नए साल का सूरज उगते ही पूरी दुनिया खुशियों में डूब गई. दुनिया भर में लोग देर रात तक जश्न मनाते रहे, वहीं भारत में भी लोगों ने धूमधाम से नए साल का स्वागत किया. जश्न के साथ-साथ आस्था का भी अद्भुत संगम दिखा. कड़ाके की ठंड के बावजूद देश के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी.अयोध्या, काशी और मथुरा देश के तमाम मंदिरों में सुबह से ही लोगों का तांता लगा रहा.
वाराणसी की गलियों से लेकर कटरा की पहाड़ियों तक, हर तरफ बस भक्तों की लंबी कतारें और जयकारे सुनाई दे रहे थे. लोग ठिठुरती ठंड और कोहरे की परवाह किए बिना सुबह तड़के ही मंदिरों के बाहर जमा हो गए. यही वजह रही कि साल के पहले दिन भगवान के दर्शन पाकर हर कोई बस यही दुआ मांग रहा था कि उनका पूरा साल सुख-शांति और तरक्की के साथ बीते. .
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ठंड पर भारी पड़ी भोले की भक्ति
नए साल की पहली सुबह बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद के साथ शुरू हुई. काशी विश्वनाथ के दरबार में तड़के सुबह से ही लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी. भीषण ठंड और कोहरा भी भक्तों के कदम नहीं रोक पाया. इतना ही नहीं, पूरा मंदिर और आसपास का इलाका 'हर-हर महादेव' के नारों से गूंज उठा. भक्तों का कहना था कि भोलेनाथ का आशीर्वाद साथ हो तो ठंड का पता ही नहीं चलता. यही कारण है कि साल के पहले दिन बाबा के दर्शन करके श्रद्धालु खुद को बहुत भाग्यशाली मान रहे थे.
ठीक ऐसी ही तस्वीर उज्जैन के बाबा महाकाल के दरबार में भी देखने को मिली, जहां हजारों लोग तड़के भस्म आरती और भगवान के दर्शन के लिए पहुंचे. लोगों का मानना था कि नए साल की शुरुआत अगर महाकाल के दर्शन से हो, तो पूरा परिवार साल भर स्वस्थ और खुश रहता है. यही वजह है कि मंदिर के बाहर मीलों लंबी लाइनों के बावजूद भक्तों के चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि एक अलग ही चमक नजर आ रही थी.
राम नगरी में उमड़ा 'राम' नाम का सैलाब
नए साल के पहले दिन रामनगरी अयोध्या पूरी तरह श्रद्धालुओं से गुलजार दिखी. सरयू घाट से लेकर अयोध्या के मुख्य मंदिरों तक हर तरफ सिर्फ और सिर्फ भक्तों का हुजूम नजर आ रहा था. खास बात यह रही कि हनुमानगढ़ी में श्रद्धालुओं की इतनी भारी भीड़ उमड़ी कि करीब 1 किलोमीटर लंबी लाइन लग गई. चारों तरफ बस आस्था का सैलाब ही सैलाब नजर आ रहा था. श्रद्धालुओं की भारी संख्या और उनके उत्साह को देखते हुए प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया और राम मंदिर के पट सुबह तय समय से एक घंटे पहले यानी 6:00 बजे ही खोल दिए गए. यही नहीं, कड़ाके की ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू नदी में पवित्र स्नान कर रहे हैं और फिर रामलला के दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं. अयोध्या की गलियों में गूंजते 'जय श्री राम' के नारों ने नए साल के पहले दिन को बेहद मंगलमयी बना दिया है.
शक्तिपीठों में उमड़ी भक्तों की भीड़
माता रानी की भक्ति के बिना नए साल का स्वागत भला कैसे पूरा हो सकता था? माता वैष्णो देवी के दरबार कटरा में तो भक्तों की इतनी भीड़ उमड़ी कि 31 दिसंबर की रात को यात्रा का पर्चा (रजिस्ट्रेशन) ही बंद करना पड़ा क्योंकि आंकड़ा 45 हजार के पार चला गया था. हालांकि, सुबह 5 बजे जैसे ही खिड़कियां खुलीं, भक्त फिर से 'जय माता दी' बोलते हुए ऊपर भवन की ओर निकल पड़े. इस पर सुबह हुई हल्की बूंदाबांदी ने तो जैसे मौसम में चार चांद लगा दिए और श्रद्धालुओं ने इस सुहावनी बारिश का मजा लेते हुए मां के दर्शन किए.
इसके साथ ही, मिर्जापुर के विंध्याचल धाम में भी आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां मां विंध्यवासिनी का आशीर्वाद लेने के लिए रात से ही भक्तों की लंबी-लंबी लाइनें लगनी शुरू हो गई थीं. देश के कोने-कोने से लोग यहां सिर्फ इसलिए पहुंचे थे ताकि उनके नए साल की शुरुआत माता के दर्शन के साथ हो सके. ठीक यही नजारा मैहर की मां शारदा मंदिर में भी दिखा, जहां त्रिकूट पर्वत पर सुबह से ही भक्तों का भारी जमावड़ा लगा रहा. यही नहीं, सासाराम के मशहूर मां ताराचंडी मंदिर में भी हजारों श्रद्धालु सुबह-तड़के ही माथा टेकने पहुंच गए. सच तो यह है कि इन सभी भक्तों के दिल में बस एक ही अटूट इच्छा थी कि साल का पहला दिन 'जगज्जननी' मां की गोद में बीते, ताकि उनका पूरा साल माता रानी की कृपा और साये में खुशी-खुशी गुजरे.
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भक्ति और शांति का संदेश
एक ओर जहां पूरी दुनिया नए साल के जश्न में डूबी थी, वहीं अमृतसर के सच्चखंड श्री हरमंदिर साहिब में भक्ति का एक अलग ही रूप देखने को मिला. यहां देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने गुरु दरबार में नतमस्तक होकर पूरे विश्व की सुख-शांति के लिए अरदास की. गुरुद्वारे के पवित्र माहौल में जो सुकून और शांति महसूस हो रही थी, वह हर किसी के दिल को छू लेने वाली थी. यही वजह रही कि यहां आने वाला हर श्रद्धालु भक्ति के रंग में रंगा नजर आया और साल की शुरुआत गुरु के चरणों में सुकून के साथ की.
दूसरी ओर, बागेश्वर धाम में नए साल का स्वागत सबसे अनोखे और यादगार अंदाज में हुआ. यहां देशभर के कोने-कोने से पहुंचे हजारों भक्तों ने बागेश्वर बाबा पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के साथ मिलकर सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया. अद्भुत नजारा तो तब दिखा जब रात के ठीक 12 बजे, पूरी दुनिया पटाखों के शोर में डूबी थी, तब यहां सब एक साथ हाथ जोड़कर भक्ति में लीन नजर आए. सामूहिक हनुमान चालीसा की वह गूंज इतनी शक्तिशाली थी कि उसने पूरे धाम के माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया.
इतना ही नहीं, शिरडी के साईं बाबा मंदिर में भी जैसे ही घड़ी ने रात के 12 बजाए, पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा. हजारों श्रद्धालुओं ने साईं बाबा के चरणों में शीश नवाकर नए साल का स्वागत किया और मंदिर के अंदर-बाहर भक्त ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते नजर आए.
अंत में, मुंबई की बात करें तो जुहू बीच पर रात 12 बजे जैसे ही घड़ी की सुइयां मिलीं, लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा. 'हैप्पी न्यू ईयर' के नारों और तालियों की गूंज ने बता दिया कि भारत की इस नई सुबह में जश्न भी है और भगवान के प्रति गहरी श्रद्धा भी.
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