उत्तर प्रदेश में एक बार फिर प्रतीकों की राजनीति ने जोर पकड़ा है जहां परंपरा और तुष्टिकरण के बीच टकराव दिखाई दे रहा है. यह टकराव सत्ता की सीढ़ियों पर संघर्ष की स्थिति को और भी जटिल बना रहा है.