Uttarakhand Offbeat Summer Destinations: केदारनाथ और बद्रीनाथ के पावन दर्शन के लिए हर साल लाखों लोग उत्तराखंड पहुंचते हैं. लेकिन देवभूमि सिर्फ चारधाम तक सीमित नहीं है. अगर आप भीड़भाड़ से दूर, असल स्वर्ग का अहसास करना चाहते हैं, तो उत्तराखंड में कई ऐसी छिपी और बेहद खूबसूरत जगहें हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं.
अगर इस बार गर्मियों की छुट्टियों में आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ उत्तराखंड जाने का प्लान बना रहे हैं, तो केदारनाथ, बद्रीनाथ, नैनीताल और ऋषिकेश की पुरानी और भीड़भाड़ वाली जगहों को छोड़कर इन अनछुए रास्तों को चुनें. यहां की असली शांति और ताजी हवा आपको जिंदगी भर याद रहेगी.
आइए जानते हैं उत्तराखंड की उन ठंडी और ऑफबीट जगहों के बारे में, जहां की अछूती खूबसूरती से आपको मंत्रमुग्ध कर देंगी.
कनाताल
मसूरी की भीड़भाड़ से परेशान हो चुके लोगों के लिए कनाताल एक परफेक्ट ऑप्सन है. चंबा-मसूरी रोड पर स्थित यह छोटा सा गांव सेब के बगीचों, घने जंगलों और बर्फ से ढकी पहाड़ियों से घिरा है. यहां सुबह-सुबह जब कोहरा आपके कमरों तक आता है, तो लगता है जैसे आप बादलों के ऊपर रह रहे हों. कनाताल धीरे-धीरे सोलो ट्रैवलर्स की पहली पसंद बनता जा रहा है.
दारमा वैली
उत्तराखंड के पिथौरागढ जिले में स्थित दारमा वैली भारत और तिब्बत सीमा के पास है. पंचचूली चोटियों के बीच में बसी यह घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता, झरनों और अनूठी जनजातीय संस्कृति के लिए जानी जाती है. अगर आप ट्रैकिंग और शांति के शौकीन हैं, तो यह जगह आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं होने वाली है.
खिरसू
पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित खिरसू एक ऐसा हिल स्टेशन है, जहां आज भी कमर्शियलाइजेशन नहीं पहुंचा है. यही कारण है कि खिरसू अपनी नेचुरल ब्यूटी से लोगों को अपनी तरफ खींच रहा है, आज भीड़भाड़ से दूर लोग शांत जगह की तलाश में रहते हैं, जहां उनको कुछ सुकून मिल सके. ऐसे में खिरसू सबसे परफेक्ट जगह है.
ओक, देवदार और सेब के पेड़ों से घिरे इस शांत गांव से हिमालय की लगभग 300 से ज्यादा अनाम चोटियों का नजारा साफ दिखाई देता है. यहां गाड़ियों का शोर नहीं बल्कि सिर्फ चिड़ियों की चहचहाहट और हवा की सरसराहट सुनाई देती है.
मुनस्यारी
उत्तराखंड के जौहार घाटी में बसा मुनस्यारी धीरे-धीरे ट्रैवलर्स की पहली पसंद बन रहा है, इतना ही नहीं इसे उत्तराखंड का 'मिनी कश्मीर' भी कहा जाता है. बर्फ से ढकी पंचचूली पहाड़ियों का जैसा शानदार नजारा यहां से दिखाई देता है, वैसा पूरे प्रदेश में कहीं और से नहीं मिलता. यह ट्रेकर्स और नेचर लवर्स के लिए एकदम परफेक्ट स्पॉट है.
लोहाघाट
चंपावत जिले में स्थित लोहाघाट अपनी ऐतिहासिक इमारतों और चीड़ के घने जंगलों के लिए मशहूर है. लोहावती नदी के किनारे बसे इस शहर का मौसम सालभर सुहावना रहता है, इसलिए गर्मियों के दिनों में आपको यहां चिलचिलाती धूप और उमस से राहत मिलेगी. यहां की मायावती आश्रम और एबट माउंट जैसी जगहें आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाती हैं.
ट्रैवल टिप: इन जगहों पर जाने का सबसे सही समय मार्च से जून और फिर सितंबर से नवंबर के बीच का होता है. मानसून के टाइम यहां जाने से बचें.
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