां कहा जाता है कि महिलाएं मां काली की अवतार हैं. इसलिए पुरी के जगन्नाथ मंदिर परिसर में स्थित बिमला माता मंदिर में दुर्गा पूजा के दौरान 16 दिनों तक महिलाओं का प्रवेश वर्जित होता है. (फोटोः जगन्नाथ पुरी ट्रस्ट)

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कामख्या देवी, कामख्या, असम

कहा जाता है कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को इस मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाता है. हालांकि, यहां देवी खुद रजस्वला हैं, लेकिन रजस्वला महिलाओं की एंट्री पर मंदिर में प्रतिबंध है.

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अवधूत देवी मंदिर, कोवलम, केरल

इस मंदिर के बाहर नीले रंग के बोर्ड पर मोटे-मोटे सफेद अक्षरों में लिखा है कि मासिक धर्म के समय मंदिर में प्रवेश करना संस्कृति के खिलाफ है.

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सबरीमाला श्री अयप्पा मंदिर, पथनामथिट्टा, केरल

माना जाता है कि देवता अयप्पा ब्रह्मचारी हैं. इसलिए 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद महिलाओं की इस मंदिर में एंट्री सुनिश्चित नहीं हो सकी है.

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