आग से जुड़ी घटनाएं छोटी हों या बड़ी उन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. वास्तु शास्त्र में अग्नि तत्व को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. मान्यता है कि अगर घर में बार-बार आग लग जाती है या शॉर्ट सर्किट होते रहते हैं या फिर बिजली के उपकरण खराब होते हैं तो घर का वास्तु दोष इसकी वजह हो सकता है. अग्नि तत्व की दिशा में असंतुलन होने की वजह से कई बार ऐसा होता है. अगर आप भी ऐसी किसी भयंकर दुर्घटना से बचना चाहते हैं तो एक तरीके से अग्नि तत्व की दिशा का वास्तु दोष से मुक्त रख सकते हैं.
अग्नि तत्व की दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की दक्षिण-पूर्व दिशा को अग्नि कोण कहा जाता है. यह दिशा अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करती है. इसे आग्नेण कोण भी कहा जाता है. इस दिशा का स्वामी शुक्र देव को माना जाता है. मान्यता है कि बिजली या अग्नि तत्व से जुड़ी सभी चीजें या उपकरण घर की इसी दिशा में रखने चाहिए. इसके विपरीत दिशाओं में ये चीजें रखने से घर में आग से जुड़ी दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ती है.
मसलन रसोई घर में गैस चूल्हा, ओवन, हीटर, इन्वर्टर, बिजली का मीटर या बिजली के अन्य उपकरण घर की इसी दिशा में रखना उत्तम माना जाता है. यहां तक कि एक छोटी सी माचिस या लाइटर भी इसी दिशा में न रखने की सलाह दी जाती है. कहते हैं कि इससे अग्नि तत्व संतुलित रहता है और अनावश्यक दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है.
किस दिशा में न रखें अग्नि तत्व से जुड़ी चीजें?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, अग्नि तत्व से जुड़ी चीजों को कुछ खास जगहों पर रखने से बचना चाहिए. उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) यानी जल तत्व की दिशा में कभी अग्नि तत्व से जुड़ी चीजें नहीं रखनी चाहिए. इसके अलावा, दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) में भी बिजली या अग्नि से जुड़े उपकरणों को रखने से बचना चाहिए.
अग्नि का सम्मान
सनातन परंपरा में अग्नि को देवतुल्य माना गया है. इसी वजह से दीपक, मोमबत्ती जैसी चीजों का कभी अनादर न करें. ध्यान रहे कि इन्हें प्रज्वलित करने के बाद कभी फूंक मारकर न बुझाएं. मान्यता है कि अग्नि का सम्मान करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
aajtak.in