फुटबॉल कभी-कभी सिर्फ खेल नहीं रहता, वह देशों की उम्मीदों, संघर्षों और इतिहास का आईना बन जाता है. FIFA World Cup 2026 में ईरान की टीम की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. महीनों तक राजनीतिक तनाव, सुरक्षा चिंताओं और अनिश्चितताओं से जूझने के बाद आखिरकार 'टीम मेली' अमेरिका पहुंच चुकी है. लेकिन यह सिर्फ एक टीम का आगमन नहीं था, बल्कि उस देश की उम्मीदों का आगमन था, जिसने पिछले कुछ समय में युद्ध और कूटनीतिक संकटों की भारी कीमत चुकाई है.
रविवार 15 जून को ईरान की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम लॉस एंजेलिस पहुंची. दिलचस्प बात यह रही कि टीम के अमेरिका पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते की घोषणा कर दी गई. ऐसे में फुटबॉल और राजनीति की दो समानांतर कहानियां अचानक एक ही मंच पर आ खड़ी हुईं.
मेक्सिको बना था ईरान का अस्थायी घर
विश्व कप की तैयारियों के लिए ईरान ने शुरुआत में अमेरिका के एरिजोना में बेस कैंप बनाने की योजना बनाई थी. लेकिन अमेरिका-ईरान संबंधों में बढ़े तनाव और सैन्य घटनाओं के बाद हालात बदल गए. टीम को अपना पूरा कार्यक्रम बदलना पड़ा और उसने पड़ोसी देश मेक्सिको को अपना ठिकाना बनाया.
टिजुआना में कई सप्ताह बिताने के बाद टीम एक छोटी उड़ान के जरिए लॉस एंजेलिस पहुंची. खिलाड़ियों के लिए यह केवल यात्रा नहीं थी, बल्कि महीनों से चली आ रही अनिश्चितताओं का अंत भी था.
होटल के बाहर कड़ी सुरक्षा, सड़कों पर प्रदर्शन
ईरानी टीम के अमेरिका पहुंचते ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में दिखाई दीं. टीम होटल के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया, कई सड़कों को बंद कर दिया गया और अतिरिक्त बैरिकेडिंग लगाई गई.
दूसरी ओर, लॉस एंजेलिस स्टेडियम के आसपास ईरान सरकार के विरोध में प्रदर्शन भी देखने को मिले. प्रदर्शनकारियों ने लोकतांत्रिक सुधारों की मांग की और हालिया अशांति में मारे गए या गिरफ्तार किए गए लोगों की तस्वीरें लहराईं.
हालांकि विरोध के बीच समर्थन की तस्वीरें भी कम भावुक नहीं थीं.
'ईरान, तुम कभी अकेले नहीं चलोगे'
जब टीम टिजुआना छोड़ रही थी, तब सैकड़ों प्रशंसक होटल के बाहर जमा हो गए, हाथों में ईरानी झंडे थे, चेहरों पर उम्मीद थी और गूंज रहा था समर्थन का स्वर. एक बैनर पर लिखा था- 'Iran, you will never walk alone. Mexico stands with you.'
यह संदेश सिर्फ फुटबॉल टीम के लिए नहीं था, बल्कि उन लाखों ईरानियों के लिए भी था जो चाहते हैं कि दुनिया उन्हें केवल राजनीतिक विवादों के जरिए नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा और खेल भावना के जरिए भी पहचाने.
शांति समझौते ने बदला माहौल
टीम के अमेरिका पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर इसी सप्ताह स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे.
विश्व कप की तैयारी के दौरान लगातार नकारात्मक खबरों से घिरे ईरान के लिए यह एक दुर्लभ सकारात्मक क्षण था. खिलाड़ियों और प्रशंसकों दोनों को लगा कि शायद अब चर्चा युद्ध या कूटनीति की नहीं, बल्कि फुटबॉल की होगी.
... अब बारी मैदान की
ईरान अपने अभियान की शुरुआत ग्रुप-जी में न्यूजीलैंड के खिलाफ करेगा. मुकाबला लॉस एंजेलिस में 16 जून को भारतीय समयानुसार सुबह 6.30 बजे से खेला जाएगा और टीम मैच से 24 घंटे पहले ही अमेरिका पहुंची है.
कोच अमीर घालेनोई और स्टार स्ट्राइकर मेहदी तारेमी पर बड़ी जिम्मेदारी होगी. उनके सामने केवल तीन अंक जीतने की चुनौती नहीं है, बल्कि यह साबित करने की भी चुनौती है कि तमाम राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद फुटबॉल लोगों को जोड़ने की ताकत रखता है.
फुटबॉल से बड़ी कहानी
2026 विश्व कप में ईरान की यात्रा पहले ही इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुकी है. यह कहानी सिर्फ गोल, जीत और हार की नहीं है। यह कहानी है संघर्ष की, उम्मीद की और उस विश्वास की कि कभी-कभी एक फुटबॉल मैच भी देशों के बीच पुल का काम कर सकता है.
अब जब टीम मेली मैदान पर उतरने जा रही है, तो करोड़ों आंखें केवल स्कोरबोर्ड पर नहीं होंगी, वे यह भी देखेंगी कि क्या फुटबॉल सचमुच राजनीति की दीवारों को कुछ देर के लिए ही सही, गिरा सकता है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क