रणथम्भौर के जंगलों में बसा है कचिदा माता मंदिर, दर्शन के साथ मिलेगा नेचर का सुकून, यादगार बन जाएगी ट्रिप

राजस्थान के सवाई माधोपुर में रणथंभौर के घने जंगलों के बीच माता का मंदिर स्थित है. जहां आस्था और प्रकृति का एक खास संगम देखने को मिलता है. भीड़-भाड़ से दूर, पहाड़ियों और हरियाली से घिरा यह मंदिर वन्यजीव सफारी के साथ-साथ शांति और बेहतरीन फोटोग्राफी चाहने वाले ट्रेवलर्स के लिए एक परफेक्ट छिपी हुई जगह है.

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सवाई माधोपुर में घूमने की कई जगहें मौजूद हैं. (PHOTO:ITG/AI) सवाई माधोपुर में घूमने की कई जगहें मौजूद हैं. (PHOTO:ITG/AI)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 28 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:46 PM IST

Kachida Mata Mandir Ranthambore: भारत के हर राज्य में अलग खानपान और रहन-सहन होता है. इनके अलावा हर प्रदेश में घूमने की अलग-अलग शानदार जगहें भी होती हैं, इन्हीं में से एक राजस्थान है. जहां के सिर्फ महल ही नहीं बल्कि धार्मिक स्थल भी काफी मशहूर हैं. अगर आप घूमने के शौकीन हैं और आपको नई-नई जगहें देखना और महसूस करना पसंद है तो आज हम आपको एक ऐसे माता के मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां जाने का रास्ता भी आपका दिल खुश कर देगा. 

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राजस्थान का सवाई माधोपुर जिला अपने फेमस रणथम्भौर नेशनल पार्क और बाघों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है, हर साल लाखों टूरिस्ट यहां टाइगर सफारी का मजा लेने पहुंचते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसी जंगली इलाके में एक ऐसा धार्मिक स्थल भी मौजूद है, जहां श्रद्धा और नेचर का अनोखा मेल देखने को मिलता है.

हम जिस जगह है कि बात कर रहे हैं, वो है कचिदा माता मंदिर. घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर न सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है, बल्कि ट्रेवल लवर्स के लिए भी एक बेहतरीन जगह बन चुकी है. 

जंगल के बीच स्थित है कचिदा माता मंदिर

कचिदा माता मंदिर रणथम्भौर के वन क्षेत्र के पास स्थित एक मशहूर धार्मिक स्थल है, मंदिर तक पहुंचने का सफर बेहद खूबसूरत माना जाता है. 

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रास्ते में हरियाली से ढकी पहाड़ियां, हरी-भरी घास और जंगल का शांत वातावरण लोगों को एक अलग ही दुनिया का एहसास कराता है. यही वजह है कि यहां आने वाले लोग सिर्फ दर्शन ही नहीं, बल्कि नेचर के करीब कुछ सुकून भरे पल बिताने भी पहुंचते हैं.

श्रद्धालुओं की अटूट आस्था

यहां के स्थानीय लोगों के बीच कचिदा माता को लेकर गहरी श्रद्धा है. मान्यता है कि माता अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं और लाइफ में आने वाली दिक्कतों को दूर करने का आशीर्वाद देती हैं. नवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है, जिसमें आसपास के गांवों और शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

ट्रेवलर्स के लिए क्यों है खास?

हिमाचल और उत्तराखंड की भीड़-भाड़ से दूर अगर आप छिपी हुई और अनोखी सुकून भरी जगह तलाश रहे हैं तो यह मंदिर आपके लिए बेस्ट रहने वाला है. एक तो यहां आने पर आपको माता का आशीर्वाद मिलता है और उसके साथ-साथ राजस्थान के प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने का मौका मिलता है. मंदिर के आसपास का वातावरण फोटोग्राफी और नेचर लवर्स के लिए परफेक्ट है.

रणथम्भौर सफारी के साथ बनाएं ट्रिप का हिस्सा

हर साल यहां हजारों लोग आते हैं और अधिकतर लोग  रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में सफारी का मजा लेने ही आते हैं. ऐसे में कचिदा माता मंदिर की यात्रा आपकी ट्रिप को और भी यादगार बना सकती है. सुबह की सफारी के बाद या शाम के समय यहां का शांत वातावरण मन को सुकून देता है. समर वेकेशन में परिवार के साथ घूमने आने वाले लोगों के लिए भी यह एक शानदार जगह हो सकती है.

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सफर के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

जैसा की आप जानते हैं कि यह इलाका जंगल और वन्यजीवों के करीब स्थित है, इसलिए टूरिस्ट को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का खास ध्यान रखना चाहिए. प्लास्टिक या कचरा जंगल में न फैलाएं और स्थानीय नियमों का पालन करें. ताकि प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों का संरक्षण बना रहता है.

मंदिर तक कैसे पहुंचें?

कचिदा माता मंदिर पहुंचने के लिए सबसे पहले सवाई माधोपुर पहुंचना होता है. सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन दिल्ली, जयपुर, कोटा और मुंबई जैसे बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. यहां से टैक्सी या स्थानीय गाड़ी से आप मंदिर और आसपास के इलाकों तक पहुंचा सकते हैं. 

 

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