AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस समय दुनिया का सबसे बड़ा बजवर्ड बना हुआ है. कई कंपनियां सिर्फ AI के नाम पर लोगों को जॉब से निकल रही हैं. लेकिन अब मामला उल्टा पड़ता दिख रहा है. कई बड़ी कंपनियां अब AI का भारी भरकम बिल देख कर सोचने को मजबूर हैं. पहले लगा कि AI से कम पैसे में ज्यादा काम करवा लेंगे, लेकिन AI इतना महंगा है कि बिल देख कर कंपनियों के होश फाख्ता हो जा रहे हैं.
बड़ी कंपनियां अब अपने रोजमर्रा के कामों से लेकर बड़े फैसलों तक में AI का इस्तेमाल कर रही हैं. लेकिन अब यही तकनीक कंपनियों के लिए एक बड़ा खर्च भी बनती जा रही है.
माइक्रोसॉफ्ट से उबर तक AI के बिल से परेशान
दी वर्ज की रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही मे Uber COO ने कहा है कि AI काफी महंगा है और इसे जस्टिफाई नहीं किया जा सकता है. इतना ही नहीं, माइक्रोसॉफ्ट ने हाल ही में Anthropic Claude के ज्यादातर सब्सक्रिप्शन खत्म करने का ऐलान किया है. इसकी वजह भी इसकी कॉस्ट ही बताई गई.
AXIOS की रिपोर्ट ने टेक दुनिया को चौंका दिया. रिपोर्ट के मुताबिक एक कंपनी ने सिर्फ एक महीने में करीब 500 मिलियन डॉलर यानी लगभग 4200 करोड़ रुपये एक AI टूल पर खर्च कर दिए. ये टूल कोई और नहीं, बल्कि पॉपुलर Anthropic का Claude है.
यह रकम इतनी ज्यादा थी कि कंपनी के अंदर हड़कंप मच गया. खबर यह भी सामने आई कि जब कंपनी के बड़े अधिकारी को इस खर्च का पता चला, तो वह काफी भावुक हो गए. रोते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. सोशल मीडिया पर लोग उल्टा उन्हें कोस रहे हैं. ये भी इल्जाम लगाया जा रहा है कि कंपनी ने लोगों को जॉब से निकाला और अब खुद दिवालिया होने के कगार पर है.
आखिर इतना बड़ा खर्च कैसे हो गया?
दरअसल, कंपनी ने अपने कर्मचारियों को AI इस्तेमाल करने की पूरी छूट दे दी थी. शुरुआत में यह फैसला सही लग रहा था, क्योंकि AI की मदद से काम तेजी से हो रहा था.
लेकिन कंपनी ने एक बड़ी गलती कर दी. उसने यह तय ही नहीं किया कि कौन कितना AI इस्तेमाल करेगा और कितनी सीमा तक करेगा. यानी इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं थी.
धीरे-धीरे कर्मचारियों ने बड़े पैमाने पर AI का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. किसी ने कोड लिखवाया, किसी ने बड़े दस्तावेज पढ़वाए, तो किसी ने बार-बार सवाल पूछकर काम कराया. इस तरह AI का इस्तेमाल बढ़ता गया और खर्च भी तेजी से बढ़ता चला गया.
बेहद महंगा है AI
यह समझना जरूरी है कि AI पर खर्च कैसे होता है. AI सिस्टम इस बात पर पैसे लेते हैं कि आप उनसे कितना काम करवाते हैं. अगर आप छोटा सवाल पूछते हैं, तो खर्च कम होता है. लेकिन अगर आप लंबा डेटा देते हैं, बड़ी फाइल पढ़वाते हैं या बार-बार काम करवाते हैं, तो खर्च बहुत तेजी से बढ़ता है.
AI में इंडस्ट्री लेवल पर क्रेडिट सिस्टम चलता है. उदाहरण के तौर पर गूगल या ओपन एआई कंपनियों को पैसे लेकर क्रेडिट या टोकन्स देती हैं. एक करोड़ में अगर 10 लाख क्रेडिट मिल रहा है और वो एक दिम मेें खत्म हो गया तो फिर से क्रेडिट लेना होता है. इसलिए ये पहले जितना सस्ता लग रहा था उससे कहीं ज्यादा महंगा है.
रिपोर्ट के मुताबिक Uber ने 2026 का AI बजट चार महीने में ही खत्म कर दिया. दरअसल 3.4 बिलियन डॉलर का बजट साल भर के लिए था, लेकिन इसे चार महीने में ङी खत्म कर दिया.
एक गलती ठीक कराने पर खर्च होते हैं काफी क्रेडिट्स
रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी में कई लोग ऐसे थे जो AI का इस्तेमाल लगातार कर रहे थे. खासकर वे लोग जो कोडिंग और तकनीकी काम करते हैं, उन्होंने AI का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया.
एक काम को पूरा करने के लिए AI कई बार खुद ही बार-बार काम करता है. वह पहले प्लान बनाता है, फिर काम करता है, फिर गलती ढूंढता है और फिर उसे ठीक करता है. इस पूरे चक्र में कई बार AI का इस्तेमाल होता है.
यही वजह है कि एक कर्मचारी का रोज का AI खर्च हजारों डॉलर तक पहुंच गया. अब अगर कंपनी में ऐसे सैकड़ों या हजारों लोग हों, तो कुल खर्च कितनी तेजी से बढ़ेगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.
छोटे छोटे काम के लिए भी AI
एक और बड़ी वजह यह थी कि कर्मचारियों ने छोटे-छोटे कामों के लिए भी महंगे AI सिस्टम का इस्तेमाल किया. जहां साधारण काम आसानी से हो सकता था, वहां भी बड़े और ताकतवर सिस्टम चलाए जा रहे थे. इससे खर्च और बढ़ गया.
इसके अलावा, AI अब बहुत बड़ी फाइलों और लंबे डेटा को एक साथ समझ सकता है. यह सुविधा काम को आसान बनाती है, लेकिन इसके लिए ज्यादा ताकतवर मशीनों की जरूरत होती है. इसका सीधा असर खर्च पर पड़ता है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कंपनी ने अपने AI इस्तेमाल पर नजर रखने का सही सिस्टम नहीं बनाया था. यानी यह पता ही नहीं चल रहा था कि कौन कितना खर्च कर रहा है. अगर शुरुआत में ही इस पर ध्यान दिया जाता, तो इतना बड़ा नुकसान रोका जा सकता था.
इस घटना के बाद अब दूसरी कंपनियां सतर्क हो गई हैं. अब वे अपने कर्मचारियों के लिए AI इस्तेमाल की सीमा तय कर रही हैं. कई कंपनियां यह तय कर रही हैं कि कौन-सा काम AI से करवाना है और कौन-सा नहीं. कुछ कंपनियां सस्ते विकल्प भी ढूंढ रही हैं ताकि खर्च कम किया जा सके.
मुन्ज़िर अहमद