वर्ल्ड चैम्पियन का ऐसा बुरा हाल! नए कप्तान तो सिर्फ टॉस जीत रहे, गौतम गंभीर की कोचिंग भी सवालों के घेरे में

गौतम गंभीर के अंडर भारतीय टीम का अपने घर पर न्यजीलैंड और साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में सूपड़ा साफ हुआ था. अब टेस्ट के बाद टी20 क्रिकेट में भी भारतीय टीम अचानक पटरी से उतर गई है. यूरोप दौरे पर टीम इंडिया ने आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ बेहद शर्मनाक प्रदर्शन किया.

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भारतीय टीम की इंग्लैंड में हुई दुर्गति, सीरीज 0-4 से गंवाई. (Photo: BCCI) भारतीय टीम की इंग्लैंड में हुई दुर्गति, सीरीज 0-4 से गंवाई. (Photo: BCCI)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • साउथम्प्टन,
  • 12 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 10:18 AM IST

गौतम गंभीर की कोचिंग में टीम इंडिया ने टेस्ट के बाद टी20 क्रिकेट में भी ऐसा दिन देख लिया, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी. इंग्लैंड ने पांच मैचों की टी20 सीरीज 4-0 से जीतकर सनसनी मचा दी. इस सीरीज एक मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ा था, अन्यथा स्कोर 5-0 भी हो सकता था. इंग्लैंड से पहले आयरलैंड दौरे पर टीम इंडिया का 0-2 से सूपड़ा साफ हुआ था. भारतीय टीम ने यूरोप दौरे पर जो सात टी20I मुकाबले खेले, उन सभी में कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीते. मगर नए कप्तान के अंडर टीम इंडिया एक भी मैच नहीं जीत पाई.

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टीम इंडिया के लिए यह हार सिर्फ एक ट्रॉफी गंवाने तक सीमित नहीं रही. इंग्लैंड ने भारत से टी20 क्रिकेट की बादशाहत भी छीन ली. 1605 दिनों यानी करीब साढ़े चार साल बाद टीम इंडिया आईसीसी की टी20 रैंकिंग में नंबर-1 की कुर्सी से नीचे उतरी है. सीरीज शुरू होने से पहले भारत दुनिया की नंबर-1 टीम थी, लेकिन लगातार हार ने तस्वीर पूरी तरह बदल दी. इंग्लैंड ने आखिरी मैच जीतकर शीर्ष स्थान पर कब्जा जमा लिया.

शनिवार (11 जुलाई) को साउथम्प्टन में खेले गए आखिरी टी20I ने भारतीय टीम की मुश्किलों को पूरी तरह उजागर कर दिया. सीरीज के शुरुआती मुकाबलों में बल्लेबाजों को हार का सबसे बड़ा जिम्मेदार माना गया था. भारतीय पिचों और आईपीएल में गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने वाले बल्लेबाज इंग्लैंड की उछाल भरी परिस्थितियों में रन बनाने के लिए जूझते रहे. आखिरी मुकाबले में बल्लेबाजों से पहले गेंदबाजों और फील्डरों ने टीम की मुश्किलें बढ़ा दीं.

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बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग... सब फेल
जोस बटलर और हैरी ब्रूक ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को तहस-नहस कर दिया. दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 233 रनों की साझेदारी कर टीम इंडिया को मैच से बाहर कर दिया. भारतीय गेंदबाजों के पास इस जोड़ी को रोकने की कोई योजना नजर नहीं आई. जो कसर गेंदबाजी ने छोड़ी, उसे खराब फील्डिंग ने पूरा कर दिया. कैच छूटे और मैदान पर ऐसी गलतियां हुईं, जिनकी दुनिया की नंबर-1 टीम से शायद ही उम्मीद की जा सकती थी.

आखिरी मुकाबला डेड रबर जरूर था, लेकिन इंग्लैंड के लिए दांव पर बहुत कुछ लगा था. मेजबान टीम सिर्फ भारत को 4-0 से हराना नहीं चाहती थी, बल्कि उसकी नजर आईसीसी टी20 रैंकिंग में नंबर-1 की कुर्सी पर भी थी. इंग्लैंड ने दोनों लक्ष्य हासिल किए और लगातार दो टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम की बादशाहत खत्म कर दी.

गलतियों से सबक लेना जरूरी
अब सबसे बड़ा सवाल गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट पर उठ रहा है. इंग्लैंड से पहले आयरलैंड ने भारत को 2-0 से हराया था. भारतीय क्रिकेट के इतिहास में यह अपने आप में बड़ा झटका था. उम्मीद थी कि आयरलैंड से मिली हार के बाद टीम अपनी गलतियों से सबक लेगी, लेकिन इंग्लैंड में कहानी और खराब हो गई.
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आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब जीतने के बावजूद सूर्यकुमार यादव को कप्तानी से हटाना भारतीय क्रिकेट का बड़ा फैसला था. खराब बल्लेबाजी फॉर्म के कारण उनकी जगह श्रेयस अय्यर को कमान सौंपी गई. आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) में श्रेयस की कप्तानी और बल्ले से प्रदर्शन को देखते हुए चयनकर्ताओं ने उन पर भरोसा जताया था.

यूरोप दौरे पर श्रेयस अय्यर को ऐसी टीम भी मिली, जिसमें युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का अच्छा मिश्रण था. जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या जैसे बड़े नाम जरूर मौजूद नहीं थे, लेकिन आईपीएल और इंटरनेशनल क्रिकेट में खुद को साबित कर चुके कई खिलाड़ी टीम में शामिल थे. इसके बावजूद गौतम गंभीर और श्रेयस की नई जोड़ी का पहला असाइनमेंट किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा.

ट्रांजिशन का बहाना कब तक चलेगा?
आयरलैंड के खिलाफ 0-2 और इंग्लैंड के खिलाफ 0-4 की हार ने भारतीय टी20 टीम की असली तस्वीर सामने रख दी है. गौतम गंभीर इस खराब प्रदर्शन को बदलाव के दौर यानी 'ट्रांजिशन' से जोड़ सकते हैं, लेकिन लगातार मिल रही हार को सिर्फ इसी तर्क के पीछे नहीं छिपाया जा सकता.

इंग्लैंड दौरे ने एक और बड़ी कमजोरी उजागर की है. भारतीय बल्लेबाज घरेलू पिचों और आईपीएल में जिस आक्रामक अंदाज से खेलते हैं, विदेशी परिस्थितियों में वही रणनीति कारगर साबित नहीं हुई. उछाल और मूवमेंट के सामने बल्लेबाजों की तकनीक और परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढालने की क्षमता सवालों के घेरे में आ गई.

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आईपीएल का 'इम्पैक्ट प्लेयर' रूल बल्लेबाजों को अतिरिक्त आजादी देता है, लेकिन इंटरनेशनल क्रिकेट में कोई सुरक्षा कवच नहीं होता. यहां बल्लेबाजों को अलग-अलग परिस्थितियों, मजबूत गेंदबाजी आक्रमण और मैच के दबाव से खुद निपटना पड़ता है. इंग्लैंड में भारतीय टीम इस परीक्षा में पूरी तरह नाकाम रही.

गौतम गंभीर कब तक बचेंगे?
वो गौतम गंभीर ही हैं, जिनकी कोचिंग में भारतीय टीमke  साल 2024 में न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में 0-3 से सूपड़ा साफ हुआ था. फिर पिछले साल साउथ अफ्रीका ने भारत को उसके घर में 2-0 से टेस्ट सीरीज में पराजित कर दिया. यानी भारतीय टीम को गौतम गंभीर के अंडर टेस्ट क्रिकेट में दो बार क्लीन स्वीप की शर्मिंदगी झेलनी पड़ी. अब टी20 क्रिकेट में भी टीम इंडिया को बुरे दिन देखने पड़ रहे हैं, ऐसे में हेड कोच पर सवाल उठने लाजिमी हैं.

लगातार दो टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद टीम इंडिया को दुनिया की सबसे मजबूत टीम माना जा रहा था. टैलेंट के स्तर पर भारतीय टीम अब भी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम्स में शामिल हो सकती है, लेकिन मैदान पर प्रदर्शन ही असली पैमाना है. आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ लगातार छह हार ने टीम इंडिया के दबदबे की तस्वीर को धुंधला कर दिया है.

अब सवाल सिर्फ एक सीरीज हारने का नहीं है. सवाल यह है कि क्या टीम इंडिया वास्तव में बदलाव के दौर से गुजर रही है या लगातार मिल रही हार के पीछे कहीं ज्यादा बड़ी समस्याएं छिपी हैं? गौतम गंभीर और श्रेयस अय्यर के सामने अब सिर्फ टीम को जीत की राह पर लौटाने की चुनौती नहीं है, बल्कि उस भरोसे को वापस हासिल करने की भी जिम्मेदारी है, जो पिछले कुछ हफ्तों में बुरी तरह हिल गया है.

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