Sawan 2026 Date: कब से शुरू होगा सावन का महीना? जानें कितने पड़ेंगे श्रावणी सोमवार

Sawan 2026 Date: हिंदू धर्म में सावन माह का खास महत्व है, यह पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित होता है. भोलेनाथ के भक्त इस पूरे महीने बाबा की भक्ति भाव से पूजा-अर्चना करते हैं और उनका आशीर्वाद पाते हैं. सावन के माह में सबसे अधिक सोमवार का महत्व है. माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती है.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:42 AM IST

Sawan 2026 Date: सनातन धर्म में सावन यानी श्रावण के महीने का एक अलग और विशेष महत्व है. यह पूरा महीना देवों के महादेव की आराधना को समर्पित होता है. रिमझिम फुहारों के बीच चारों तरफ छाई हरियाली और बम-बम भोले के जयकारों से गूंजते शिवालय सावन के आने का एहसास करा देते हैं. इस साल भी शिव भक्त बेसब्री से सावन के महीने की शुरुआत का इंतजार कर रहे हैं. आइए जानते हैं कि साल 2026 में सावन का पवित्र महीना कब से शुरू हो रहा है, इस बार कुल कितने सोमवार पड़ेंगे और इस महीने का धार्मिक व वास्तु महत्व क्या है.

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कब से कब तक रहेगा सावन का प्रिय महीना?

द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) के अगले ही दिन से श्रावण मास की शुरुआत हो जाती है. इस साल यानी 2026 में सावन के महीने की शुरुआत 30 जुलाई (गुरुवार) से हो रही है, जिसका समापन 28 अगस्त (शुक्रवार) को रक्षाबंधन के दिन होगा.

इस बार सावन के महीने में भक्तों को भगवान शिव की उपासना करने के लिए पूरे 4 सोमवार मिलेंगे, जिसे बेहद शुभ संयोग माना जा रहा है.

सावन के सोमवार की तारीखें (Sawan Somwar 2026 Dates)

पहला सोमवार: 3 अगस्त 2026
दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026
तीसरा सोमवार: 17 अगस्त 2026
चौथा सोमवार: 24 अगस्त 2026

क्यों भगवान शिव को इतना प्रिय है सावन?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सती ने अपने दूसरे जन्म में पार्वती के रूप में जन्म लिया था. उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए सावन के महीने में ही कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने इसी महीने में माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था.

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इसके अलावा, समुद्र मंथन के दौरान निकला हलाहल विष भगवान शिव ने इसी महीने में अपने कंठ में धारण किया था, जिससे वे नीलकंठ कहलाए. विष की तपन को शांत करने के लिए सभी देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था. यही कारण है कि सावन में शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है.

कैसे करें सावन में महादेव की पूजा?

सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा का फल कई गुना बढ़कर मिलता है. सावन के दिनों में सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद घर के मंदिर में या शिवालय जाकर भगवान शिव और माता पार्वती के सामने व्रत या विशेष पूजा का संकल्प लें. सबसे पहले गणेश जी और कार्तिकेय जी को जल अर्पित करें. फिर माता पार्वती के प्रतीक हस्तकमल (कटी भाग) पर जल चढ़ाएं. इसके बाद नाग देवता पर जल अर्पित करें. अंत में शिवलिंग पर पतली धार बनाते हुए जल अर्पित करें. जल चढ़ाते समय "ऊं नमः शिवाय" या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें.

सावन का वास्तु उपाय

ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, सावन के महीने में प्रकृति अपनी चरम सुंदरता पर होती है. इस महीने में घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में गंगाजल रखना और हर सोमवार को घर के मुख्य द्वार पर गाय के घी का दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है. इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है.

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