Vidur Niti: आज के दौर में हर व्यक्ति अपने करियर को रॉकेट की रफ्तार देना चाहता है और बैंक बैलेंस को तेजी से बढ़ाना चाहता है. इसके लिए हम नए-नए मैनेजमेंट गुरुओं की किताबें पढ़ते हैं और मोटिवेशनल पॉडकास्ट सुनते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी जेब खाली रहने और कामयाबी न मिलने का असली कारण आपकी मेहनत में नहीं, बल्कि आपकी रोजमर्रा की कुछ छिपी हुई आदतों में है? महाभारत काल के सबसे बड़े विद्वान महात्मा विदुर ने सदियों पहले एक ऐसा सफलता का ब्लूप्रिंट तैयार किया था, जो आज के वर्क कल्चर पर भी बिल्कुल सटीक बैठता है.
विदुर नीति के अनुसार, जब तक आप अपने भीतर के छह साइलेंट किलर्स को बाहर नहीं निकालेंगे, तब तक मां लक्ष्मी और सफलता आपके दरवाजे पर दस्तक नहीं देंगी. आइए जानते हैं महात्मा विदुर के उस श्लोक और 6 नियमों के बारे में, जो आपको एक आम इंसान से बेहद कामयाब व्यक्ति बना सकते हैं.
षड् दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता। निद्रा तन्द्रा भयं क्रोध आलस्यं दीर्घसूत्रता॥
1. अत्यधिक निद्रा (ज्यादा सोना):
सुबह की नींद बहुत मीठी होती है, लेकिन जो इस नींद के जाल में फंसा रहता है, वह जीवन की दौड़ में पीछे छूट जाता है. वक्त से आगे निकलने के लिए सूरज की पहली किरण के साथ जागना बेहद जरूरी है.
2. तंद्रा (मानसिक सुस्ती):
काम के वक्त जम्हाई लेना, शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस करना या हमेशा थका-थका रहना तंद्रा है. यह स्थिति आपकी प्रोडक्टिविटी (उत्पादकता) को शून्य कर देती है.
3. भय (रिस्क लेने का डर):
बिजनेस हो या नौकरी, जो डरा वह समझो हारा. असफलता या बदलाव का डर व्यक्ति को नए प्रयोग करने से रोकता है. जब तक डर का त्याग नहीं करेंगे, धन कमाने के बड़े अवसर नहीं मिलेंगे.
4. क्रोध (एंगर मैनेजमेंट की कमी):
गुस्सा आपके सोचने की शक्ति को कुंद कर देता है. गुस्से में लिया गया एक गलत फैसला आपके पूरे करियर और निवेश (इन्वेस्टमेंट) को बर्बाद कर सकता है.
5. आलस्य (प्रोफेशनल लेजीनेस):
आलस और समृद्धि कभी एक साथ नहीं रह सकते. अगर आप मेहनत करने से कतराते हैं, तो बड़ा साम्राज्य खड़ा करने का सपना देखना छोड़ दीजिए. सक्रियता ही धन को आकर्षित करती है.
6. दीर्घसूत्रता (कल पर टालने की बीमारी):
आज का काम कल पर और कल का काम परसों पर यह आदत कामयाबी के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा है. विदुर जी कहते हैं कि जो समय की कद्र नहीं करता, समय उसे पीछे छोड़ देता है.
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