घर में रखे अनाज और खाद्य पदार्थ केवल भोजन का साधन नहीं होते, बल्कि उनका संबंध परिवार की उन्नति से भी जुड़ा होता है. वास्तु शास्त्र में खाने की चीजों के रख-रखाव को लेकर कुछ विशेष दिशाओं का उल्लेख किया गया है. मान्यता है कि यदि चावल, आटा, दाल, चीनी, तेल और अन्य सूखे खाद्य पदार्थ सही दिशा में रखे जाएं तो घर में सकारात्मकता बनी रहती है. जबकि गलत दिशा में रखी खाने की चीजें कई तरह की समस्याओं का कारण बन सकती है.
खाद्य पदार्थों रखने की दिशा क्या है?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में सूखे खाद्य पदार्थों का भंडारण दक्षिण-पूर्व दिशा यानी आग्नेय कोण में करना सबसे उपयुक्त माना गया है. यह दिशा अग्नि तत्व से संबंधित मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिशा में रखे गए खाद्य पदार्थ सुरक्षित रहते हैं और उनमें नमी या खराबी की संभावना कम होती है. यदि घर में अलग स्टोर रूम उपलब्ध नहीं है तो रसोईघर के दक्षिण या दक्षिण-पूर्व हिस्से में आटा, चावल, दाल, चीनी और अन्य राशन सामग्री रखने की सलाह दी जाती है.
उत्तर-पूर्व दिशा में क्यों न रखें खाने की चीजें?
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में खाद्य पदार्थों का भंडारण शुभ नहीं माना जाता है. कहा जाता है कि इस दिशा में अनाज रखने से घर में आर्थिक असंतुलन बढ़ सकता है और खाने-पीने से जुड़ी परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं. मान्यता यह भी है कि ऐसे घरों में खर्च बढ़ने की संभावना रहती है और परिवार के सदस्यों को स्थिरता बनाए रखने में कठिनाई महसूस हो सकती है.
इन दिशाओं में भी बरतें सावधानी
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर या उत्तर-पूर्व या उत्तर-पश्चिम दिशा में सूखे खाद्य पदार्थ लंबे समय तक रखने से उनमें नमी या कीड़े लगने की संभावना ज्यादा होती है. विशेष रूप से बरसात के मौसम में यह समस्या अधिक देखने को मिल सकती है. इसी कारण अनाज, बिस्किट, नमकीन, दालें और अन्य सूखी सामग्री को अपेक्षाकृत गर्म और शुष्क दिशा में रखने की सलाह दी जाती है.
दक्षिण-पश्चिम दिशा भी नहीं शुभ
वास्तु के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम दिशा में खाद्य पदार्थों का भंडारण भी बहुत लाभकारी नहीं माना जाता है. कहा जाता है कि यहां पर्याप्त प्रकाश और ऊर्जा का अभाव रहने से खाद्य सामग्री की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. इसलिए यदि संभव हो तो राशन और सूखे खाद्य पदार्थों के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है.
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