Roti Vastu Tips: सनातन धर्म, हिंदू शास्त्रों और वास्तु शास्त्र में रोटी को घर की सुख-समृद्धि का केंद्र माना गया है. वहीं, रसोई में बनने वाली पहली रोटी और आखिरी रोटी को लेकर हमारे बुजुर्गों और शास्त्रों ने बेहद स्पष्ट नियम बनाए हैं. ऐसा माना जाता है कि इन रोटियों को सही तरीके से निकालने पर घर का वास्तु दोष दूर होता है, देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.
1. पहली रोटी: गाय (गो-ग्रास) के लिए
वास्तु और शास्त्रों के अनुसार, रसोई में जब भी तवे पर पहली रोटी बने, वह हमेशा गाय के लिए निकाली जानी चाहिए. इसे गो-ग्रास कहा जाता है. हिंदू धर्म में मान्यता है कि गाय में 33 कोटि (प्रकार) के देवी-देवता वास करते हैं. इसलिए पहली रोटी गाय को खिलाने से सभी देवी-देवताओं को भोग लग जाता है.
वास्तु व ज्योतिषीय लाभ
- पहली रोटी गाय को देने से घर का पितृ दोष दूर होता है.
- इससे कुंडली में बुध, शुक्र और गुरु ग्रह मजबूत होते हैं, जिससे घर में धन-धान्य, सुख और वैभव का आगमन होता है.
- रसोई घर में अन्नपूर्णा माता का वास हमेशा बना रहता है और कभी भी अन्न की कमी नहीं होती है.
नियम: पहली रोटी में थोड़ा सा घी और गुड़ या चीनी रखकर ही गाय को खिलाना चाहिए. सूखी या बासी रोटी पहली रोटी के रूप में गाय को न दें.
2. आखिरी रोटी: कुत्ते (श्वान) के लिए
रसोई में बनने वाली सबसे आखिरी रोटी हमेशा काले कुत्ते के लिए निकाली जानी चाहिए. दरअसल, कुत्ते को यमराज और भगवान भैरव का सेवक या वाहन माना गया है. आखिरी रोटी कुत्ते को खिलाने से भैरव बाबा प्रसन्न होते हैं और घर पर आने वाली हर तरह की बला टल जाती है.
वास्तु व ज्योतिषीय लाभ
- आखिरी रोटी कुत्ते को देने से कुंडली में शनि, राहु और केतु जैसे क्रूर ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव शांत होता है.
- यदि घर के सदस्यों पर कोई नजर दोष हो या शत्रु बाधा हो, तो वह दूर होती है.
- वास्तु शास्त्र के अनुसार, इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती और अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है.
नियम: आखिरी रोटी पर थोड़ा सा सरसों का तेल लगाकर काले या किसी भी कुत्ते को खिलाना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है.
वास्तु के अनुसार कुछ अन्य महत्वपूर्ण नियम
कभी भी खुद न खाएं पहली या आखिरी रोटी: घर के सदस्यों को कभी भी पहली और आखिरी रोटी नहीं खानी चाहिए. पहली रोटी खाने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और आखिरी रोटी खाने से आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है.
तवे को खाली न छोड़ें: रोटी बनाने के बाद तवे को कभी भी वैसे ही चूल्हे पर खाली न छोड़ें. तवे को नीचे उतार कर रखें और उसे साफ करके ही अलमारी में रखें.
अतिथि के लिए व्यवस्था: शास्त्रों में गाय और कुत्ते के अलावा एक रोटी पक्षियों या चींटियों के लिए भी निकालने का विधान है, जिसे वैश्वदेव यज्ञ का हिस्सा माना जाता है.
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