फ्रांस के सुपरस्टार कीलियन एम्बाप्पे ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में मोरक्को के खिलाफ गोल दागकर एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया है, जिसने फुटबॉल जगत में नई बहस छेड़ दी है. अब उनके नाम वर्ल्ड कप के सिर्फ 20 मैचों में 20 गोल हो चुके हैं. यानी दुनिया के सबसे बड़े मंच पर हर मैच में औसतन एक गोल.
इस रिकॉर्ड की सबसे बड़ी अहमियत लियोनेल मेसी के आंकड़ों से समझी जा सकती है. अर्जेंटीना के दिग्गज मेसी ने वर्ल्ड कप के 31 मैचों में 21 गोल किए हैं. यानी एम्बाप्पे उनसे सिर्फ एक गोल पीछे हैं, लेकिन इसके लिए उन्होंने 11 मैच कम खेले हैं. यही वजह है कि अब सवाल उठने लगा है कि क्या फुटबॉल इतिहास का सबसे महान गोलस्कोरर बनने की दौड़ में एम्बाप्पे सबसे आगे निकल चुके हैं.
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि ब्राजील के महान स्ट्राइकर रोनाल्डो नजारियो ने 19 मैचों में 15 गोल किए थे, जबकि जर्मनी के मिरोस्लाव क्लोजे ने 24 मुकाबलों में 16 गोल दागे थे. फ्रांस के जस्ट फोंटेन और हंगरी के सांडोर कोचिस का गोल औसत भले बेहतर रहा, लेकिन वह सिर्फ एक-एक वर्ल्ड कप तक सीमित था. एम्बाप्पे ने यह निरंतरता तीन अलग-अलग वर्ल्ड कप (2018, 2022 और 2026) में दिखाई है.
वर्ल्ड कप के बड़े मैच, बड़ा खिलाड़ी
महान गोलस्कोरर सिर्फ गोलों की संख्या से नहीं बनता, बल्कि यह भी मायने रखता है कि गोल कब और किस मंच पर किए गए. एम्बाप्पे ने 2018 वर्ल्ड कप फाइनल में गोल किया, 2022 के फाइनल में अर्जेंटीना के खिलाफ हैट्रिक जमाई और अब 2026 में भी नॉकआउट मुकाबलों में फ्रांस की सबसे बड़ी उम्मीद बने हुए हैं.
सिर्फ 27 साल की उम्र में उन्होंने वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसके लिए कई दिग्गजों को पूरा करियर लग गया. उनके पास अभी कम से कम एक और वर्ल्ड कप खेलने का मौका है. अगर फिटनेस ने साथ दिया तो वह दो और संस्करण भी खेल सकते हैं. ऐसे में उनका रिकॉर्ड इतिहास की पहुंच से भी बाहर जा सकता है.
क्लब फुटबॉल में भी जलवा
एम्बाप्पे की चमक सिर्फ वर्ल्ड कप तक सीमित नहीं है. उन्होंने चैम्पियंस लीग के 98 मैचों में 70 गोल किए हैं और 2025-26 सीजन में 15 गोल के साथ टूर्नामेंट के टॉप स्कोरर भी रहे. खास बात यह है कि वह सिर्फ पेनाल्टी बॉक्स में इंतजार करने वाले स्ट्राइकर नहीं हैं. बाएं विंग से दौड़ लगाना, ड्रिब्लिंग के दम पर मौका बनाना और मुश्किल कोण से गोल करना उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है.
लेकिन रास्ते में एक बड़ी चुनौती... एरलिंग हालांड
एम्बाप्पे की दावेदारी के बीच नॉर्वे के एरलिंग हालैंड भी इस बहस का अहम हिस्सा हैं. हालैंड ने चैम्पियंस लीग के 58 मैचों में 57 गोल किए हैं और अपने पहले ही वर्ल्ड कप के 4 मैचों में 7 गोल दाग दिए हैं.
हालैंड पारंपरिक नंबर-9 स्ट्राइकर हैं, जिनकी सबसे बड़ी ताकत फिनिशिंग है. दूसरी ओर एम्बाप्पे कहीं ज्यादा बहुमुखी खिलाड़ी हैं. वह विंग से हमला करते हैं, काउंटर अटैक में दौड़ते हैं, खुद मौके बनाते हैं और मुश्किल कोण से भी गोल निकाल लेते हैं.
यही वजह है कि अगर बात सिर्फ गोल करने की दक्षता की हो तो हालैंड आगे निकल सकते हैं, लेकिन बड़े मुकाबलों, विविधता और अंतरराष्ट्रीय दबदबे के मामले में एम्बाप्पे फिलहाल सबसे मजबूत दावेदार नजर आते हैं.
क्या आधुनिक फुटबॉल ने गोल करना आसान बना दिया?
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि आज की फुटबॉल में डेटा एनालिटिक्स, बेहतर रणनीति, फिटनेस, रिकवरी और हाई डिफेंसिव लाइन के कारण स्ट्राइकरों को पहले से ज्यादा मौके मिलते हैं. वर्ल्ड कप में अब फाइनल तक पहुंचने वाली टीम को पहले की तुलना में एक मैच ज्यादा खेलने का अवसर भी मिलता है.
लेकिन पूरी कहानी सिर्फ इतनी नहीं है. आज के डिफेंडर पहले से कहीं ज्यादा तेज, संगठित और तकनीकी रूप से मजबूत हैं. हर खिलाड़ी के खेल का बारीकी से विश्लेषण किया जाता है. ऐसे माहौल में भी सैकड़ों स्ट्राइकर खेल रहे हैं, लेकिन एम्बाप्पे और हालैंड जैसे आंकड़े कोई नहीं बना पा रहा. यही उनकी महानता की सबसे बड़ी पहचान है.
फैसला अभी बाकी है...
यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि एम्बाप्पे ने लियोनेल मेसी, क्रिस्टियानो रोनाल्डो, पेले, गर्ड मुलर या रोनाल्डो नजारियो जैसे महान खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है. इन दिग्गजों ने करीब डेढ़ दशक तक लगातार शीर्ष स्तर पर अपना दबदबा कायम रखा.
लेकिन एक बात तय है- वर्ल्ड कप इतिहास में एम्बाप्पे ने जिस रफ्तार से अपनी विरासत बनाई है, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया. 20 वर्ल्ड कप मैचों में 20 गोल... यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि फुटबॉल इतिहास के सबसे महान गोलस्कोरर बनने की बहस में एम्बाप्पे अब सबसे मजबूत दावेदार बन चुके है. अगर उनकी यही रफ्तार जारी रही, तो अगले वर्ल्ड कप में मेसी के 21 गोल का आंकड़ा भी पीछे छूट सकता है. तब शायद इस बहस का जवाब भी दुनिया को मिल जाएगा.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क