Yogini Ekadashi 2026: आज योगिनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. योगिनी एकादशी की रात भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए अत्यंत दिव्य और अचूक मानी जाती है. क्योंकि वर्ष 2026 में यह एकादशी शुक्रवार के संयोग में आई है, इसलिए इस रात किए गए उपाय सुख, समृद्धि और कर्ज से मुक्ति के लिए बेहद प्रभावशाली होते हैं. यदि आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं या जीवन में खुशहाली चाहते हैं, तो योगिनी एकादशी की शाम को ये विशेष उपाय जरूर करें.
मुख्य द्वार पर दीपक और कौड़ियां
एकादशी की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं. रात के समय अपने घर के मुख्य द्वार पर गाय के घी का एक दीपक जलाएं. संभव हो तो इस दीपक में थोड़ी सी हल्दी या एक चुटकी कुमकुम डाल दें. इसके साथ ही मुख्य द्वार पर हल्दी से स्वास्तिक बनाएं. यह उपाय माता लक्ष्मी को घर की ओर आकर्षित करता है और दरिद्रता दूर करता है.
तुलसी जी के पास नौ बत्तियों का दीपक
भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है और एकादशी के दिन तुलसी पूजन का फल कई गुना बढ़ जाता है. एकादशी की रात को तुलसी के पौधे के पास गाय के घी का एक दीपक जलाएं, जिसमें 9 बत्तियां हों. दीपक जलाने के बाद तुलसी जी की 11 या 21 बार परिक्रमा करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें. ध्यान रखें कि इस दिन रात में तुलसी के पौधे को स्पर्श नहीं करना है, केवल दूर से दीपक जलाकर प्रार्थना करनी है.
लक्ष्मी-नारायण के सामने कनकधारा स्तोत्र का पाठ
यदि व्यापार में घाटा हो रहा हो या नौकरी में तरक्की रुकी हो, तो एकादशी की रात की गई पूजा इसे दूर कर सकती है. रात के समय पीले वस्त्र पहनकर श्रीहरि और मां लक्ष्मी की प्रतिमा के सामने बैठें. वहां एक शुद्ध घी का बड़ा दीपक जलाएं और कनकधारा स्तोत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. पाठ पूरा होने के बाद भगवान को मिश्री और मखाने का भोग लगाएं.
तिजोरी में रखें यह गुप्त चीज
एकादशी की रात माता लक्ष्मी के चरणों में एक पीला कपड़ा रखें. उस कपड़े पर 5 पीली कौड़ियां, 5 गोमती चक्र और एक चांदी का सिक्का रख दें. रातभर इसे भगवान के चरणों में रहने दें. अगले दिन सुबह (द्वादशी तिथि को) पारण से पहले इस कपड़े को पोटली की तरह बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें.
पीपल के वृक्ष के पास दीपदान
योगिनी एकादशी की कथा में पीपल के महत्व का वर्णन है, इसलिए इस रात पीपल की सेवा का विशेष फल है. एकादशी की शाम या रात के समय किसी पीपल के पेड़ के नीचे जाकर सरसों के तेल का एक चौमुखी दीपक जलाएं. वहां खड़े होकर अपने पितरों का ध्यान करें. उनसे सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें. इससे कुंडली के ग्रह दोष और पितृदोष शांत होते हैं.
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