Sheetla Ashtami 2026: शीतला अष्टमी है आज, ये रहेगा पूजन का शुभ मुहूर्त और उपासना विधि

Sheetla Ashtami 2026: आज, 11 मार्च 2026 को शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है. इस दिन मां शीतला की पूजा कर परिवार को रोगों से बचाने की प्रार्थना की जाती है. जानें शीतला अष्टमी का पूजा मुहूर्त, महत्व और बसोड़ा की परंपरा.

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शीतला अष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त (Photo: ITG) शीतला अष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 5:46 AM IST

Sheetla Ashtami 2026: शीतला अष्टमी का पावन पर्व हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. कुछ क्षेत्रों में इस पर्व को बसोड़ा के नाम से भी जाना जाता है. यह पर्व बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस बार शीतला अष्टमी 11 मार्च 2026 यानी आज मनाया जा रहा है. मान्यता है कि इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है और उनसे रोगों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है.

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कुछ इलाकों में इस पर्व को बसोड़ा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन बासी भोजन खाने की परंपरा है. अष्टमी के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता. लोग सप्तमी की रात को ही भोजन बनाकर रख लेते हैं. अलग-अलग क्षेत्रों में मीठे चावल, दही बड़े, रबड़ी और कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं. अगले दिन माता शीतला को इन व्यंजनों का भोग लगाया जाता है और फिर उसी ठंडे प्रसाद को ग्रहण किया जाता है. तो आइए पंडित प्रवीण मिश्र द्वारा इस पर्व के पूजन का शुभ मुहूर्त जानते हैं. 

शीतला अष्टमी 2026 पूजन मुहूर्त (Sheetla Ashtami 2026 Pujan Muhurat)

पंडित प्रवीण मिश्र के अनुसार, शीतला अष्टमी की अष्टमी तिथि 11 मार्च यानी आज अर्धरात्रि 1 बजकर 54 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 12 मार्च को तड़के 4 बजकर 19 मिनट पर होगा.

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शीतला अष्टमी का पूजन मुहूर्त आज सुबह 6 बजकर 36 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. इस बीच आप कभी भी माता शीतला की पूजा कर सकते हैं. 

शीतला अष्टमी 2026 महत्व (Sheetla Ashtami Significance)

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, शीतला का अर्थ है ठंडक प्रदान करने वाली. माता शीतला को शीतलता देने वाली देवी माना जाता है. इस समय धीरे-धीरे गर्मी बढ़ने लगती है और शीतला अष्टमी के बाद मौसम और गर्म होने लगता है. इसलिए इस पर्व पर माता शीतला से प्रार्थना की जाती है कि उनकी कृपा से शरीर को ठंडक मिले और लोग स्वस्थ रहें.

खासतौर पर पहले के समय में चेचक जैसे रोग काफी फैलते थे. संक्रमण और इंफेक्शन से जुड़ी कई बीमारियों के कारण बहुत से लोगों की जान चली जाती थी. इसलिए कई इलाकों में लोग शीतला अष्टमी के दिन माता शीतला की पूजा करके उनसे इन रोगों से बचाव की प्रार्थना करते थे. विशेष रूप से त्वचा से जुड़ी बीमारियों और संक्रमण से बचाव के लिए माता शीतला से प्रार्थना की जाती थी. बच्चों को ये बीमारियां ज्यादा लगती थीं, इसलिए उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए भी माता से प्रार्थना की जाती थी.

शीतला अष्टमी व्रत का लाभ

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इस दिन माता शीतला से जीवन में स्वच्छता और शुद्धता बनाए रखने की प्रार्थना भी की जाती है. इसलिए उनकी पूजा में साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है. कई जगहों पर शीतला अष्टमी के दिन नीम के पेड़ की पूजा करने की भी परंपरा है. नीम औषधीय गुणों से भरपूर होता है और माता शीतला को प्रिय माना जाता है.

ऐसा भी कहा जाता है कि नीम की पत्तियां पास रखने से संक्रमण वाले रोगों से बचाव होता है. पहले के समय में लोग नीम की पत्तियां या टहनियां लाकर अपने बिस्तर के पास रखते थे ताकि बीमारियों से रक्षा हो सके.

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