महंगाई के इस दौर में 2BHK फ्लैट या घर मिडिल क्लास फैमिली की पहली पसंद बनते जा रहे हैं. घर खरीदते समय लोग लोकेशन, बजट और सुविधाओं के साथ-साथ वास्तु का भी बड़ा ख्याल रखते हैं. माना जाता है कि यदि घर का नक्शा और कमरों की दिशा वास्तु के अनुरूप हो तो परिवार में खुशियां बनी रहती है. ऐसे घर को कभी किसी की बुरी नजर नहीं लगती है. दुख-दरिद्रता चौखट से कोसों दूर रहती है. आइए जानते हैं कि एक 2 BHK फ्लैट या घर में वास्तु की किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है.
मेन गेट
वास्तु शास्त्र के अनुसार, 2BHK फ्लैट का मुख्य प्रवेश द्वार अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. यह द्वार अगर पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ हो तो अच्छा होता है. मान्यता है कि इन दिशाओं से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है, जिससे परिवार के सदस्यों के रिश्तों और कार्यक्षेत्र पर अच्छा प्रभाव पड़ता है. इसलिए घर चुनते समय मुख्य द्वार की दिशा अवश्य देखनी चाहिए.
लिविंग रूम
लिविंग रूम या बैठक घर का वह स्थान होता है जहां परिवार और मेहमान सबसे अधिक समय बिताते हैं. वास्तु के अनुसार, 2BHK फ्लैट का लिविंग रूम मुख्य प्रवेश के पास पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए. यदि इसी दिशा में बालकनी भी हो तो घर में सूर्य का प्राकृतिक प्रकाश और ताजी हवा का लाभ भी मिलता है. इससे वातावरण ज्यादा सकारात्मक लगने लगता है.
कहां रखें फर्नीचर?
फर्नीचर की व्यवस्था भी वास्तु में महत्वपूर्ण मानी जाती है. भारी फर्नीचर जैसे सोफा, अलमारी या अन्य बड़े सामान दक्षिण और पश्चिम दिशा की दीवारों के पास रखने की सलाह दी जाती है. साथ ही, फर्नीचर और दीवार के बीच थोड़ा स्थान छोड़ना बेहतर माना जाता है. ताकि घर में खुलापन बना रहे.
रसोई घर का स्थान
रसोई घर को अग्नि तत्व से जुड़ा माना गया है. इसलिए 2 BHK घर में रसोई के लिए पूर्व दिशा को उपयुक्त माना गया है. रसोई के कैबिनेट और स्टोरेज यूनिट दक्षिण दिशा की दीवारों के पास बनाए जा सकते हैं. वहीं, भोजन करने की व्यवस्था पूर्व या दक्षिण दिशा में रखना बेहतर होता है.
मंदिर या पूजा कक्ष कहां बनाएं?
पूजा कक्ष घर का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा घर के लिए उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे उपयुक्त बताया गया है. माना जाता है कि इस दिशा में पूजा स्थल होने से घर में आध्यात्मिक और सकारात्मक वातावरण बना रहता है.
बड़ा कमरा या मास्टर बेडरूम
2BHK फ्लैट में मास्टर बेडरूम के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा को श्रेष्ठ माना जाता है. यह दिशा स्थिरता और संतुलन का प्रतीक मानी जाती है. विशेष रूप से परिवार के मुखिया या मुख्य कमाने वाले सदस्य के लिए यह स्थान उपयुक्त माना जाता है.
बाथरूम-टॉयलेट
बाथरूम और टॉयलेट के लिए दक्षिण या पश्चिम दिशा को उपयुक्त माना गया है. इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा कभी बाधित नहीं होगी. यहां इस बात का भी ध्यान रखें कि पूजा कक्ष और बाथरूम एक-दूसरे के बहुत निकट न हों.
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