'जब तक टेस्ट नहीं खेलेगा, क्या बड़ा क्रिकेटर...', चैम्पियन बनने के बाद वैभव सूर्यवंशी को पिता का साफ संदेश

वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम के लिए जबरदस्त प्रदर्शन किया. खिताबी मुकाबले में वैभव की तूफानी बल्लेबाजी ने अंग्रेजों के होश उड़ा दिए. वैभव की उपलब्धियों से पिता संजीव सूर्यवंशी उत्साहित तो हैं, लेकिन उन्होंने अपने बेट के लिए बड़ा लक्ष्य सेट कर दिया है.

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वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ खेली यादगार पारी. (Photo: Instagram/Vaibhav Sooryavanshi) वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ खेली यादगार पारी. (Photo: Instagram/Vaibhav Sooryavanshi)

aajtak.in

  • समस्तीपुर,
  • 07 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:51 PM IST

भारतीय टीम ने इंग्लैंड को 100 रनों से हराकर आईसीसी मेन्स अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 जीत लिया. भारत ने रिकॉर्ड छठी बार अंडर-19 वर्ल्ड कप अपने नाम किया है. भारतीय टीम की जीत के हीरो वैभव सू्र्यवंशी रहे. जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे के हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए फाइनल में वैभव ने सिर्फ 80 गेंदों पर 175 रन बनाए, जिसमें 15 छक्के और 15 चौके शामिल रहे. उन्होंने शुरुआती 24 गेंदों में सिर्फ 24 रन बनाए, लेकिन उसके बाद महज 56 गेंदों में 151 रन ठोक दिए.

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वैभव को 'प्लेयर ऑफ द मैच' और 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' चुना गया. अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने के बाद वैभव ने सबसे पहले अपने पिता संजीव सूर्यवंशी को फोन किया और कहा, 'पापा प्रणाम.' यह वही बिहारी अंदाज था जिसने लोगों का दिल जीत लिया. भावुक पिता संजीव सूर्यवंशी ने बताया कि बेटे की आवाज सुनते ही उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े.

संजीव सूर्यवंशी ने TOI से कहा, 'जब वैभव ने फोन किया तो वो टीम के साथ खुशी से झूम रहा था.  मैंने उससे कहा कि अभी जश्न मनाओ, बाद में बात करेंगे. यह पल बहुत खास है क्योंकि अब वो अंडर-19 में नहीं खेलेगा.'

अभी तो शुरुआत है: संजीव सूर्यवंशी
वैभव सूर्यवंशी की सफलता पर खुश होने के बावजूद उनके पिता की सोच बेहद साफ है. वे कहते हैं, 'अभी तो शुरुआत है, उसे बहुत आगे जाना है, जब तक वो टेस्ट क्रिकेट नहीं खेले, क्या बड़ा क्रिकेटर.' पटना में वैभव के कोच मनीष ओझा का फोन लगातार बज रहा है. लोग बधाई देने के साथ अजीब मांग भी कर रहे हैं, "सर, मेरा बेटा दो साल का है, उसे वैभव जैसा बना दीजिए.'

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मनीष ओझा कहते हैं, 'बिहार में खेल की एक नई क्रांति आ गई है. अब लोग बच्चों को खेल में भेजना चाहते हैं. पहले कहावत थी कि 'पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब', लेकिन वैभव ने यह सोच बदल दी है." कोच के मुताबिक वैभव की सोच बाकी खिलाड़ियों से अलग है.

मनीष ओझा ने कहा, 'वह सिंगल-डबल लेने वाला खिलाड़ी नहीं है. उसका विश्वास सिर्फ एक चीज में है कि जीत हासिल किया जाए.' अफगानिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में वैभव ने 33 गेंदों में 68 रन बनाकर भारत को 311 रन का लक्ष्य हासिल करने में मदद की. इसके बाद उन्होंने पहली बार टूर्नामेंट के दौरान पिता को फोन किया.

यह भी पढ़ें: वैभव सूर्यवंशी को अभी चाह कर भी टीम इंडिया में मौका नहीं दे सकती BCCI, जान लें ICC का ये नियम

संजीव सूर्यवंशी बताते हैं, 'वह तब तक बात नहीं करता जब तक बड़ा स्कोर ना बना ले. उसने कहा कि शुरुआत तो मिल रही है, लेकिन शतक नहीं बन पा रहा. मैंने उसे समझाया कि उसकी तेज शुरुआत टीम के लिए फायदेमंद है और उसी अंदाज में खेलते रहो.'

14 साल के वैभव सूर्यवंशी पहले ही कई रिकॉर्ड बना चुके हैं. इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में पहली ही गेंद पर छक्का लगाकर चर्चा में आए. राजस्थान रॉयल्स (RR) के लिए 35 गेंदों में शतक जड़ा. इंग्लैंड के खिलाफ 52 गेंदों में सेंचुरी ठोकी. फिर एशिया कप राइजिंग स्टार्स के दौरान 32 गेंदों में शतक जड़कर सुर्खियां बटोरीं.

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अंडर-19 वर्ल्ड कप के बाद कई विशेषज्ञ मान रहे हैं कि वैभव सूर्यवंशी जल्द ही टीम इंडिया के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल सकते हैं. हालांकि उनके पिता की सलाह बेहद सीधी है, 'जमीन से जुड़े रहो, मेहनत करते रहो और अपने स्वभाव के अनुसार गेम खेलो.'

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